सतयुग में मनुष्य की लंबाई जानकर दंग रह जाएंगे आप, जानिए चार-युग और उनकी विशेषताएं

बताया जाता है कि ‘त्रेतायुग’ में मनुष्य की आयु 10,000 वर्ष होती थी। ‘युग’ शब्द का अर्थ होता है एक निर्धारित संख्या के वर्षों की काल-अवधि। जैसे सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुग आदि। आज में हम चारों युगों का वर्णन करेंगें। युग वर्णन से तात्पर्य है कि उस युग में किस प्रकार से व्यक्ति का जीवन, आयु, ऊँचाई, एवं उनमें होने वाले अवतारों के बारे में विस्तार से परिचय देना। प्रत्येक युग के वर्ष प्रमाण और उनकी विस्तृत जानकारी कुछ इस तरह है –

जैसे-जैसे समय बदला वैसे -वैसे इंसान का रहन-सहन, उसकी दिनचर्या में भी परिवर्तन हुआ। सतयुग से लेकर कलयुग तक बहुत सी ऐसी चीजें हैं जिनमें बहुत अंतर आया है, यहां हम आपको इनमें से कुछ खास बातों के बारे में बता रहे हैं…

सतयुग –

आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि सतयुग 17,28,000 वर्ष तक रहा, ये युग चार पैरों पर खड़ा था और इस युग में मनुष्य की लंबाई 32 फीट होती थी, इसके साथ ही इस युग में व्यक्ति की उम्र एक लाख वर्ष थी। इस युग में कोई पापी नहीं था यानि पाप का प्रतिशत 0 था वहीं पुण्य का ग्राफ 100 प्रतिशत था। इस युग में मुद्रा के रूप में रत्न चलते थे और पात्र स्वर्ण था। यह प्रथम युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है –

  • इस युग की पूर्ण आयु अर्थात् कालावधि – 17,28,000 वर्ष होती है।
  • इस युग में मनुष्य की आयु – 1,00,000 वर्ष होती है ।
  • मनुष्य की लम्बाई – 32 फिट (लगभग) [21 हाथ]
  • सत्ययुग का तीर्थ – पुष्कर है ।
  • इस युग में पाप की मात्र – 0 विश्वा अर्थात् (0%) होती है ।
  • इस युग में पुण्य की मात्रा – 20 विश्वा अर्थात् (100%) होती है ।
  • इस युग के अवतार – मत्स्य, कूर्म, वाराह, नृसिंह (सभी अमानवीय अवतार हुए) है ।
  • अवतार होने का कारण – शंखासुर का वध एंव वेदों का उद्धार, पृथ्वी का भार हरण, हरिण्याक्ष दैत्य का वध, हिरण्यकश्यपु का वध एवं प्रह्लाद को सुख देने के लिए।
  • इस युग की मुद्रा – रत्नमय है ।
  • इस युग के पात्र – स्वर्ण के है ।

त्रेतायुग –

सतयुग के समाप्त होने के बाद शुरू हुआ त्रेतायुग, 12,96,000 वर्ष की कालावधि के त्रेतायुग में मनुष्य की आयु दस हजार वर्ष रह गई और लंबाई 21 फीट थी, इसके साथ ही ये तीन पैरों पर खड़ा था। इस युग में 25 प्रतिशत मनुष्य पाप करते थे और 75 प्रतिशत मनुष्य धर्मात्मा थे। इस युग में स्वर्ण मुद्राएं चलती थीं और पात्र चांदी था। यह द्वितीय युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है –

