जानिए अमरनाथ गुफा से जुडे वे रहस्य जिन्हें हर किसी को नहीं पता

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पूरे भारत में अनेको प्राचीन मंदिर है इन मंदिरों में भगवान शिव के मंदिर काफी प्राचीन है। भगवान शिव के पूरे भारत में 12 ज्योर्तिलिंग है इन ज्योर्तिलिंग के अलावा भी भगवान शिव का एक ऐसा मंदिर है जिसमें भक्तों की बडी आस्था है यह मंदिर है अमरनाथ। अमरनाथ की गुफा में प्राकृतिक रूप से बर्फ का शिवलिंग बनता है। अमरनाथ मंदिर का रास्ता बडा दुर्गम है और वहां बर्फ पडने के कारण ठंड भी अधिक रहती है लेकिन इन सभी कठिनाइयों को पार करके भक्त भगवान शिव के दर्शन करने पहॅुच जाते है। इस मंदिर को प्राचीनकाल में अमरेश्वर भी कहा जाता था। लेकिन क्या आपको पता है इस मंदिर से जुड़े अनकहे तथ्य, जिन्हें शायद आप नहीं जानते हैं. तो आइये बताते हैं ऐसे ही कुछ अनकहे तथ्य

1. मंदिर की खोज की एक मुस्लिम ने

हिन्दुओं के महत्वपूर्ण आस्था के केन्द्र इस मंदिर की खोज किसी हिन्दू ने नहीं बल्कि एक मुस्लिम ने की थी। एक बार बुटा मलिक नाक का एक मुस्लिम व्यक्ति अपनी भेडें चराता चराता पहाडां पर दूर तक निकल गया। वहां पर उसकी मुलाकात एक साधु से हुयी। साधु ने बुटा मलिक को एक कांगडी दी जिसमें कोयले थे। जब बुटा मलिक घर गया और उसने देखा कि उस कांगडी में कोयले की जगह सोना है। अगले दिन वह वापिस उस जगह गया लेकिन वहां कोई साधु नहीं दिखा बल्कि उसे एक गुफा दिखायी दी। उस गुफा में यह शिवलिंग था और उसी दिन से यह मंदिर एक तीर्थस्थान बन गया।

2. भगवान शिव ने सुनायी थी अमरकथा

अमरनाथ गुफा का महत्व बाबा अमरनाथ का प्राकृतिक रूप से बना शिवलिंग तो है ही साथ ही यह गुफा इसलिये भी आस्था का केंद्र है क्योंकी भगवान शिव ने यहां पर ही माता पार्वती को अमर होने की कथा सुनायी थी। भगवान नहीं चाहते थे कि माता पार्वती के अलावा और कोई यह कथा सूने इसलिये भगवान शिव माता पार्वती को एंकात में अमरकथा सुनाने के लिये इस गुफा में आये थे।

3. सभी को साथ छोड दिया था भगवान शिव ने

भगवान शिव नहीं चाहते थे कि माता पार्वती के अलावा और कोई यह अमरकथा सुने इसलिये उन्होनें माता पार्वती को गुफा में ले जाने से पहले सभी का साथ छोड दिया था। सबसे पहले उन्होनें पहलगाम में नंदी को त्याग किया। उसके बाद चंदनबाडी में भगवान शिव ने अपनी जटाओं से चद्रंमा को आजाद किया। फिर शेषनाग झील पर उन्होनें अपने गले से सर्पों को उतारा। फिर महागुणस पर्वत पर उन्होनें अपने पुत्र गणेश को भी छोड दिया। अंत में पंचतरणी स्थान पर भगवान ने पॉचो तत्वों का भी परित्याग कर दिया।

4. माता पार्वती के अलावा इन तीन ने और सुनी थी अमरकथा

भगवान शिव ने अमर कथा सुनाने के वक्त सब का साथ तो छोड दिया था लेकिन जब भगवान माता पार्वती को कथा सुना रहे थे तब उस गुफा में एक कबुतर का जोडा और एक तोता भी था जिन्होनें वह अमरकथा सुन ली थी। तोता यानि शुक तो शुकदेव जी के रूप में अमर हो गये और वो कबुतर का जोडा आज भी कई भक्तों को दिखायी देता है।

5. इस गुफा में है माता का शक्तिपीठ भी

अमरनाथ गुफा में बर्फ के शिवलिंग के साथ ही माता के 51 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ भी है। मान्यता है कि माता सती का कंठ यहां पर गिरा था जिसके वजह से उन्हें महामाया के रूप में पूजा जाता है और भगवान शिव की यहां त्रिसंध्येश्वर के रूप में पूजा होती है। इस मंदिर में बनने वाला शिवलिंग पक्की बर्फ का बनता है जबकि यहां से दूर दूर तक केवल कच्ची बर्फ ही दिखायी देती है। पक्का शिवलिंग कैसे बनता है आज भी यह एक रहस्य का विषय है।

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