मुख्य दरवाजे पर ही क्यों लगाया जाता है बंदनवार (तोरण)

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हेल्लो दोस्तों पुराने समय से चली आ रही बंदनवार की परंपरा आज भी कायम है। हालांकि आज बंदनवार भी वक्त के साथ आधुनिकता के रंग में रंग चुका है लेकिन इस के बिना घर की सजावट अधूरी मानी जाती है। अगर घर का प्रवेश द्वार साफ और सुंदर है तो घर में धन, समृध्दि, यश वैभव सुख और शांति आती है। Importance of Bandanvar (Toran)

गृह-प्रवेश हो, घर में शादी हो या बच्चा पैदा हुआ हो तो आज भी घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों को मौली में पिरोकर बंदनवार के रूप में लगाया जाता है। त्यौहारों पर तो इस के बिना घर की सजावट अधूरी मानी जाती है।

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बंदनवार केवल सजावट में ही चार चाॅंद नहीं लगाते बल्कि ये समृद्धि और शुभता का भी प्रतीक होते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि अपने घर के मुख्य द्वार को बंदनवार (तोरण) द्वारा किस तरह से सजाएं कि वहां का वास्तु बिल्कुल ठीक हो जाए और घर में दिन दुगनी, रात चौगुनी हो।

आपने कई घरों के बाहर बंदनवार देखा होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे घर के मुख्य द्वार पर क्यों लगाया जाता है. बंदनवार दरअसल, घर के वास्तु दोष को दूर करता है और घर में शांति व खुशहाली लाता है. बंदनवार ऐसा हो कि आपके सिर से टकराए. ऐसे बंदनवार को शुभ माना जाता है.

मान्यता यह भी है कि बंदनवार से घर की आर्थ‍िक हालत भी सुधरती है. बंदनवार घर की चौखट पर लगाने से मुख्य द्वार की रौनक तो बढ़ती ही है, साथ ही, मां लक्ष्मी की कृपा भी बरसती है। ऐसी मान्यता है कि बंदनवार लगाने से न सिर्फ घर का माहौल शांत रहता है बल्कि आपकी रूठी किस्मत भी जाग उठती है। आइए जानते हैं बंदनवार से जुड़ी कुछ खास बातें।

क्या है बंदनवार? :

बंदनवार ईश्वर का आग्रह करने वाली वस्तुओं में से एक है। विशेष पत्तों और अन्य चीज़ों से बनी यह एक झालर होती है जिसे घर के मुख्य द्वार पर सजाया जाता है। इसे बहुत ही शुभ माना जाता है।

Importance of Bandanvar (Toran)
Importance of Bandanvar (Toran)

किसी भी पर्व, त्योहार या मांगलिक कार्य में इसे घर की चौखट पर ज़रूर लटकाना चाहिए। फिर अगले मंगल कार्य तक इसे हटाना नहीं चाहिए। कहते हैं इससे नकारत्मक ऊर्जा आपके घर से कोसों दूर रहती है और साथ ही घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। यदि आप नियमित रूप से बंदनवार लगाना चाहते हैं तो हर महीने इसे बदलते रहें।

क्यों लगाया जाता है बंदनवार (तोरण) :

तोरण को बंदनवार भी कहा जाता है। मां लक्ष्मी के स्वागत व उन्हें प्रसन्न करने के लिए दरवाजे पर इसे लगाना शुभ माना जाता है। इसे शुभ मौको पर जैसे बच्चे के जन्म, शादी, मेहमानों के स्वागत के लिए दरवाजों व खिड़कियों पर लगाया जाता है।

तोरण लगाने से घर की नाकारात्मक ऊर्जा दरवाजे से ही वापिस चली जाती है। भारत में मंगल अवसरों पर द्वार पर तोरण लगाने की परंपरा है. दीपावली के अवसर पर भी घर के द्वार पर तोरण लगाकर लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है.

परंपरा के साथ अब इसे सजावट के दृष्टिकोण से भी देखा जाने लगा है. मुख्य रूप से तोरण आम के पत्तों से बनाये जाते हैं किन्तु अब बाजार में विभिन्न प्रकार के बहुत सुन्दर और कीमती तोरण भी मिलते हैं.

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पहले बंदनवार के ऊपर तोते का चिन्ह या छोटा सा तोता जरूर बनाया जाता था किंतु अब उसकी जगह स्वास्तिक तथा गणेश जी का चिन्ह बनाया जाता है.

कई तरीकों से बनाया जाता है तोरण :

तोरण कई तरह से बनाए जाते हैं। आम के पत्तों, धान की बालियों और गेंदे को फूलोें से बना तोरण का अलग-अलग महत्व है।

  • आम के पत्तों का तोरण
    आम के पत्तों को मुख्य द्वार पर तोरण के रूप में लटकाने से घर में आने वाले हर व्यक्ति के साथ साकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती हैं। इससे हर काम बिना विघ्न पूरा हो जाता है।
  • गेंदे के फूल से बना तोरण
    गेंदे के फूल भी आम के पत्तों के साथ लगाना शुभ माना जाता है। पीले रंग के इन फूलों का संबंध बृहस्पति ग्रह से होता है इसलिए कहा जाता है कि जिस घर के द्वार पर गेंदे का फूल लगाया जाता है उस घर में सुख-समृद्धि आती है।
  • धान की बालियों वाला तोरण
    धान का इस्तेमाल भी तोरण के लिए शुभ माना जाता है। पुराने जमाने में लोग धान की बालियां वाला तोरण लगाते थे। मान्यता है कि घर के दरवाजे पर धान की बालियां लगाने से घर धन-धान्य से भरा होता है और ऐसे घरों में कभी अनाज की कमी नहीं होती।
Importance of Bandanvar (Toran)
Importance of Bandanvar (Toran)

