एक्यूट किडनी फेलियर हो सकता है घातक, इन तरीकों से करें बचाव

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इन दिनों एक्यूट किडनी फेलियर का खतरा तेजी से बढ़ रहा हैं, जिसका इलाज भी काफी महंगा होता है। वैसे तो मानव शरीर का हर अंग बेहद जरूरी है, लेकिन किडनी की अपनी ही विशेषता है। Acute Kidney Failure in Hindi

मानव शरीर में दो किडनी होती है। एक किडनी में लगभग दस लाख छलनियां या फिल्टर होते हैं, जो लगातार हमारे शरीर के खून को साफ करने का काम करते हैं।

मानव शरीर की अंदरूनी गतिविधियां दिल के बाद सबसे ज्‍यादा किडनी पर ही निर्भर करती है। जब किडनी काम करना बंद कर देती हैं तब हमारे रक्त में जहरीले पदार्थ जैसे यूरिया और क्रिएटिनिन जमा हो जाते हैं, जो व्यक्ति को बीमार कर देते हैं। ऐसे में हर इंसान को अपनी किडनी का खास ख्याल रखना चाहिए।

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एक्यूट किडनी फेलियर क्या है :

What is Acute Kidney Failure in Hindi

बात करें एक्यूट किडनी फेलियर की तो यह तब होता है, जब आपके गुर्दे रक्त से अपशिष्ट उत्पादों को फिल्टर करना अचानक बंद कर देते हैं।

जब गुर्दों की रक्त छानने की क्षमता नष्ट हो जाती है, तो रक्त में अपशिष्ट पदार्थ खतरनाक स्तर पर जमा होने लगता है। जिससे रक्त की रासायनिक सरंचना असंतुलित हो जाती है।

एक्यूट किडनी फेलियर घातक हो सकता है और इसके लिए विशेष उपचार की आवश्यकता होती है। हालांकि इसे वापस सामान्य स्थिति में लाया जा सकता है।

Acute Kidney Failure in Hindi
Acute Kidney Failure in Hindi

इसके अलावा यदि आपका स्वास्थ्य अच्छा है, तो आप किडनी को सामान्य रुप से काम करने के लिए भी बेहतर बना सकते हैं।

एक्यूट किडनी फेलियर होने के कारण :

Causes of Acute Kidney Failure in Hindi

एक्यूट किडनी फेल्योर होने के मुख्य कारण निम्नलिखित है:

1. बहुत ज्यादा दस्त और उल्टी होने के कारण शरीर में पानी की मात्रा में कमी एवं खून के दबाव का कम होना।
2. गंभीर संक्रमण, गंभीर बीमारी या एक बड़ी शल्य चिकित्सा के बाद।
3. पथरी के कारण मूत्रमार्ग में अवरोध होना ।
4. G6PD Deficiency का होना। इस रोग में खून के रक्तकण कई दवाओं के प्रयोग से टूटने लगते हैं, जिससे किडनी अचानक फेल हो सकती है।

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इसके अलावा फेल्सीफेरम मलेरिया और लैप्टोस्पाइरोसिस, खून में गंभीर संक्रमण, किडनी में गंभीर संक्रमण, किडनी में विशेष प्रकार की सूजन, स्त्रियों में प्रसव के समय खून के अत्यधिक दबाव का होना या ज्यादा खून का बह जाना, दवा का विपरीत असर होना, साँप का डसना, स्नायु पर अधिक दबाव से उत्पन्न जहरीले पदार्थों का किडनी पर गंभीर असर होना इत्यादि एक्यूट किडनी फेल्योर के कारण हैं।

एक्यूट किडनी फेलियर के लक्षण :

Symptoms of Acute Kidney Failure in Hindi

एक्यूट किडनी फेलियर में किडनी की कार्यक्षमता में अचानक रुकावट होने से अपशिष्ट उत्पादकों का शरीर में तेजी से संचय होता है एवं पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन में गड़बड़ी हो जाती है। इन कारणों से रोगी में किडनी की खराबी के लक्षण तेजी से विकसित होते हैं। ये लक्षण अलग-अलग मरीजों में विभिन्न प्रकार के, कम या ज्यादा मात्रा में हो सकते हैं।

