आखिर क्या होता है ‘बलिदान बैज’ और कौन कर सकता है इसका इस्तेमाल

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भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी द्वारा साउथ अफ्रीका के खिलाफ खेले गए मैच में अपने दस्तानों पर ‘बलिदान बैज’ लगाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. ICC ने इसको हटाने को कहा है तो वहीं BCCI ने धोनी का समर्थन करते हुए ICC को खत लिखकर इसकी इजाजत मांगी है. ऐसे में जब ‘बलिदान बैज’ को लेकर चर्चा है तो आप भी यह जानने में इच्छुक होंगे की आखिर यह ‘बलिदान बैज’ होता क्या है ? आज हम आपको इसका जवाब देने जा रहे हैं.. Facts About Balidan Badge

क्या होता है बलिदान बैज :

यह कोई आम बैज नहीं होता, बलिदान बैज पैराशूट रेजिमेंट के विशेष बलों के पास होता है और इसलिए वही इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. इसका इस्तेमाल कोई अनय व्यक्ति नहीं कर सकता. इस बैज पर हिन्दी में बलिदान लिखा होता है. यह बैज चांदी की धातु से बना होता है, जिसमें ऊपर की तरफ लाल प्लास्टिक का आयत होता है. इसे सिर्फ भारतीय सेना के पैरा कमांडो ही लगा सकते हैं. पैरा स्पेशल फोर्स को पैरा एसएफ भी कहा जाता है.

भारतीय सेना के प्रशिक्षित पैरा कमांडो ही ‘बलिदान’ बैज का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसे धारण करने की योग्यता भी आसानी से नहीं मिलती है. इसे पहनने की योग्‍यता हासिल करने के लिए कमांडो को पैराशूट रेजीमेंट के हवाई जंप के नियमों पर खरा उतरना पड़ता है. गौरतलब है कि अगस्‍त 2015 में धोनी ने आगरा में पांच बार छलांग लगाकर ‘बलिदान’ बैज को पहनने की योग्‍यता हासिल की थी. तब धोनी 1,250 फीट की ऊंचाई से कूद गए थे और एक मिनट से भी कम समय में मालपुरा ड्रॉपिंग जोन के पास सफलतापूर्वक उतरे थे. धोनी ने उस समय कहा था कि वह सेना में अधिकारी बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत ने उन्हें क्रिकेटर बना दिया.

स्पेशल यूनिट :

पैरा स्पेशल फोर्स इंडियन आर्मी की स्पेशल ऑपरेशन यूनिट होती है. कई मौकों पर देश के लिए पैरा स्पेशल फोर्स ने काम किया है. इस यूनिट ने पाकिस्तान युद्ध (1971), ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984), लिट्टे के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन (1987), करगिल युद्ध (1999) में हिस्सा लिया था. इसके अलावा 2016 में पीओके में हुए सर्जिकल स्ट्राइक में भी अहम भूमिका थी. हालांकि क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी को वर्ष 2011 में प्रादेशिक सेना में मानद ले.कर्नल की उपाधी दी गई थी. ये सम्मान पाने वाले धोनी कपिलदेव के बाद दूसरे क्रिकेटर हैं. धोनी पैरा ट्रूपिंग की ट्रेनिंग ले चुके हैं. धोनी ने पैरा बेसिक कोर्स पूरा किया है.

BCCI ने धोनी का दिया साथ :

इसके बाद धोनी का साथ देते हुए शासकों की समिति (सीओए) प्रमुख विनोद राय ने कहा कि महेंद्र सिंह धोनी विकेटकीपिंग ग्लव्स पर कृपाण वाले चिन्ह को लगाना जारी रख सकते हैं क्योंकि यह सेना से जुड़ा नहीं है. उन्होंने इसके साथ ही कहा कि बीसीसीआई ने इसको लेकर आईसीसी से मंजूरी देने के लिये कहा है. राय ने आगे कहा, बीसीसीआई पहले ही मंजूरी के लिये आईसीसी को औपचारिक अनुरोध कर चुका है. आईसीसी के नियमों के अनुसार खिलाड़ी कोई व्यावसायिक, धार्मिक या सेना का लोगो नहीं लगा सकता है. हम सभी जानते हैं कि इस मामले में व्यावसायिक या धार्मिक जैसा कोई मामला नहीं है.

क्या कहता है ICC का नियम :

आईसीसी के नियमों के तहत किसी भी अंतरराष्ट्रीय मैच (International Match) के दौरान कपड़ों या क्रिकेट से जुड़ी अन्य चीजों पर राजनीति (Politics), धर्म (Religion) या नस्लभेदी (Racism) बातों को बढ़ावा देता संदेश नहीं होना चाहिए. साथ ही निजी मैसेज (Personnal Message) देते प्रतीक को नहीं धारण किया जा सकता है. इसमें कॉमर्शियल ब्रांड को दिखाते टैटू तक शामिल हैं. आईसीसी के नियम कहते हैं किसी भी देश के क्रिकेट खिलाड़ी अपनी पोशाक और क्रिकेट से जुड़े अन्य साज-ओ-सामान पर कॉमर्शियल लोगो का इस्तेमाल अपने देश के क्रिकेट बोर्ड (Cricket Board) की मंजूरी के साथ कर सकते हैं. इस कड़ी में धोनी ने बीसीसीआई या आईसीसी से किसी किस्म की पूर्व अनुमति नहीं ली थी.

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