समय बदलने के साथ-साथ अब तोरण की बनावट में भी बदलाव आ रहा है। तोरण को आज भी डैकोरेशन का खास हिस्सा माना जाता है लेकिन अब इसमें आम के पत्तों, धान की बालियों और गेंदे के फूलों की जगह पर मोती, कलश, आर्टीफिशियल पत्तों, रंग-बिरंगे फूल व खूबसूरत इम्ब्रायडरी वाले तोरण ने ले ली है।

ये कथा है प्रचलित :

इसके पीछे भी एक प्राचीन कथाएं प्रचलित हैं. कहा जाता है कि पहले राजस्थान में एक राजकुमारी बहुत शैतान थी उसके पिता राजा राजकुमारी से कहा करते कि यह शैतानी छोड़ दो नहीं तो मैं तुम्हारी शादी एक तोरण से अर्थात तोते से करा दूंगा.

जब राज कुमारी बड़ी हुई तो राजा ने उसकी शादी के लिए बहुत सुंदर राजकुमार सुनिश्चित किया. जब बारात आई तो एक तोरण भी बारात लेकर आ गया वह कहने लगा कि मैं ही राजकुमारी से शादी करूंगा. उसने राजा को बचपन में राजकुमारी से राजा की कही हुई बातें भी बातें याद दिलाई. राजा अपने वचन से बंध गया और मजबूर हो गया. किंतु राजकुमार ने उस तोते को मार कर राजकुमारी बाईसा से विवाह कर लिया.

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तभी से राजस्थान में यह प्रथा प्रचलित है कि विवाह के समय तोरण पर तलवार से वार करके अपनी राजकुमारी से शादी करता है.

इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि पुराने जमाने में एक राक्षस हुआ करता था जो जब भी किसी की शादी होती थी तो तोरण बनकर दुल्हन को उससे से शादी करने के लिए परेशान किया करता था इसीलिए दूल्हे द्वारा तोरण पर वार किया जाता है.

आजकल तो दूल्हे द्वारा तलवार से वार करवाने की बजाय बंधी हुई तोरण को खुलवा कर दूल्हे को नेग दिया जाता है. अब यह माना जाने लगा है कि जिन गणेश जी और स्वास्तिक की हम पूजा करते हैं उसी पर वार करना क्या ठीक है इसीलिए वार करने की जगह तोरण दूल्हे से खुलवाई जाती है.

कैसे बनता है बंदनवार? :

वास्तु शास्त्र में भी बंदनवार को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। कहा जाता है यदि आपके घर में कोई वास्तु दोष है तो आपको अपने घर की चौखट पर बदनवार ज़रूर लगाना चाहिए।

बाज़ार में कई तरह के बंदनवार उपलब्ध हैं। आमतौर पर बंदनवार आम या अशोक के पत्तों से बनता है। पत्तों को पीले सूत या सूत की रस्सी में बांध दिया जाता है। इसके अलावा कौड़ियों और नारियल के रेशों का भी बंदनवार बनता है। Importance of Bandanvar (Toran)

Importance of Bandanvar (Toran)
Importance of Bandanvar (Toran)

इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और वास्तु दोष भी दूर होता है। मुख्य द्वार पर इसे ऐसे लटकाना चाहिए जिससे आते जाते वक़्त आपका सिर इससे स्पर्श हो।

मुख्य द्वार पर बंदनवार लगाने से होते हैं यह लाभ :

  • आम के पत्ते शुभ माने जाते हैं। अगर आम के पत्तों और गेंदे के फूलों को मिला कर बंदनवार बना रहे हैं तो आम के पत्तों की संख्या सोलह होनी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार सोलह की संख्या को भगवान कृष्ण की सोलह कलाओं के साथ जोड़कर देखा जाता है। आम के पत्तों का बंदनवार लगाने से घर में खुशियां बनी रहती हैं साथ ही घर में शान्ति का वास होता है।
  • अशोक के पत्तों का बंदनवार आर्थिक समस्याओं को दूर करता है। मां लक्ष्मी की कृपा सदैव के लिए बनी रहती है।
  • यदि आपने कौड़ी या सीप से बना बंदनवार अपने घर के मुख्य द्वार पर लगाया है तो इससे किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा आपके घर में प्रवेश नहीं कर सकती।
  • अगर आप क़र्ज़ में डूबे हुए हैं या फिर सेहत से जुड़ी परेशानियां बनी रहती है तो आप अपने घर की चौखट पर नारियल के रेशों का बंदनवार लगाएं।
  • एक माला बनायें यह पीपल, आम या अशोक के पत्तों की हो सकती है इसे प्रवेश द्वार पर बांधें, इससे नकारात्मकता दूर होती है। जब यह पत्तियां सुख जाएँ तो इन्हें बदल दें।

इस दिन शुभ होता है बंदनवार लगाना? :

शुभता का प्रतीक माना जाने वाला बंदनवार लगाने के लिए सभी दिन अच्छे होते हैं लेकिन सबसे उत्तम दिन मंगलवार माना जाता है। दीवाली या अन्य त्यौहार, पूजन पर आप भी अपने घर की चौखट पर बंदनवार ज़रूर लगाएं ताकि आपके घर की खुशियों को किसी की नज़र न लगे।

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