जानिए राजीव गांधी की हत्या के 29 साल बाद जेल में किस हाल में हैं हत्यारे

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भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 मई, 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदुर में मानव बम धनु ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी थी. इस धमाके में कुल 18 लोगों की जान गई थी. धमाका इतना जोरदार था कि राजीव के परखच्चे उड़ गए थे. उनका पैर का लोटो का जूता और कलाई पर बंधी गुच्ची की घड़ी देखकर ही उन्हें पहचाना गया. Conditions of Rajiv Gandhi Murderers

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इस मामले में पकड़े गए हत्यारे आज भी तमिलनाडु की जेलों में कैद हैं. बार-बार राजीव गांधी के हत्यारों को रिहा किए जाने की मांग उठती रही है. खास बात यह भी है कि राजीव गांधी के हत्यारों को सोनिया गांधी सहित गांधी-नेहरू परिवार ने माफ कर दिया है. लेकिन फिर भी वो करीब 29 सालों से जेल में बंद हैं. हालांकि तमिलनाडु सरकार ने जरूर कई बार उनकी रिहाई की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश जरूर की है.

इस मामले की सुनवाई के दौरान एक हज़ार गवाहों ने लिखित बयान दिए थे. 288 गवाहों से जिरह हुई थी. 1477 दस्तावेज कोर्ट में जमा किए गए थे, जिनके कुल पन्नों की संख्या 10,000 से ज्यादा थी. इसके अलावा 1,180 नमूनों, सबूतों और वकीलों के हजारों तर्कों के बाद इस केस में फैसला हो सका था. केस की सुनवाई के लिए बनाई गई विशेष अदालत ने राजीव गांधी की हत्या के षड्यंत्र में शामिल सभी दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी. आइए जानते हैं कि राजीव के कौन से हत्यारे जेलों में बंद हैं और अब किस हाल में हैं

Conditions of Rajiv Gandhi Murderers
Conditions of Rajiv Gandhi Murderers

मुरुगन :

मुरुगन, श्रीलंका के जाफना से आया था. यह लिट्टे का मुख्य प्रशिक्षक और बम एक्सपर्ट था. मुरुगन की शादी नलिनी श्रीहरन से हुई थी. नलिनी भी हत्या के इस षड्यंत्र में शामिल थी. दोनों ही पति-पत्नी को 1999 में फांसी की सजा सुनाई गई थी. एक साथ सजा काटते हुए नलिनी ने जेल में ही एक बच्ची को जन्म दिया था.

हालांकि बेटी के जन्म के बाद उसकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया था. सुनवाई की गई रिपोर्ट्स के मुताबिक ये दोनों की पति-पत्नी इस षड्यंत्र में शामिल लोगों का ब्रेनवॉश किया करते थे. मुरुगन जेल में बीमार रहता है. उसने मर्सी किलिंग की याचिका भी दाखिल की हुई है. उसने बीच में जेल अधिकारियों की बदसलूकी के खिलाफ 10 दिनों का उपवास भी किया था.

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एजी पेरारिवलन :

एजी पेरारिवलन 30 जुलाई, 1971 को तमिलानाडु के वेल्लोर जिले में पैदा हुआ था. 1991 में अपनी गिरफ्तारी के समय वह इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में अपना डिप्लोमा पूरा कर चुका था. 18 फरवरी, 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने इसकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था. पेरारिवलन को आज भी अपनी रिहाई का इंतजार है.

जेल में उसने बैचलर इन कम्युटर अप्लीकेशन की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद एमसीए किया. ये दोनों कोर्स उसने इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी से किए. उसने ये एग्जाम 90 फीसदी से ज्यादा नंबर से पास किए. इसके बाद 2013 में तमिलनाडु राज्य के एक और एग्जाम में वो गोल्ड मेडलिस्ट रहा.

