जानिए सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेट में आखिर क्या लिखा होता है?

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सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्‍म सर्टिफिकेशन को आम लोग सेंसर बोर्ड के नाम से जानते हैं। यह एक सेंसरशिप बॉडी है जो मिनिस्‍ट्री ऑफ इंर्फामेशन एंड ब्राडकास्‍ट के अंडर में काम करती है। सेंसर बोर्ड फिल्‍म टेलीवीजन टेलीवीजन एड सहित उन सभी को सर्टिफिकेट देती है जो जनता के बीच में दिखाया जाता है। सेंसर बोर्ड के द्वारा सर्टिफिकेट दिए जाने के बाद ही फिल्‍म को रिलीज किया जा सकता है। सख्‍त कानून की वजह से CBFC दुनिया में सबसे ताकतवर सेंसर बोर्ड में से एक है।
प्रसून जोशी CBFC के वर्तमान चेयरपर्सन हैं जिन्होंने अपना कार्यकाल 11-08-2017 से शुरू किया । CBFC का हेडक्‍वार्टर मुंबई में हैं। क्‍या आप ने कभी सोचा है CBFC सर्टिफिकेट में दी गई उन चीजों के बारे में। अगर नहीं तो आज हम आप को बताएंगे फिल्‍म सर्टिफिकेट के बारे में। यह सर्टिफिकेट फिल्‍म शुरु होने से पहले दस सेकेंड के लिए दिखाया जाता है। जिनमें U, U/A, A, S कई तरह के फिल्‍म सर्टिफिकेट होते हैं। Know About Film Certification

अक्सर ही आप जब भी थिएटर में जाते हैं तो फिल्म शुरू होने के पहले कुछ चीज़ें दिखाई जाती हैं और वो हर फिल्म में एक जैसी होती हैं बस कुछ हल्का सा बदलाव होता है. ऐसे में आप सभी ने देखा होगा कि फिल्म शुरू होने से पहले एक सर्टिफिकेट दिखाया जाता हैं जो उस फिल्म से जुड़ा होता हैं लेकिन हर सर्टिफिकेट अलग-अलग होता है. तो आइए जानते हैं इससे जुडी कुछ बातें.

‘सर्टिफिकेट’ से जुड़ी कुछ रोचक बातें –

इस फ़िल्म को किस तरह का सर्टिफिकेट मिला है. अगर ‘अ’ है तो इसका मतलब कोई भी इस फ़िल्म को देख सकता है. * कहा जाता है अगर इस सर्टिफिकेट पर ‘अव’ लिखा है तो इसका अर्थ है कि 12 साल से कम उम्र के बच्चे इस फ़िल्म को माता-पिता के निर्देशन में देख सकते हैं.

* वहीं अगर फ़िल्म को ‘व’ सर्टिफिकेट मिला है तो मतलब 18 साल से कम उम्र के लोगों के लिए ये फ़िल्म अनुकूल नहीं है. * कहते हैं जिन फ़िल्मों को ‘S’ सर्टिफिकेट मिलता है, वो स्पेशल ऑडियंस के लिए होती हैं जैसे डॉक्टर या साइंटिस्ट.

वहीं अगर इस भाग में फ़िल्म का नाम, भाषा, रंग और फ़िल्म के प्रकार का विवरण होता है और इस भाग में फ़िल्म की अवधि और फ़िल्म कितने रील की है, का वर्णन होता है.

* एक भाग में सर्टिफिकेट का नंबर, सर्टिफिकेट प्रकाशित होने का साल और सेंसर बोर्ड ऑफ़िस का पता होता है. * वहीं नीचे दिए गए भाग में सेंसर निरिक्षण समिति के नाम होते हैं और इससे नीचे आवेदक और निर्माता का नाम होता है.

* वहीं सर्टिफिकेट के दूसरे भाग में उन ‘कट्स’ का वर्णन होता है, जो सेंसर बोर्ड ने सुझाये हैं. ये सर्टिफिकेट फ़िल्म शुरू होने के पहले 10 सेकंड तक दिखाना अनिवार्य है.

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