इस अद्भूत मंदिर में रहते हैं हज़ारों चूहे, कहलाते हैं माता के बेटे

0
33

क्या आपको पता है की हमारे देश भारत में माता का एक ऐसा मंदिर भी है जहाँ पर 20000 चूहे रहते है और मंदिर में आने वालो भक्तो को चूहों का झूठा किया हुआ प्रसाद ही मिलता है। आश्चर्य की बात यह है की इतने चूहे होने के बाद भी मंदिर में बिल्कुल भी बदबू नहीं है, आज तक कोई भी बीमारी नहीं फैली है यहाँ तक की चूहों का झूठा प्रसाद खाने से कोई भी भक्त बीमार नहीं हुआ है। आइये जानते हैं इसका रहस्य। Karani Mata Temple

ये भी पढ़िए : ऐसा मंदिर जहाँ फर्श पर सोने से ही गर्भवती हो जाती है महिलाएं

सामान्यतया चूहे आम जनता के लिए खतरनाक एवं प्लेग जैसी जानलेवा बीमारी का कारण होते है| यह एक आश्चर्यजनक बात है कि भारत में स्थित करणी माता मंदिर में लगभग 20000 से भी अधिक चूहे पाए जाते है| इतना ही नहीं बल्कि यहाँ आने वाले भक्तों को चूहों का झूठा प्रसाद दिया जाता है| यह मान्यता है कि इस प्रसाद के सेवन से भक्तों को कभी कोई बीमारी नहीं हो सकती| इन चूहों से कभी दुर्गन्ध या कोई बीमारी नहीं फैलती|

यहाँ उपस्थित सफ़ेद चूहों के दर्शन मात्र से व्यक्ति के मन की मनोकामना पूर्ण हो जाती है| यहाँ चूहों की संख्या इतनी अधिक है कि भक्तों को अपने पैर घसीटते हुए माता की प्रतिमा तक जाना पड़ता है| क्योंकि यदि एक भी चूहा उनके पैर से घायल हो जाए तो यह अशुभ माना जाता है| यहाँ के चूहों को “काबा” नाम से जाना जाता है| यह माता के मंदिर में होने वाले संध्या वंदन एवं मंगला आरती के समय बिलों से बाहर आते है| मंदिर में आए भक्तगण इन चूहों को लड्डू एवं दूध का भोग लगाते है|

इसी कारण से यह मंदिर “मूषक मंदिर” या “चूहों का मंदिर” के नाम से भी प्रसिद्ध है| यह बीकानेर के समीप देशनोक नामक पवित्र स्थान पर स्थित है| इस मंदिर का निर्माण 20 वीं शताब्दी में बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने करवाया था|

चूहों का रहस्य

करणी माता (Karani Mata Temple) को माँ जगदम्बा का अवतार माना गया है| वह चारण परिवार में जन्मी थी| उनके पति का नाम किपोजी चारण था| परन्तु एक समय बाद उन्होंने सांसारिक धर्म को छोड़कर, अपना जीवन समाज कल्याण एवं माता की भक्ति में लगा दिया| उन्होंने अपने पति का विवाह अपनी छोटी बहन गुलाब से करवा दिया| गुलाब एवं किपोजी चारण के संतान हुई, जिसका नाम लक्ष्मण रखा गया|

एक बार करणी माता का सौतेला पुत्र लक्ष्मण, कोलायत में स्थित कपिल सरोवर में पानी पीने गया| परन्तु अचानक वह सरोवर में गिर गया एवं उसकी मृत्यु हो गई| करणी माता को इस बात की सूचना मिलते ही वह यम के पास गई| उन्होंने यम से उनका पुत्र पुनः लौटाने की बात कही| तब यम ने इसे असंभव बताया एवं ऐसा करने से मना कर दिया| परन्तु माता के आग्रह पर विवश होकर उन्होंने उनके पुत्र को चूहे का रूप देकर पुनः जीवित कर दिया|

ये भी पढ़िए : तिरुपति बालाजी मंदिर जिनकी गुप्त रसोई में बनते हैं हर रोज़ 3 लाख लड्डू

बीकानेर के लोक गीतों के अनुसार

इन गीतों में चूहों के सम्बन्ध में अलग गाथा प्रचलित है| जिसके अनुसार एक बार देशनोक पर एक विशाल सेना का आक्रमण हुआ| उस सेना में लगभग 20000 सैनिक थे| तब करणी माता ने देशनोक की रक्षा के लिए उन्हें शाप दे दिया| शाप के अनुसार वे सब चूहों में परिवर्तित हो गए एवं माता ने उन्हें अपनी सेवा में रख लिया| तब से आज तक वह करणी माता की सेवा करते है|

