तो ये है भारत का आखिरी गांव, जाने वालों की मिट जाती है गरीबी

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आज के समय में इंसान को जीवन यापन के लिए कुछ चीजों की बहुत ज्यादा आवश्यकता पड़ती है। इन्ही में से एक महत्वपूर्ण चीज है पैसा। आज के समय में हर काम पैसे की मदद से ही होता है। अगर आपको खाना खाना है या पानी पीना है तो उसके लिए भी पैसे की जरूरत पड़ती है। इसलिए आप समझ सकते हैं कि धन आज के समय में कितना ज्यादा जरूरी है।

धन के आभाव में गुजार देते हैं जीवन:

कई लोग होते हैं, जिनके पास बेशुमार धन होता है, जबकि कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जो अपना जीवन धन के आभाव में गुजार देते हैं। वह अपनी तरफ से धन इकठ्ठा करने की काफी कोशिश करते हैं, लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं हो पाते हैं। अगर आपके साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है, तो चिंता की कोई बात नहीं है। आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां जाने मात्र से ही आपकी आर्थिक तंगी दूर हो जाती है।

किसी चमत्कार से कम नहीं है यह गांव:

दरअसल यह गांव भारत का आखिरी गांव है, और यह आर्थिक तंगी से परेशान लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। उत्तराखंड के चमोली जिले में माणा नाम का एक गांव है। यह गांव बद्रीनाथ धाम से लगभग 3 किमी की दूरी पर बसा है। इस गांव के बारे में ऐसा कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति इस गांव में आता है, भगवान भोलेनाथ की कृपा से उसकी आर्थिक तंगी दूर हो जाती है।

इस गांव में आने वालों के कट जाते हैं सारे पाप:

इस गांव का नाम भगवान शिव के सच्चे भक्त मणिभद्र देव के नाम पर रखा गया है। इस गांव के बारे में कहा जाता है कि यह गांव श्राप मुक्त है और जो भी यहां आता है उसके सारे पाप कट जाते हैं। इस गांव में कई ऐतिहासिक महत्व के स्थान भी हैं। गांव में प्रवेश करते ही सबसे पहले गणेश गुफा दिखती है। ऐसा माना जाता है कि गणेश जी एक बार वेदों की रचना कर रहे थे, और पास से ही सरस्वती नदी तेजी से बह रही थीं।

गणेश जी ने दे दिया सरस्वती को श्राप:

तेजी से बहने की वजह से काफी शोर हो रहा था, जिस वजह से गणेश जी को ध्यान केन्द्रित करने में दिक्कत हो रही थी। गणेश जी ने उनसे कम शोर करने का आग्रह किया, लेकिन वो नहीं मानीं। इससे नाराज होकर गणेश जी ने उन्हें श्राप दे दिया कि इसके आगे वह किसी को नहीं दिखेंगी। इसी वजह से सरस्वती नदी कुछ दूरी पर जाकर अलकनंदा में मिल जाती हैं।

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