  • इस युग की पूर्ण आयु अर्थात् कालावधि – 12,96,000 वर्ष होती है ।
  • इस युग में मनुष्य की आयु – 10,000 वर्ष होती है ।
  • मनुष्य की लम्बाई – 21 फिट (लगभग) [ 14 हाथ ]
  • त्रेतायुग का तीर्थ – नैमिषारण्य है ।
  • इस युग में पाप की मात्रा – 5 विश्वा अर्थात् (25%) होती है ।
  • इस युग में पुण्य की मात्रा – 15 विश्वा अर्थात् (75%) होती है ।
  • इस युग के अवतार – वामन, परशुराम, राम (राजा दशरथ के घर)
  • अवतार होने के कारण – बलि का उद्धार कर पाताल भेजा, मदान्ध क्षत्रियों का संहार, रावण-वध एवं देवों को बन्धनमुक्त करने के लिए ।
  • इस युग की मुद्रा – स्वर्ण है ।
  • इस युग के पात्र – चाँदी के है ।

द्वापर –

त्रेता युग के समाप्त होने के बाद द्वापर युग प्रारंभ हुआ, इस युग का काल घटकर 8,64,000 वर्ष रह गया और ये दो पैरों पर खड़ा था। इस युग में मनुष्य की आयु हजार वर्ष और लंबाई 11 फीट रह गई। इस युग में पाप और पुण्य का प्रतिशत बराबर हो गया यानि 50 प्रतिशत पाप और 50 प्रतिशत पुण्य। इस युग में चांदी की मुद्रा चलती थी और ताम्र पात्र काम में लिए जाते थे। यह तृतीय युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है –

  • इस युग की पूर्ण आयु अर्थात् कालावधि – 8.64,000 वर्ष होती है ।
  • इस युग में मनुष्य की आयु – 1,000 होती है ।
  • मनुष्य लम्बाई – 11 फिट (लगभग) [ 7 हाथ ]
  • द्वापरयुग का तीर्थ – कुरुक्षेत्र है ।
  • इस युग में पाप की मात्रा – 10 विश्वा अर्थात् (50%) होती है ।
  • इस युग में पुण्य की मात्रा – 10 विश्वा अर्थात् (50%) होती है ।
  • इस युग के अवतार – कृष्ण, (देवकी के गर्भ से एंव नंद के घर पालन-पोषण), बुद्ध (राजा के घर)।
  • अवतार होने के कारण – कंसादि दुष्टो का संहार एंव गोपों की भलाई, दैत्यो को मोहित करने के लिए ।
  • इस युग की मुद्रा – चाँदी है ।
  • इस युग के पात्र – ताम्र के हैं ।

कलियुग –

अब चल रहा है कलयुग, ये माना जाता है कि कलयुग की उम्र 4,32,000 वर्ष है और ये एक पैर पर खड़ा है। इस युग में मनुष्य की आयु औसत 100 वर्ष रह गई है वहीं लंबाई 5 फिट 5 इंच हो गई है। इस युग में पाप का प्रतिशत बढ़कर 75 हो गया है, पुण्य करने वाले लोग मात्र 25 प्रतिशत रह गए हैं। इस युग में लोहे और कागज की मुद्रा प्रचलन में है और पात्र मिट्टी के हो गए हैं। यह चतुर्थ युग है इस युग की विशेषताएं इस प्रकार है :

  • इस युग की पूर्ण आयु अर्थात् कालावधि – 4,32,000 वर्ष होती है ।
  • इस युग में मनुष्य की आयु – 100 वर्ष होती है ।
  • मनुष्य की लम्बाई – 5.5 फिट (लगभग) [3.5 हाथ]
  • कलियुग का तीर्थ – गंगा है ।
  • इस युग में पाप की मात्रा – 15 विश्वा अर्थात् (75%) होती है ।
  • इस युग में पुण्य की मात्रा – 5 विश्वा अर्थात् (25%) होती है ।
  • इस युग के अवतार – कल्कि (ब्राह्मण विष्णु यश के घर) ।
  • अवतार होने के कारण – मनुष्य जाति के उद्धार अधर्मियों का विनाश एंव धर्म कि रक्षा के लिए।
  • इस युग की मुद्रा – लोहा है।
  • इस युग के पात्र – मिट्टी के है।
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