…तो इस वजह से पोस्टमॉर्टम के दौरान कराहने लगती है लाशें

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हेल्लो दोस्तों आज इस अंक में हम आपको बताने जा रहे हैं पोस्टमॉर्टम से जुड़ी ऐसी सच्चाई के बारे में जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे. जब व्‍यक्ति की मृत्‍यु अकाल होती है तो उसकी जांच करने के लिए मृत व्‍यक्ति के शरीर का पोस्टमॉर्टम किया जाता है Unknown Fact of Postmortem

इस दौरान मृत व्यक्तियों के शरीर का परीक्षण किया जाता है जिसमें एक एक चीज बारीकी से जांच करके ये पता लगाने का कोशिश किया जाता है कि आखिर उसके मृत्‍यु के पीछे की वजह क्‍या है।

कई बार प्राकृतिक कारणों की वजह से किसी की मौत नहीं हुई है तो ऐसे हालात में मौत के बाद उसकी मौत के वजहों को पता लगाने के इरादे से ये जांच की जाती है। हालांकि पोस्टमॉर्टम के वक्त डॉक्टर कुछ ऐसी चीजें भी करते हैं जो लोगों को नहीं बताई जाती है।

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पोस्टमॉर्टम का नाम सुनकर हमारी रूह कांप उठती है और डॉक्टर भी इंसान है तो उन्हें कितना डर लगता होगा परंतु डॉक्टर का ये रोज़ का काम हो जाता है और ये उनका पेशा है तो उन्हें कम डर लगता है परंतु अगर रात को डेथ बॉडी आवाज़ करने लगे तो डॉक्टर तो क्या दुनिया का कोई भी इंसान डर जायगा परंतु इसकी जांच की गई तो पाया गया कि ये एक वैज्ञानिक के कारण होता है.

Unknown Fact of Postmortem
Unknown Fact of Postmortem

क्यों कराहने लगती है लाशें :

पोस्टमॉर्टम के दौरान लाशें चीख पड़ती है। इसके पीछे वजह है कि दरअसल शरीर में मौजूद बैक्टरिया गैस बनाते है जिसके चलते बॉडी के वोकल मसल्स में खिचाव आता है इसकी वजह से बॉडी कराहने लगती है जिससे बॉडी से आवाज आती है. कई बार बॉडी को ज्यादा दिन तक रखने पर आँखे बाहर आने लग जाती है क्योंकि वह बॉडी सड़ने लगती है.

जब गर्भावस्था के दौरान किसी महिला की मौत होती है तो उस दौरान बॉडी में बनने वाली गैस बच्चे को मां के पेट से बाहर की तरफ धकेलती है और बच्चा मां के शरीर से निकल आता है. हालांकि ऐसे मामलों में अधिकतर बच्चों की मौत हो जाती है.

ये बात डॉक्टर लोगों को कभी नहीं बताते क्योंकि ऐसी स्थिति में मृत इंसान के परिजन अपना आपा भी खो सकते हैं। परिजनों को लगेगा कि मृत इंसान में अभी भी जान है।

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ये है पोस्टमॉर्टम के फैक्ट्स :

पोस्टमॉर्टम के वक्त लाश को नंगा किया जाता है, लाश को नंगा कर उसके अंगों की बारीकी से जांच की जाती है। वहीं अक्सर महिलाओं का शवों का पोस्टमॉर्टम पुरुष डॉक्टर के जरिए ही किया जाता है। ऐसा तब होता है जब पोस्टमॉर्टम की कोई विशेषज्ञ महिला डॉक्टर नहीं होती है।

Unknown Fact of Postmortem
Unknown Fact of Postmortem

पोस्टमार्टम करने से पहले उस व्यक्ति के सगे संबंधियों से इस बात की इजाजत ली जाती है और कहा जाता है की अगर किसी मृत व्यक्ति का पोस्टमार्टम करना हो तो वो उसकी मृत्यु के 6 से 10 घंटे के अंदर किया जाना चाहिए। क्‍योंकि विशेषज्ञों का कहना होता है की अगर वो मृत व्‍यक्ति के शरीर का पोस्‍टमार्टम 6 से 10 घंटे के अंदर नहीं करते हैं तो ऐसे में उस व्यक्ति की मौत के कारण के बदलने की संभावना बनी रहती है लेकिन क्या कभी आपके मन में यह सवाल आया है कि जब कभी किसी व्यक्ति की मृत्यु रात के समय अचानक से हो जाती है तो उस व्यक्ति का पोस्टमार्टम रात के समय ही पोस्‍टमार्टम किया जाता है?

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रात में कभी नहीं किया जाता है पोस्टमार्टम :

रात के समय में अगर किसी भी मृत व्यक्ति के शरीर का पोस्टमार्टम ना करने के पीछे एक बड़ी वजह है दरअसल डॉक्टरों का कहना है की अगर वो रात के समय ट्यूब लाइट एलईडी या फिर कृत्रिम रोशनी में मृत शरीर का पोस्टमार्टम करते हैं

ऐसे में शव के शरीर पर लगे चोट के निशान लाल के बजाए बैगनी रंग के दिखने लगते हैं और इसकी वजह से ये पता करना मुश्किल हो जाता है की मृत शरीर पर चोट कहां कहां है और यही कारण है क‍ि डॉक्‍टर्स रात के समय कभी भी कृत्रिम लाइट या फिर ट्यूब लाइट में पोस्टमार्टम नहीं करते हैं।

वैसे जानकारी के लिए ये भी बता दें कि फॉरेंसिक साइंस में बैगनी रंग के चोट का कोई उल्लेख हमें देखने को नहीं मिलता।

Unknown Fact of Postmortem
Unknown Fact of Postmortem

इसके अलावा एक और भी कारण है जो धर्म से जुड़ा हुआ है जी हां कई धर्मों में कहा जाता है की रात के समय अंत्येष्टि नहीं की जाती है जिसकी वजह से कई लोग रात के समय मृत व्यक्तियों के शरीर का पोस्टमार्टम नहीं कर पाते है

अगर कभी किसी की रात में मृत्‍यु हो जाती है तो डॉक्‍टर रात के समय पोस्टमार्टम करवाने के बजाय वे लोग सुबह के टाइम पोस्टमार्टम करवाने का समय ले लेते हैं। क्‍योंकि माना जाता है की अगर कोई डॉक्टर रात के समय किसी मृत व्‍यक्ति के शरीर का पोस्टमार्टम कर दे और कृत्रिम रोशनी में चोट का रंग अलग दिखाई दे तो ऐसे में उस पोस्टमार्टम रिपोर्ट को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

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