आसाराम को नाबालिग लड़की से रेप केस में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा

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कथावाचक आसाराम को जोधपुर कोर्ट ने नाबालिग लड़की से रेप केस में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. इसके साथ ही उसकी राजदार शिल्पी और शरतचंद्र को दोषी ठहराते हुए 20-20 साल की सजा सुनाई गई है. वहीं, प्रमुख सेवादार शिवा और रसोइया प्रकाश को कोर्ट ने बरी कर दिया है. साल 2013 में आसाराम के खिलाफ यूपी के शाहजहांपुर की रहने वाली एक लड़की ने रेप का सनसनीखेज आरोप लगाया था.

इस तरह 77 वर्षीय आसुमल थाउमल हरपलानी उर्फ आसाराम की बाकी जिंदगी अब सलाखों के पीछ कटेगी. जज मधुसूदन शर्मा ने जैसे ही सजा का ऐलान किया, इसे सुनते ही आसाराम रो पड़ा. वह निढाल हो गया. चेहरा उतर गया. इससे पहले जब जज ने उसे दोषी करार दिया, तो वह हंसा और राम नाम जपने लगा. उसने अपनी उम्र का हवाला देते हुए जज से रहम की गुहार लगाई. अपने वकीलों से कहा कि वे कुछ तो बोलें.

खाली करवाए आसाराम के आश्रम

जोधपुर जेल में कोर्ट बनाया गया है. यहीं फैसला सुनाया जा रहा है. यहां आसपास किसी बाहरी व्यक्ति को फटकने की इजाजत नहीं है. आसाराम के पाल स्थित आश्रम में चंद सेवादारों को छोड़कर पूरी तरह खाली करवा दिया गया. आश्रम के आसपास किराए पर रह रहे समर्थकों को भी सोमवार को ही रवाना कर दिया गया है.

जेल की तरफ जाने वाले रास्ते सील

जेल में कोर्ट लगने और फैसले के मद्देनजर पुलिस ने मंगलवार रात से ही सेंट्रल जेल की तरफ जाने वाले रास्ते सील कर दिए हैं. सरकारी कर्मचारियों को परिचय पत्र की जांच के बाद जाने की इजाजत दी जा रही है. इसके अलावा किसी भी व्यक्ति के पैदल या वाहन से आवाजाही पर पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया है.

सुरक्षा के हैं चाक-चौबंद इंतजाम

डीसीपी (ईस्ट) डॉ. अमनदीप सिंह कपूर ने बताया कि बीकानेर, खैरवाड़ा सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों से आई आरएसी की 5 कंपनी और उनके साथ ड्यूटी पर रहने वाले स्थानीय अधिकारियों का आपस में कोआर्डिनेशन व क्षेत्र से वाकिफ हो सके, इसके लिए एरिया डोमिनेशन की प्रक्रिया के तहत रूट मार्च निकाला गया है.

जेल में पूरी रात बेचैन रहे आसाराम

बीती रात आसाराम जोधपुर सेंट्रल जेल में आराम से सो नहीं सका. फैसले को लेकर बेचैनी ऐसी थी, कि वो देर रात तक बैरक में टहलता रहा. आश्रम से आया खाना जेल में आसाराम तक पहुंचा भी, लेकिन वो रोजाना की तरह सुकून से खाना नहीं खा पाया. देर रात करीब 12 बजे तक आसाराम बेचैन ही नजर आया.

कड़ी सुरक्षा में जज मधुसूदन शर्मा

राम रहीम के जज जगदीप सिंह की तरह आसाराम के खिलाफ दर्ज केस की सुनवाई कर रहे एससी-एसटी कोर्ट के न्यायाधीश मधुसूदन शर्मा को पुलिस की ओर से कड़ी सुरक्षा उपलब्ध कराई गई है. जज मधुसूदन शर्मा बुधवार सुबह कड़ी सुरक्षा के साथ सेंट्रल जेल में लगने वाली कोर्ट में पहुंचे हैं.

इलाज के लिए आश्रम आई पीड़िता

आसाराम पर इलाज के लिए आश्रम आई एक 16 साल की नाबालिग लड़की से बलात्कार का आरोप है. पीड़ित परिवार के मुताबिक, 5 साल पहले पीड़ित परिवार ने अपने दो बच्चों को आसाराम के छिंदवाडा के गुरुकुल में पढ़ने के लिए भेजा था. 7 अगस्त 2013 को पीड़िता के पिता को छिंदवाडा गुरुकुल से ने बेटी के बीमार होने की खबर दी.

कुटिया में बुलाकर रेप का आरोप

अगले दिन जब पीड़िता के माता पिता छिंदवाडा गुरुकुल पहुंचे. उन्हें बताया गया कि उनकी बेटी पर भूत-प्रेत का साया है. इसे आसाराम ही ठीक कर सकते हैं. 14 अगस्त को पीड़िता का परिवार आसाराम से मिलने उनके जोधपुर आश्रम पहुंचा. 15 अगस्त की शाम को पीड़िता को ठीक करने के बहाने से आसाराम ने उसे अपनी कुटिया में बुलाकर रेप किया.

दिल्ली में दर्ज कराया था केस

इसके बाद पूरा परिवार घर वापस लौटा, तो 17 अगस्त को लड़की ने अपने घरवालों को सारी बात बताई. इसी बीच उन्हें पता चला कि आसाराम 18 से 20 अगस्त तक दिल्ली के रामलीला मैदान में शिविर कर रहे हैं. लिहाजा पूरा परिवार दिल्ली पहुंच गया और उन्होंने रामलीला मैदान के पास कमला मार्केट थाने में केस दर्ज करा दी.

इंदौर आश्रम से हुई थी गिरफ्तारी

यहां जीरो एफआईआर दर्ज कराई गई. इसके बाद इस केस को जोधपुर ट्रांसफर कर दिया गया. लेकिन जोधपुर पुलिस आसाराम पर हाथ डालने से डरती रही. पीड़ित परिवार ने हार नहीं मानी. मीडिया में खबर आने के बाद सरकार और पुलिस पर दबाव बढ़ा. इस तरह 16 दिन बाद आसाराम को इंदौर आश्रम से गिरफ्तार कर लिया गया.

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