  • भूख कम लगना, जी मिचलाना, उल्टी होना, हिचकी आना।
  • एक्यूट किडनी फेल्योर में दोनों किडनी की कार्यक्षमता अल्प अवधि में थोड़े दिनों के लिए कम हो जाती है ।
  • पेशाब कम होना या बंद हो जाना।
  • चेहरे, पैर और शरीर में सूजन होना, साँस फूलना, ब्लडप्रेशर का बढ़ जाना ।
  • दस्त-उलटी, अत्यधिक रक्तस्त्राव, खून की कमी, तेज बुखार आदि किडनी फेल्योर के कारण भी हो सकते हैं।
  • उच्च रक्त्चाप से सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, शरीर में ऐंठन या झटके, खून की उलटी और असामान्य दिल की धड़कन एवं कोमा जैसे गंभीर और जानलेवा लक्षण भी किडनी की विफलता के कारण बन सकता हैं।
  • कुछ रोगियों में किडनी की विफलता के प्रारंभिक चरण में किसी भी प्रकार के लक्षण नहीं दिखाई पड़ते हैं। बीमारी का पता संयोग से चलता है जब अन्य कारणों के लिए रक्त परीक्षण किया जाता है।
  • कमजोरी महसूस होना, उनींदा होना, स्मरणशक्ति कम हो जाना, इत्यादि ।
  • खून में पोटैशियम की मात्रा में वृध्दि होना (जिसके कारण अचानक हृदय की गति बंद हो सकती है) ।
  • किडनी फेल्योर के लक्षणों के अलावा जिन कारणों से किडनी खराब हुई हो उस रोग के लक्षण भी मरीज में दिखाई देते हैं, जैसे जहरी मलेरिया में ठंड के साथ बुखार आना ।

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एक्यूट किडनी फेलियर के बचाव:

Prevention of Acute Kidney Failure in Hindi

जब कोई रोग के कारण किडनी खराब होने का संदेह हो एवं मरीज में उत्पन्न लक्षणों की वजह से किडनी फेल्योर होने की आशंका हो, तब तुरंत खून की जाँच करा लेनी चाहिए।

खून में क्रीएटिनिन और यूरिया की अधिक मात्रा किडनी फेल्योर का संकेत देती है। पेशाब तथा खून का परीक्षण, सोनोग्राफी वगैरह की जाँच से विपरीत प्रभाव के बारे में जाना जा सकता है।

एक्यूट किडनी फेल्योर में दोनों किडनी अचानक खराब होने से रोग के लक्षण ज्यादा मात्रा में दिखाई देते हैं।

एक्यूट किडनी फेल्योर का पूर्वानुमान लगाना या उसे रोकना अक्सर मुश्किल होता हैं, लेकिन आप किडनी की देखभाल करके अपने जोखिम को कम कर सकते हैं। इन तरीकों को अपनाकर अपनी किडनी को हेल्दी रख सकते हैं।

Acute Kidney Failure in Hindi
Acute Kidney Failure in Hindi
  • तनाव न लें नियमित रूप से अनुलोम-विलोव व प्राणायाम का अभ्यास करें।
  • गाजर, तुरई, टिंडे, ककड़ी, अंगूर, तरबूज, अनाना, नारियल पानी, गन्ने का रस व सेब खाएं, लेकिन डायबिटीज है तो गन्ने का रस न पिएं। इन चीजों से पेशाब खुलकर आता है। मौसमी, संतरा, किन्नू, कीवी, खरबूजा, आंवला और पपीते खा सकते हैं।
  • विटामिन-बी 3 में तेजी से एक्यूट किडनी फेल्योर से बचाव करने की क्षमता होता हैं।
  • किडनी खराब हो तो ऐसे खाघ-पदार्थ न खाएं, जिनमें नमक व फॉस्फोरस की मात्रा कम हो। पोटेशियम की मात्रा भी नियंत्रित हो और ऐसे में केला फायदेमंद होता है। इसमें कम मात्रा में प्रोटीन होता हैं।

