सैकेंड हैंड कार खरीदते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

आजकल कार बाजार में हर साल दर्जनों मॉडल्स लॉन्च होते हैं। 2-3 साल इस्तेमाल करने के बाद कार पुरानी लगने लगती है, फिर हम नई कार खरीदने की सोचते हैं और इसलिए सेकेंड हैंड कारों का बाजार नई कारों से बड़ा होता जा रहा है। ऐसे में ग्राहकों के पास कई ऑप्शन मौजूद हैं अगर आप एक पुरानी कार खरीदने की सोच रहे हैं तो यहां हम आपको कुछ आसान टिप्स बता रहे हैं जिससे आपको कार खरीदने में आसानी होगी।

जब आप नयी कार खरीदते है तो आपको यह विश्वास रहता है कि कार नयी है तो उसकी क्वालिटी में कोई संदेह नहीं रहता है। लेकिन अगर आप सैकेंड हैंड कार लेने जा रहे है तो आपको कई बातों का बारिकी से ध्यान रखने की जरूरत होती है। क्योंकी जो भी आपको कार बेच रहा है उसकी बातों में कितनी सच्चाई यह आपको पता नहीं होता है। सैंकेड हैंड कारों को बेचते वक्त ऐसा चमकाकर रखा जाता है कि आप उनकी छुपी हुयी कमियों को नहीं देख पाते है और ऐसी कार को खरीद कर आपको बाद में पछताना पडता है। आज हम आपको कुछ ऐसी टिप्स के बारे में बताने जा रहे है जिससे आप यह जान पायेगें कि जो सैकेंड हैंड कार आप खरीदने जा रहे है वह खरीदने लायक भी है या नहीं।

 

कार का बाहरी लुक

सैकेंड हैंड कार खरीदते वक्त सबसे पहले कार के बाहरी लुक को देखना चाहिये। कि कहीं गाडी कहीं से डैमेज ते नहीं है। गाडी में डेन्ट तो नहीं है। कई बार ऐसा होता है विक्रेता गाडी के डेन्ट या डैमेज को ठीक कराकर उस पर पेन्ट करवा देता है तो इसके लिये भी आपको गौर से देखने की जरूरत होती है कि पूरी कार पर एक समान पेंट है या नहीं। अगर आपको लगे कि गाडि का अलग अलग पैनल पर अलग पेंट है तो यह समझने के लिये काफी है कि गाडी पहले दुर्घटना ग्रस्त हो चुकी है और उस पर बाद में रिपेयर पेंट किया गया है। साथ ही आप गाडि के दरवाजों को भी ध्यान से देंखें अगर गाडि के दरवाजे में उपर नीचे गैप में अंतर तो नहीं है या कही कोई खरोंच तो नहीं है। अगर लगे ऐसा है तो समझ लें कि गाडी को रिपेयर किया गया है।

टायर की जॉच

जब भी आप सैकेंड हैड गाडी खरीदें तब देखें की उस कार के टायरों की हालत कैसी है। वो ज्यादा घिसे हुये तो नहीं है। टायर के अंदर और बाहर दोनों हिस्से को देखें की वो समान घिसे हुये है या नहीं। साथ ही यह भी चैक करें की टायर की थ्रेडिंग पर्याप्त है या नहीं। इसे चैक करने के लिये एक सिक्का टायर की थ्रेडिंग में अंदर डालकर देखें अगर वह अधिक अंदर तक नहीं जा पाता है तो समझ लें कार में नये टायर्स लगाने की जरूरत है।

इंजन

कार का सबसे मुख्य पार्ट होता है उसका इंजन जब भी आप सैकेंड हैंड कार खरीदें तब इंजन को बारिकी से चैक करें। देखें की इंजन के आसपास कोई ऑयल तो लीक नहीं हो रहा है। साथ ही यह भी देखें की इंजन बेल्ट सही ढंग से फिट है और घिसी हुयी तो नहीं है। फ्युड्स भी चैक करें। इसके अलावा ऑयल चैक करें देखें की उसका रंग कैसा है अगर वह काला और गंदा हो तो समझ जायें की कार की सही तरिके से मेंटेनेंस नहीं की गयी है। साथ ही कार के सर्विस रिकार्ड को भी चैक करें।

इंटिरियर को भी करें चेक

बाहर से और टायर को चैक करने के बाद आप कार के इंटिरियर को चैक करें देखें की सीट कवर और डेशबोर्ड ठीक ठाक है या नहीं। इंडिकेटर और वाइपर स्विच काम कर रहे है या नहीं। इसके अलावा इंटिरियर की फिटिंग सही है या नहीं। और साथ ही म्यूजिक सिस्टम और स्पीकर को भी चैक करना ना भूलें।

आपराधिक रिकॉर्ड

कार खरीदने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आप जिस कार को खरीदने जा रहे हैं उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो और वो किसी भी आपराधिक गतिविधि में इस्तेमाल न की गई हो। जिस कार को खरीदने जा रहे हैं वो कहीं चोरी की तो नहीं है। कार कितनी बार दुर्घटना का शिकार हुई है इन बातों की भी जानाकरी होनी चाहिये।

इंश्योरेंस

जिस कार को आप खरीद रहे हैं उसका इंश्योरेंस है या नहीं, यह भी जान लेना बेहद जरूरी है। साथ ही प्रीमियम सही टाइम पर भरा गया है या नहीं इस बात की भी पुष्टि करें। इसके अलावा इंश्योरेंस पेपर्स आपके नाम से ट्रांसफर हो जाए। इस बात पर भी गौर करें। साथ ही रोड टैक्स के पेपर्स चेक करें और ओरिजिनल इनवॉयस की भी मांग करें।

टैस्ट ड्राइव

इन सभी बातों पे गौर कर लेने के बाद भी बिना कार की टेस्ट ड्राइव किये बिना कभी सैकेंड हैंड कार को ना खरीदें। देखें की गाडी आसनी से स्टार्ट तो हो रही है ना। कार चलाते समय उसकी आवाज को भी सूनें। आवाज से भी कार की कंडिशन का पता चल जाता है। ब्रेक सही ढंग से तो काम कर रहे है। अगर ब्रेक लगाते समय कार वाइब्रेशन कर रही है तो समझ जायें कि कार के ब्रेक पेड्स घिस चुके है। कार को उबडखाबड सडकों पर चलाये इससे यह पता चलेगा की कार से कोई आवाज तो नहीं आ रही है अगर आ रही है तो समझ लें कार का बॉडी पैनल और डोर फिटिंग ढीली हो चुकी है।

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