राजस्थान एक ऐसा राज्य जो जितना खूबसूरत है उतना ही अपने आप में विचित्र भी। कुछ ऐसा ही है इस मरूस्थल में आश्चर्य का विषय लिए बसा देशनोक कस्बा। देशनोक करणी माता के मंदिर की बदौलत पूरे भारत में फेमस है क्योंकि ये मंदिर अपने आप में खास है। इस मंदिर में भक्तों से ज्यादा काले चूहे नजर आते हैं। वैसे यहां चूहों को काबा कहा जाता है और इन काबाओं को बाकायदा दूध, लड्डू आदि भक्तों के द्वारा परोसा भी जाता है। लोग इस मंदिर में आते तो ‘करणी माता के दर्शन के लिए हैं पर साथ ही नजरें खोजती हैं सफेद चूहे को…आइए बताते हैं क्यों!

Karani Mata Temple
Karani Mata Temple

चूहों का जूठा प्रसाद 

आश्चर्य की बात यह है की इतने चूहे होने के बाद भी मंदिर में बिल्कुल भी बदबू नहीं है, आज तक कोई भी बीमारी नहीं फैली है यहां तक की चूहों का जूठा प्रसाद खाने से कोई भी भक्त बीमार नहीं हुआ है। इतना ही नहीं जब आज से कुछ दशको पूर्व पुरे भारत में प्लेग फैला था तब भी इस मंदिर में भक्तों का मेला लगा रहता था और वे चूहों का जूठा किया हुआ प्रसाद ही खाते थे।

माना जाता है मां जगदम्बा का साक्षात अवतार

करणी माता, जिन्हे की भक्त माँ जगदम्बा का अवतार मानते है, का जन्म 1387 में एक चारण परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम रिघुबाई था। रिघुबाई की शादी साठिका गांव के किपोजी चारण से हुई थी लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही उनका मन सांसारिक जीवन से ऊब गया इसलिए उन्होंने किपोजी चारण की शादी अपनी छोटी बहन गुलाब से करवाकर खुद को माता की भक्ति और लोगों की सेवा में लगा दिया। जनकल्याण, अलौकिक कार्य और चमत्कारिक शक्तियों के कारण रिघु बाई को करणी माता के नाम से स्थानीय लोग पूजने लगे।

ये भी पढ़िए : जानिये क्या करतें हैं तिरुपती मंदिर में भक्तों द्वारा अर्पण किए हुए बालों का

151 वर्ष जिन्दा रहीं माता

वर्तमान में जहां यह मंदिर स्थित है वहां पर एक गुफा में करणी माता अपनी इष्ट देवी की पूजा किया करती थी। यह गुफा आज भी मंदिर परिसर में स्थित है। कहते हैं करनी माता 151 वर्ष जिन्दा रहकर 23 मार्च 1538 को ज्योतिर्लिन हुई थी। उनके ज्योतिर्लि होने के पश्चात भक्तों ने उनकी मूर्ति की स्थापना करके उनकी पूजा शुरू कर दी जो की तब से अब तक निरंतर जारी है।

करणी माता के बेटे माने जाते है चूहे

करणी माता मंदिर में रहने वाले चूहे मां की संतान माने जाते है करनी माता की कथा के अनुसार एक बार करणी माता का सौतेला पुत्र (उसकी बहन गुलाब और उसके पति का पुत्र) लक्ष्मण, कोलायत में स्थित कपिल सरोवर में पानी पीने की कोशिश में डूब कर मर गया। जब करणी माता को यह पता चला तो उन्होंने, मृत्यु के देवता यम को उसे पुनः जीवित करने की प्रार्थना की।

Karani Mata Temple
Karani Mata Temple

पहले तो यमराज ने मना किया पर बाद में उन्होंने विवश होकर उसे चूहे के रूप में पुनर्जीवित कर दिया। हालांकि बिकानेर के लोक गीतों में इन चूहों की एक अलग कहानी भी बताई जाती है जिसके अनुसार एक बार 20000 सैनिकों की एक सेना देशनोक पर आक्रमण करने आई जिन्हें माता ने अपने प्रताप से चूहे बना दिया और अपनी सेवा में रख लिया।

अतः चूहों के सम्बन्ध में कोई ठोस रहस्य का पता नहीं लग पाया है| यहाँ गाए जाने वाले गीतों एवं कथाओं के माध्यम से ही चूहों की उपस्थिति के रहस्य का अंदाजा लगाया जाता है|

ये भी पढ़िए : इस मंदिर में राधा नहीं, बल्कि पत्नी रुक्मिणी संग विराजते हैं कृष्ण

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here