भारत में तीन पत्ती वाले और विदेशों में 4 पत्ती वाले पंखे क्यों होते हैं ?

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जैसा की आप जानते है की गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है और लोग इस गर्मी से निजात पाने के लिए कूलर, AC, पंखा इत्यादि का इंतजाम कर रहे है और शायद आप भी इसी इंतजाम में लगे हुए होंगे. आपको बता दें की पुरे भारत में गर्मी से निजात पाने के लिए जिस चीज का सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है वो सीलिंग फैन.

जी हाँ अमीर हो या गरीब हर किसी के यहाँ एक सीलिंग फैन जरुर होता है लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है टेबल फैन हो या सीलिंग फैन उसमें तीन पत्ती ही क्यूँ होते है, जबकि विदेशों में 4 पत्ती होते है. तो चलिए हम आज इस राज पर से पर्दा उठाते है.

यह बात तो लेागों को पता ही होगी कि पंखे की पत्तियां एक निश्चित एंगल तक बैंड होती हैं, जो हवा देने का काम करती हैं। अब जरो सोचिए कि सबसे ज्यादा हवा कौन-सा पंखा देगा, तीन पत्ती वाला या चार पत्ती वाला। बता दें कि तीन पत्ती वाली देसी फैन है, जबकि चार पत्ती वाला विदेशी फैन। यहां सवाल यह भी उठता है कि भारत मेंं 99 प्रतिशत तीन पत्ती वाले पंखे ही क्यों चलते हैं और विदेशों में चार पत्ती वाले पंखे? वैसे आपने इस बारे में कभी सोचा भी नहीं होगा कि पंखे में तीन और चार पत्ती वाले क्यों होते हैं? बेशक, आपने पंखें की पत्तियों की संख्या पर गौर किया न हो, लेकिन इनकी कम या ज्यादा पत्तियां होने के पीछे ठोस वजह है

दरअसल, अमेरिका जैसे ठंडे देशों में 4 पत्ती वाले पंखे एयर कंडीशनर (एसी) के सप्लीमेंट के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनका मकसद एसी की हवा को पूरे कमरे में फैलाना होता है। चूंकि 4 पत्ती वाले पंखे 3 पत्ती वाले पंखे की तुलना में धीमे चलते हैं, इसलिए इनकी वजह से यह काम आसान हो जाता है। ऐसे में यदि भारत में चार पत्ती वाले पंखे इस्तेमाल होने लगे, तो यहां गर्मी में लोगों का जीना मुहाल हो जाएगा। वैसे भी भारत में पंखा का मतलब ज्यादा से ज्यादा हवा दे। तीन पत्ती वाला फैन हल्का होता है और चलने में इसकी रफ्तार तेज होती है और इससे हवा भी तेज मिलती है। वैसे अब भारत में भी पंखे को एसी के सप्लीमेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा है…। ऐसे में आप अपने एसी वाले कमरे में ४ पत्ती वाला फैन लगवा सकते हैं…यह धीमा चलेगा और इससे बिजली भी ज्यादा खपत नहीं होती।

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