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एक्यूट किडनी फेलियर का उपचार :

Treatment of Acute Kidney Failure in Hindi

इस रोग का उपचार रोग के कारण, लक्षणों की तीव्रतां और लेबोरेटरी परीक्षण को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग मरीजों में भिन्न-भिन्न होता है। इस रोग के गंभीर रूप में तुरंत उचित उपचार कराने से मरीज को जैसे पुर्नजन्म मिलता है, तो दूसरी तरफ उपचार न मिलने पर मरीज की मृत्यु भी हो सकती है।

Acute Kidney Failure in Hindi
Acute Kidney Failure in Hindi

किडनी फेलियर के लिए जिम्मेदार रोग :

किडनी फेल्योर के मुख्य कारणों में उल्टी, दस्त या फेल्सीफेरम मलेरिया हो सकता है, जिसे नियंत्रण में रखने के लिए त्वरित उपचार करना चाहिए। खून के संक्रमण पर नियंत्रण के लिए विशेष एंटीबायोटिक्स देकर उपचार किया जाता है। रक्तकण टूट गये हों, तो खून देना चाहिए।

-इस रोग में खराब हुई दोनों किडनी उचित उपचार से संपूर्ण रूप से ठीक होकर पुनः कार्य करने लगती है।
– पथरी होने के कारण मूत्रमार्ग में अवरोध हो, तो दूरबीन द्वारा अथवा ऑपरेशन द्वारा उपचार करके इस अवरोध को दूर किया जाना चाहिए।
– तुरंत एवं उचित उपचार से खराब हुई किडनी को अधिक खराब होने से बचाया जा सकता है एवं किडनी फिर से संपूर्ण रूप से काम कर सकती है।

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खाने में परहेज :

  • किडनी के काम नहीं करने के कारण होनेवाली तकलीफ या जटिलताओं (कम्पलीकेशन) को कम करने के लिए आहार में परहेज करना जरूरी होता है।
  • पेशाब की मात्रा को ध्यान में रखते हुई पानी एवं अन्य पेय पदार्थ को कम लेना चाहिए, जिससे सूजन और साँस फूलने की तकलीफ से बचा का सके।
  • खून में पोटैशियम की मात्रा न बढ़े इसके लिए फलों का रस, नारियल पानी, सूखा मेवा इत्यादि नहीं लेना चाहिए। यदि खून में पोटैशियम की मात्रा बढ़ती है, तो यह हृदय पर जानलेवा प्रभवा डाल सकती है।
  • नमक का परहेज सूजन, उच्च रक्तचाप, साँस की तकलीफ एवं ज्यादा प्यास लगने जैसी समस्याओं को नियंत्रण में रखता है।

दवाओं द्वारा उपचार :

Medicines for Acute Kidney Failure in Hindi

हमारा मुख्य लक्ष्य है किडनी को बचाना और किडनी को किसी भी प्रकार की जटिलता से मुक्त रखना।

  • संक्रमण का इलाज करना एवं ऐसी दवाओं का परहेज जो किडनी के लिए हानिकारक हों।
  • इस रोग में उचित दवा द्वारा शीध्र उपचार से डायालिसिस के बगैर भी किडनी ठीक हो सकती है।
  • पेशाब बढाने की दवा: पेशाब कम आने के कारण शरीर में होने वाली सूजन, साँस की तकलीफ इत्यादि समस्याओं को रोकने के लिए यह दवा अत्यधिक उपयोगी है ।
  • उल्टी एवं एसिडिटी की दवाइओं: किडनी फेल्योर के कारण होनेवाली उल्टियाँ, जी मिचलाना, हिचकी आना इत्यादि को रोकने के लिए इन दवाओ का सेवन उपयोगी है ।
  • अन्य दवाइयाँ जो साँस फूलने, खून की उल्टी का होना, शरीर में ऐंठन जैसी गंभीर तकलीफों में राहत देती हैं।

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डायालिसिस द्वारा उपचार :

