क्या आप भी इस्तेमाल करते हैं पैकेट वाला “ख़तरनाक” दूध तो हो जाइये सावधान

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लगभग सभी लोग दूध का सेवन करते है. पहले हमारे पास टाइम होता था तो हम ग्वाले के पास जाकर दूध लेते थे लेकिन अब समय की कमी के कारण हम पैकेट वाले दूध (Making of Packed Milk) को तरजीह देते हैं.

वर्तमान में पैकेट वाले दूध की बिक्री में इजाफा देखा गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पैकेट वाला दूध कैसे बनता हैं…? नहीं, तो आइए जानते हैं…

अमूमन डेयरी उत्पादन की प्रक्रिया में किसान गांवों में या दूसरे दुग्ध उत्पादक दूध गाय या भैंस से दुहते हैं, इसके लिए ज्यादातर हाथ का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि कई बडे डेयरी फार्म में इसके लिए मशीन का इस्तेमाल भी किया जाता है.

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पशुओं से दिन में दो बार दूध दुहा जाता है. दूध को बडी केन में इकट्ठा कर पास की विलेज डेयरी कॉपरेटिव सोसाइटी में लाया जाता हैं जहां दूध की गुणवत्ता की टेस्टिंग होती है.

इस जांच में दूध में मौजूद फैट, सॉलिड नॉट फैटी की मात्रा, दूध की डेंसिटी, दूध में किसी तरह की मिलावट, पानी की मात्रा आदि का पता लगाया जाता है.

Making of Packed Milk
Making of Packed Milk

जांच के बाद मानक के मुताबिक परिणाम को लिखा जाता है और फिर इसी के आधार पर दूध की कीमत किसान को दी जाती है.

इसके बाद एक बडे स्टोरेज टैंक में दूध को रखा जाता है. इन टैंक की क्षमता दो, पांच और दस टन तक हो सकती है. टैंक में दूध को लगातार घुमाने की मशीन भी लगी होती है जिससे दूध को जमने से रोका जाता है.

कच्चा दूध, स्टेनलेस स्टील या गिलास पाइप के माध्यम से टैंक में बहता है जहां यह लगभग 40 डिग्री फोरेनहाइट यानी 4.4 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा रहता है.

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फिर ठंडा कच्चा दूध एक विभाजक के माध्यम से गुजरता है और दूध से वसा को अलग करता है ताकि क्रीम और स्किम दूध दोनों का उत्पादन किया जा सके. इसके बाद विटामिन ए और डी एक पेरीस्टालिक पंप के जरिए दूध में पहुंचाए जाते हैं और दूध को pasteurize किया जाता है.

इसी प्रक्रिया में दूध को गर्म किया जाता है. फिर पाइप के माध्यम से इस दूध को दूसरे टैंक में भेजा जाता है. जहां इसके स्वाद को नुकसान से बचाने के लिए दूध को जल्दी से 40 डिग्री फोरेनहाइट या 4.4 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया जाता है. इसके बाद दूध को पैकेट आदि में पैक करके शिपमेंट के लिए भेजा जाता है.

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