तो इसलिए हर शुभ कार्य में बांधा जाता है कलावा, ये हैं वैज्ञानिक कारण

0
73

कलावा या मोली को हिंदू धर्म के हर शुभ कार्यों में हाथों पर बांधा जाता है, पर क्या आप इसके बांधने के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को जानते हैं यदि नहीं, तो आज हम आपको इस बारे में ही जानकारी दे रहें हैं। जब आप कोई शुभ कार्य को संपन्न करते हैं तो प्रारंभ में आपके माथे पर तिलक किया जाता है और उसके बाद में आपके हाथ में मौली यानि कलावे को बांधा जाता है, पर इसको आखिर क्यों बांधा जाता है और इसके पीछे क्या वैज्ञानिक कारण हैं इस बात को बहुत कम लोग जानते हैं। आज हम आपको बता रहें हैं कलावे को बांधने के पीछे के वैज्ञानिक कारणों तथा मान्यताओं के बारे में।

सबसे पहले हम पौराणिक मान्यताओं की बात करें तो इसकी शुरूआत उस समय से हुई जब दानवराज राजा बलि ने भगवान विष्णु के अवतार वामन को सबकुछ दान कर दिया था और भगवान वामन ने कलावे को रक्षासूत्र के रूप में इसको राजा बलि के हाथों पर बांधा था। इसके अलावा पौराणिक मान्यताओं में यह भी बताया जाता है कि भगवान इंद्र जब वृत्तासुर से लड़ने के लिए गए थे तब उनकी पत्नी शची ने इंद्र की भुजा पर यह रक्षासूत्र के रूप में बांधा था। इस युद्ध में भगवान इंद्र की विजय हुई थी।

kalawa ke fayde

शास्त्रों में ऐसा भी बताया गया है कि मौली को कलाई पर बांधने से त्रिदेवों की कृपा मिलती है और व्यक्ति देवत्व के मार्ग पर अग्रसर होता है। मौली यानि कलावे को अविवाहित कन्याओं तथा पुरुषों के दायें हाथ पर तथा विवाहित स्त्रियों के बाएं हाथ पर बांधा जाता है। मंगलवार या शनिवार को आप पुरानी मौली को उतार कर नई मौली को अपने हाथ पर बांध सकते हैं। मौली बांधते समय धर्म में आस्था रखनी चाहिए। इस प्रकार से बांधी हुई मौली आपकी हर संकट से रक्षा करती है।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, लाल रंग का संबंध मुख्यतः सूर्य और मंगल ग्रह से है, साथ ही पीला रंग देवताओं के गुरु देवगुरु बृहस्पति का प्रतीक है। बृहस्पति ज्ञान का कारक ग्रह है। मौली बांधने से जहां एक ओर ज्ञान की वृद्धि होती है, वहीं दूसरी ओर साहस, आत्मविश्वास और पराक्रम में वृद्धि होती है।कहते हैं कि जिस भी देवी-देवता की पूजा करके यह कलावा अथवा रक्षा सूत्र बांधा जाता है, उस देवी-देवता की अदृश्य शक्ति धागों में समाहित होकर मनुष्य की मनोकमानाएं पूर्ण करने के साथ ही रक्षा करती है। सनातन धर्म में सदियों से माना जाता है कि कलाई पर कलावा बांधने से जीवन पर आने वाले संकट से रक्षा होती है और शुभ ग्रह अनुकूल हो जाते हैं। कलावे को बांधने के धार्मिक महत्व के साथ-साथ कई वैज्ञानिक महत्व भी हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर के कई प्रमुख अंगों तक पहुंचने वाली नसें कलाई से होकर गुजरती हैं। कलाई पर मौली या कलावा बांधने से इन नसों की क्रिया नियंत्रित रहती है। एक्यूप्रेशर की भांति कलाई पर इन धागों का दबाव बनने के कारण त्रिदोष यानी वात, पित्त और कफ का सामंजस्य बना रहता है और कई प्रकार की बीमारियां दूर होने लगती हैं। कलावा बंधवाते समय आपकी मुट्ठी बंधी होनी चाहिए और आपका दूसरा हाथ सिर पर रखा होना चाहिए। अगर आप पर्व के अलावा किसी अन्य दिन मौली बंधवाना चाहते हैं, तो मंगलवार और शनिवार का दिन शुभ माना जाता है।

नवरात्रि, दीपावली आदि विशेष पर्वों पर पुराने मौलीे के स्थान पर नया मौली अवश्य धारण करना चाहिए। मौली को केवल हाथ की कलाई पर ही नहीं, बल्कि गले, कमर में भी बांधा जाता है। वाहन, बही-खाता, घर के मुख्य दरवाजे, चाबी के छल्ले और तिजोरी पर पवित्र मौली बांधने से लाभ होता है। इससे बनी सजावट की वस्तुएं घर में रखने से नई खुशियां आती हैं। जिन घरों में भूत-प्रेत अथवा किसी भी प्रकार की ऊपरी बाधा हो, वहां मौलीे में सुपारी, लौंग, इलायची अभिमंत्रित कर शुुभ मुहूर्त में बांधी जाती है, ताकि नकारात्मक ऊर्जा वहां से कोसों दूर रहे।

कलावे को मंत्र पढ़कर कलाई में बांधने से यह सूत्र त्रिदेवों और त्रिशक्तियों को समर्पित होकर धारण करने वाले प्राणी की हर प्रकार से रक्षा होती है। धर्मशास्त्रों के अनुसार, माना जाता है कि दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए भगवान वामन ने उनकी कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधे थे। कलावा बांधने का मंत्र है- ‘येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।’ शास्त्रों के अनुसार, मौली बांधने से त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु, महेश व तीनों देवियों- लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती की कृपा बरसती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here