वोट डालते समय आखिर क्यों लगाई जाती है उंगली पर स्याही

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चुनाव की तारीख का ऐलान होते ही सभी राजनीतिक पार्टियां भी पूरे जोश में आकर गई हैं और अपनी जीत के लिए खूब जोर-शोर के साथ प्रचार कर रही है। हर 5 साल के बाद ये लोकतंत्र चुनाव किए जाते और एक बार फिर से आम जनता के बीच उम्मीदें दिखाई देने लगती हैं। यह एक ऐसा मौका था जब कोई भी नागरिक अपनी मर्जी के मुताबिक अपनी पसंद के प्रत्याशी को वोट दे सकता है। लेकिन वोट चाहे किसी भी सरकार को दिया जाए, इनमें जो एक कॉमन चीज खासतौर पर देखने को मिली है, वह है उंगली पर लगने वाली स्याही। कम ही लोग ऐसे होने होंगे जो इस स्याही को लगाने की वजह जानते होंगे। तो चलिए आज हम जानते हैं कि आखिर क्यों लगाई जाती है ये स्याही। Facts About Election Ink

अगर आप ये जानना चाहते है कि किसी ने वोट दिया है या नही तो ये जानने का सबसे अच्छा तरीका है उसकी ऊँगली पर लगी स्याही। आप ये तो जानते होंगे की जब कोई वोटर वोट देने जाता है तो उसकी ऊँगली पर एक खास तरह की स्याही लगा दी जाती है जिसे पानी या साबुन से मिटाया नही जा सकता है, और ये फर्जी वोट से बचने के लिए लगायी जाती है। लेकिन क्या आप ये जानते है ये स्याही क्या होती है और ये उतनी आसानी से मिटती क्यों नही है।

आजादी के समय नही लगता थे निशान :

भारत के आजाद होने के बाद जब पहली बार हमारे देश में चुनाव (Election) हुए थे तो उस समय वोट डालने के बाद ये स्याही नही लगायी जाती थी। लेकिन फिर लोगो ने इसका गलत फायदा उठाना शुरू कर दिया था और चुनाव आयोग को फर्जी वोटों की शिकायत आने लगी थी। इस समस्या से निपटने के लिए चुनाव आयोग को ऐसी स्याही का विचार आया जिसे आसानी से न मिटाया जा सके।

Facts About Election Ink

इसके लिए चुनाव आयोग ने नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी ऑफ इंडिया ( एनपीएल ) से एक ऐसी स्याही बनाने के लिए कहा जिसे पानी, साबुन या किसी रसायन (Chemical) से मिटाया नही जा सके, और फिर नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी ऑफ इंडिया (एनपीएल) ने ऐसी स्याही बनाई जिसे आसानी से नही मिटाया जा सकता था।

इसके बाद नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी ऑफ इंडिया यानि की NPL ने मैसूर पेंट एंड वार्निश कंपनी को ये स्याही बनाने का ऑर्डर दिया। आपको बता दे की इस स्याही का पहली बार इस्तेमाल साल 1962 के चुनावों में किया था, और उस समय से अब तक इसी स्याही को उपयोग किया जा रहा है। आपको बता दे की दुनिया के कई देशों में इस स्याही का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारत में होता है।

बनवाई गई अनोखी स्याही :

अपने देखा होगा की ये स्याही को आप कितना भी मिटाने की कोशिश करे ये नही मिटती है। तो आपको बता दे की इसमें सिल्वर नाइट्रेट होता है, जिसकी वजह से ये स्याही फोटोसेंसिटिव नेचर की बन जाती है मतलब ये प्रकाश से प्रभावित हो जाती है। जब ये स्याही धुप के संपर्क में आती है तो और भी ज्यादा पक्की हो जाती है, साथ ही आपको बता दे की जब ये स्याही लगाई जाती है तो भूरे रंग की होती है लेकिन लगाने के कुछ देर बाद ये बैगनी रंग की हो जाती है।

जब ये स्याही आपके ऊँगली पर लगाई जाती है तो इस स्याही में पाया जाने वाला सिल्वर नाइट्रेट हमारे शरीर में पाए जाने वाले नमक के साथ मिलकर सिल्वर क्लोराइड बनाता है, और ये सिल्वर क्लोराइड पानी में नही घुलता साथ ही हमारी त्वचा (Skin) में बना रहता है। बता दे की इसे पानी, साबुन या किसी रसायन से साफ़ नही किया जा सकता है, इसका जो निशान होता है वो तभी निकलता है जब त्वचा की कोशिकाएं पुरानी होती जाती है और वे हटाने लगाती है।

चुनाव में इस्तेमाल की जाने वाली स्याही बहुत जल्द सुख जाती है और जैसे ही ये स्याही ऊगली पर लगती है वैसे ही ये अपना निशान छोड़ देती है। तो अब आपको अच्छे से समझ आ गया होगा की चुनाव में इस्तेमाल की जाने वाली स्याही क्या होती है और ये क्यों नही मिटती है।

Facts About Election Ink
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कब किया गया स्याही का इस्तेमाल :

वर्ष 1962 में एक बार फिर से चुनाव हुए इस दौरान पहली बार इस अमिट स्याही का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद से ही इसे आज तक होने वाले सभी चुनावों में इस्तेमाल किया जाता है। इस स्याही को उंगली पर लगाने का मतलब होता है कि वह शख्स अपना वोट दे चुका है। खबरों के मुताबिक कहा जाता है कि, यह स्याही 15 दिनों तक नहीं मिटती।

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