Dialysis in Acute Kidney Failure

याद रखें की डायालिसिस एक कृत्रिम प्रक्रिया है, जो क्षतिग्रस्त किडनी के कार्यों को पूर्ण करता है। किडनी काम नहीं करने के कारण शरीर में जमा होने वाले अनावश्यक पदार्थो, पानी, क्षार एवं अम्ल जैसे रसायनों को कृत्रिम विधि से दूर कर खून का शुद्धिकरण करने की प्रक्रिया को डायालिसिस कहते है।
डायालिसिस के दो प्रकार है : पेरिटोनियल और हीमोडायालिसिस

Acute Kidney Failure in Hindi
Acute Kidney Failure in Hindi

डायालिसिस की जरुरत कब पडती है ? :

When Patient Need Dialysis

एक्यूट किडनी फेल्योर के सभी मरीजों का उपचार दवाई और खाने में परहेज़ रखकर किया जाता है। लेकिन जब किडनी को ज्यादा नुकसान हो गया हो तब सभी उपचार करने के बावजूद रोग के लक्षण बढ़ते जाते है, जो जानलेवा हो सकते है । ऐसे कुछ मरीजों में डायालिसिस जरुरी हो जाता है।

सही समय पर डायालिसिस के उपचार से ऐसे मरीज को नया जीवन मिल सकता है। शरीर में पानी की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाना, पोटैशियम व एसिड की मात्रा बढ़ जाना इत्यादि किडनी के ख़राब होने का संकेत देते हैं। इस रोग में डायालिसिस का विलम्ब जानलेवा तथा समय पर डायालिसिस जीवनदान दे सकता है ।

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डायालिसिस कितनी बार करना पड़ता है ? :

how long does a dialysis treatment take

  • जब तक पीड़ित मरीज की खराब हुई किडनी, फिर से संतोषजनक रूप से काम न करने लगे, तब तक डायालिसिस कृत्रिम रूप से किडनी का काम करके मरीज की तबियत ठीक बनाये रखने में मदद करता है।
  • किडनी को सुधरने में सामन्यतः1 से 4 सप्ताह का समय लगता है । इस दौरान अवशयकतानुसार डायालिसिस कराना जरुरी है।
  • कई व्यक्तिओ में यह गलत धारणा होती है की एक बार डायालिसिस कराने से बार-बार डायालिसिस करना पड़ता है । कभी-कभी इसी डर से मरीज उपचार कराने में विलंब कर देते हैं, जिससे रोग की गंभीरता बढ़ जाती है और डॉक्टर के उपचार के पूर्व ही मरीज दम तोड़ देता है।
  • सभी मरीजों में दवाई और कुछ मरीजों में डायालिसिस के उचित उपचार से कुछ दिनों (या हफ्ते) में दोनों किडनी पुनः संपूर्ण रूप से काम करने लगती है। बाद में ऐसे मरीज संपूर्ण स्वस्थ हो जाते है और उन्हें किसी प्रकार की दवाई या परहेज की आवश्यकता नहीं रहती है ।
Acute Kidney Failure in Hindi

एक्यूट किडनी फेलियर की रोकथाम :

How to Avoid Acute Kidney Failure

  • एक्यूट किडनी फेल्योर के कारणों की शीघ्रता से जाँच व उपचार। ऐसे मरीजों में किडनी की कार्यक्षमता में गिरावट के संभावित कारणों की लगातार जाँच कर प्रारंभिक उपचार करना।
  • ब्लडप्रेशर को गिरने से रोकना और इसका शीघ्र उपचार करना
  • किडनी को नुकसान पहुँचाने वाली दवाओं को न लेना और संक्रमण का शीघ्र उपचार करना और पेशाब की मात्रा को नियंत्रित रखना।
  • दस्त, उल्टी, मलेरिया, जैसे किडनी खराब करनेवाले रोगों का तुरंत निदान और उपचार से एक्यूट किडनी फेल्योर को रोका जा सकता है।
  • एक्यूट किडनी फेल्योर में डायालिसिस की आवश्यकता कुछ दिनों के लिए ही पड़ती है ।

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