कर्नाटक के इस फल बेचने वाले को मिला पद्मश्री, वजह कर देगी भावुक

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दोस्तों, जैसा की आप सभी को पता है की पद्मश्री अवार्ड की घोषणा हो चुकी है, जहाँ एक तरफ सिंगर अदनान सामी को अवार्ड मिलने के बाद बहस शुरू हो चुकी है वहीँ दूसरी और हम जो जानकारी लेके आये हैं वो पढ़कर आप भावुक जरूर हो जायेंगे। Harekala Hajabba Awarded Padmashri

ये बात तो बिलकुल सही है की इंसान अपने रुतबे, पैसे और शोहरत से ज्यादा इंसानियत के जज्बे से दिलों में जगह बनाता है.

कर्नाटक के फल बेचने वाले हरेकाला हजब्बा (Harekala Hajabba) भी ऐसा ही नाम हैं, जिन्हें भारत सरकार की ओर से 2019 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है.

जानिए कौन हैं हरेकाला हजब्बा और क्यों उन्हें दिया जा रहा है ये पुरस्कार.

हरेकाला हजब्बा मूलत: कर्नाटक के रहने वाले हैं. वो अपने इलाके में संतरा बेचने का काम करते हैं. हरेकला हजब्बा को 2020 के लिए प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी परवीन कासवान के एक ट्वीट के अनुसार, 68 वर्षीय हजब्बा एक राशन लाइन में खड़े खरीदारी कर रहे थे, जब उन्हें खबर मिली कि उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए चुना गया है।

बीबीसी के मुताबिक, हरेकला हजब्बा के गाँव, नयापड़ापु में तब तक स्कूल नहीं था जब तक कि उसने 2000 में से एक को स्थापित करने के लिए अपनी अल्प आय से पैसे नहीं बचाए।

जैसे-जैसे छात्रों की संख्या बढ़ती गई, उसने कर्ज भी लिया और अपनी बचत का इस्तेमाल विद्यालय के लिए जमीन खरीदने के लिए किया।

Harekala Hajabba Fruit Seller Awarded Padmashri
Harekala Hajabba Fruit Seller Awarded Padmashri

हर दिन 150 रुपये कमाने वाले इस व्यक्त‍ि के जज्बे ने ऐसा जादू किया कि मस्ज‍िद में चलने वाला स्कूल आज प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज के तौर पर अपग्रेड होने की तैयारी कर रहा है.

हजाबा, जिन्होंने कभी औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की थी, ने खुलासा किया कि यह विदेशी पर्यटकों के साथ एक मुलाकात थी, जिसके कारण उन्होंने गाँव का स्कूल शुरू करने का निर्णय लिया।

द न्यूज़ मिनट से बात करते हुए उन्होंने कहा, “एक युगल मुझे संतरे की कीमत पूछ रहे थे, लेकिन तब मुझे समझ में नहीं आया। मेरे सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद, मैं तुलु और बेरी भाषा के अलावा किसी भी चीज में बात नहीं कर सका।

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युगल चला गया। मुझे बहुत बुरा लगा, और महसूस किया कि कम से कम मेरे अपने गाँव के बच्चों को एक जैसी स्थिति में नहीं होना चाहिए।

मुझे एहसास हुआ कि जिस तरह से संचार जीवन में प्रगति करने में मदद कर सकता है, और साथ ही साथ लोगों को एक साथ ला सकता है।”

पद्मश्री के लिए 2015 में भेजा नाम

नया स्कूल खुलने के बाद हजब्बा खुद सुबह जल्दी उठते हैं और रोज वहां की सफाई करते हैं। इतना ही नहीं स्कूल में साफ पानी नहीं आता जिसके लिए वह बच्चों के पानी पीने के लिए उसे उबालते हैं उसके बाद बच्चे स्कूल का पानी पीते हैं।

हजब्बा सुनिश्चित करते हैं कि छात्रों को किसी भी चीज की पेरशानी नहीं होनी चाहिए। उन्हें स्कूल परिसर को भी अपने घर जैसा ही समझा है।

डिप्टी कमिश्नर एबी इब्राहिम ने साल 2014 में यह बात बोली कि हरेकाला हजाब्बा को पद्मश्री सम्मान के काबिल हैं। उन्होंने बताया कि साल 2015 में भी उपायुक्त ने उनसे बोला कि उन्होंने मेरा नाम केंद्र सरकार को भेज दिया है। लेकिन उसके बाद मुझे नहीं पता क्या हुआ।

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