शास्त्रों के अनुसार ये चीज़ें अपवित्र होते हुए भी मानी जाती हैं ‘पवित्र’

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हिन्दू धर्म की विशेषता यह है कि यह सभी धर्मों में प्राचीन व समृद्ध धर्म माना जाता है इसमें ज्ञान का भंडार हमारे धर्म ग्रन्थ व शास्त्र हैं. वेद, पुराण, उपनिषद आदि शास्त्र महान ज्ञान से भरे पड़े हैं, वेदों पुराणों में न केवल धार्मिक ज्ञान भरा पड़ा है Apavitra Hote Hue Bhi Hain Pavitra

बल्कि ये पूरी दुनिया के लिए तत्व ज्ञान के सबसे प्रथम स्त्रोत हैं, वेदों से पहले इस धरती पर कोई भी ज्ञान की पुस्तक नही लिखी गयी. आज हम इन्ही धर्म शास्त्रों के आधार पर कुछ तत्व ज्ञान की बातें बताने जा रहे हैं

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हिंदू धर्म में पवित्रता का एक विशेष महत्व है कुछ ऐसी चीजें जो देखने में गंदी लगती है लेकिन हिंदू धर्म में पवित्र मानी जाती हैं। जिसका उल्लेख हिंदू धर्म की गीता, महाभारत में भी किया जाता है। ऐसी अपवित्र चीजें जिनके छूने से मरने वाले व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ती हो जाती है।

ऐसा हम नहीं कर रहे हैं बल्कि वेदों पुराणों के महान योद्धाओं ने इस बात का गहराई से अध्ययन किया और बताया है जानिए वो कौन सी वस्तुएं हैं जिनका यदि गहराई से अध्ययन किया जाये तो अपवित्र मालूम होते हुए भी पवित्र मानी जाती हैं

हिंदू धर्म में ऐसे बहुत से ग्रंथ हैं जिनसे हमें बहुत कुछ जानने को मिलता है। उन्हीं ग्रंथों में से एक है विष्णु स्मृति। विष्णु स्मृति के अनुसार कुछ चीज़ें ऐसी हैं जो अपवित्र होने के बाद भी पवित्र मानी जाती हैं। ये हमें जानवर, पक्षी और कीड़ों के मल, उल्टी और उनके मरने से मिलती है। तो आइए जानते हैं उन चीज़ों के बारे में जिनका इस्तेमाल हम अपनी रोज़ाना की दिनचर्या में करते आ रहे हैं। 

संस्कृत श्लोक-

उच्छिष्टं शिवनिर्माल्यं, वमनं शवकर्पटम् |
काकविष्टा ते पञ्चैते, पवित्राति मनोहर||

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1. गंगाजल :

गंगा का जल गंगा जी का अवतरण स्वर्ग से सीधा शिव जी के मस्तक पर हुआ । नियमानुसार शिव जी पर चढ़ायी हुई हर चीज़ निर्माल्य है पर गंगाजल पवित्र है|

2. गाय का दूध :

गाय का दूध पहले उसका बछड़ा पीकर उच्छिष्ट करता है यानि गौमाता के थानों को मुँह लगाकार उन्हें झूठा करता है| फिर मनुष्य दूध निकालकर पीता है| इसी दूध को भगवान शिव पर चढ़ाया जाता है|

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3. शहद :

मधुमख्खी जब फूलों का रस लेकर अपने छत्ते पर आती है , तब वो अपने मुख से उस रस की शहद के रूप में उल्टी करती है लेकिन फिर भी इसे पवित्र कार्यों में पयोग किया जाता है|

4. रेशमी वस्त्र :

धार्मिक कार्यों को सम्पादित करने के लिये पवित्रता की आवश्यकता रहती है , रेशमी वस्त्र को पवित्र माना गया है , पर रेशम को बनाने के लिये रेशमी कीडे़ को उबलते पानी में डाला जाता है ओर उसकी मौत हो जाती है उसके बाद रेशम मिलता है तो हुआ शव कर्पट फिर भी पवित्र है|

Apavitra Hote Hue Bhi Hain Pavitra
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5. पीपल :

कौवा पीपल पेड़ों के फल खाता है ओर उन पेड़ों के बीज अपनी विष्टा में इधर उधर छोड़ देता है जिसमें से पेड़ों की उत्पत्ति होती है ,आपने देखा होगा की कही भी पीपल के पेड़ उगते नही हे बल्कि पीपल काक विष्टा से उगता है ,फिर भी पवित्र है.

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