संथन :

संथन, 12 सितंबर, 1990 को इस बम धमाके को अंजाम देने के लिए भारत पहुंचे पहले दल में शामिल था. यह राजीव गांधी को बम से उड़ाने वाली मानव बम धनु का दोस्त था. संथन जो कर रहा था, उसपर लिट्टे का इंटेलिजेंस चीफ पोट्टू अम्मान नज़र बनाए हुए था. एक बार नलिनी ने जांच के दौरान बताया कि संथन और शिवरासन ने ऐसे किसी भी इंसान को नहीं बख्शा था, जिसने उनका साथ नहीं दिया. संथन के ऊपर हत्यारों की मदद करने का आरोप लगा था.

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एस नलिनी :

नलिनी ने चेन्नई के एक कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की थी. वह चेन्नई में ही एक प्राइवेट कंपनी में स्टेनोग्राफर की नौकरी करती थी. इसके साथ ही वह डिस्टेंस एजुकेशन के जरिए मास्टर्स का कोर्स भी कर रही ती. सुनवाई के दौरान उसने यह माना था कि वह लिट्टे के एक एक्टिविस्ट के संपर्क में आई और इसी दौरान उसका लिट्टे की गतिविधियों से परिचय हुआ. बाद में वह इस संगठन की एक्टिव कैडर बन गई. उसका भाई पीएस भाग्यनाथन भी एक्टिव लिट्टे समर्थक था और उसके प्रेस में तमिल ईलम समर्थित साहित्य छपा करता था.

गिरफ्तारी के कुछ महीनों बाद ही नलिनी ने एक बेटी को जन्म दिया. जस्टिस थॉमस ने नलिनी की फांसी को माफ किए जाने के कई कारणों में से एक कारण उसके छोटी बेटी को भी बताया था. उनके अनुसार यदि मुरुगन और नलिनी दोनों को फांसी हो जाती तो यह बच्ची अनाथ हो जाती. इसके कुछ ही दिनों बाद सोनिया गांधी व्यक्तिगत तौर पर जाकर राष्ट्रपति से मिलीं और उन्होंने नलिनी को माफ कर देने की अपील की. जिसके बाद सन् 2000 में राष्ट्रपति ने नलिनी की दया याचिका को मंजूरी देते हुए नलिनी को माफ कर दिया.

नलिनी ने भी अदालत में मर्सी किलिंग की अप्लीकेशन दे रखी है. उसकी बेटी लंदन में किसी कंपनी में नौकरी करती है. बीच में वो पैरोल पर रिहा होकर बेटी की शादी करने गई थी.

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पी. रविचंद्रन :

यह लिट्टे का एक एक्टिव सदस्य था. यह श्रीलंका से हथियारों की ट्रेनिंग लेकर आया था. यह कई बार यहां विद्रोही नेता से मिला था. पोट्टु अम्मान ने इसे एक मुलाकात के दौरान शिवरासन से मिलवाया था. और शिवरासन के लिए जरूरी इंतजाम करने को कहा था. शिवरासन ही हमला करने वाले दल का प्रमुख नेता था. जिसने हमले के बाद आत्महत्या कर थी.

जयकुमारन :

जयकुमारन की बहन की शादी इसी केस में दोषी पयास से हुई थी. कथित तौर पर दोनों को लिट्टे ने भारत भेजा था ताकि वे इस धमाके को अंजाम देने वाले लोगों के लिए सुरक्षित स्थान का इंतजाम कर सकें.

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पयास :

पयास और जयकुमारन दोनों इस हमले के बाद बचे हुए आतंकियों के रहने और हथियारों के जरिए मदद करना था. ट्रायल के दौरान इसे मौत की सजा हुई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बाद में खारिज कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि वह साजिश में सीधे शामिल रहा हो, इस बात के सुबूत नहीं मिलते हैं.

फिलहाल 7 मई, 2019 को फिर से राजीव गांधी की हत्या की दोषी नलिनी श्रीहरन ने मद्रास हाई कोर्ट का रुख किया है और सभी सात दोषियों की रिहाई के संबंध में राज्य सरकार की सिफारिश को मंजूरी देने के लिए तमिलनाडु के राज्यपाल को निर्देश देने की मांग की है.

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