कर्क रेखा जहाँ साल में एक बार गायब हो जाती है परछाई

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क्या आप जानते है दुनिया में एक ऐसी भी जगह है जहाँ आपका साया आपका साथ छोड़ देगा. जी हाँ और ये जगह मध्य प्रदेश विदिशा जिले के सलामतपुर और दीवानगंज के बीच में है. जहां से कर्क रेखा गुजरती है. वैसे तो भारत में कर्क रेखा 8 राज्यों (गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा तथा मिज़ोरम) से होकर गुज़रती है. Mystery Behind Tropic of Cancer

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स्टेट हाईवे नंबर 18 से गुजरने वाले पर्यटक कर्क रेखा स्थल पर कुछ पल ठहर कर इसके महत्व के बारे में जानकारी भी हासिल करते हैं। इस स्थान से पहले यह कर्क रेखा पहाड़ों और जंगलों से गुजरते हुए यहां तक पहुंचती है।

ऐसा माना जाता है कि जहां से कर्क रेखा निकलती है, वहां तापमान की अधिकता रहती है। गर्मी के सीजन में इस स्थान पर तापमान 41 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। 

Tropic of Cancer
Mystery Behind Tropic of Cancer

क्या है कर्क रेखा ?

कर्क रेखा (Cancer Line) उत्तरी गोलार्द्ध में भूमध्य रेखा के समांतर 23°30′ पर स्थित है। यह पश्चिम से पूर्व की ओर खींची गई एक कल्पनिक रेखा है। यह रेखा पृथ्वी पर उन पांच प्रमुख अक्षांश रेखाओं में से एक है, जो पृथ्वी के मानचित्र पर स्थि‍त है।

  • कर्क रेखा  (Cancer Line) पर सूर्य दोपहर के समय लम्बवत चमकता हैं। 
  • कर्क रेखा की स्थिति स्थायी नहीं है इसमें समय के अनुसार बदलाव होता रहता है।
  • उत्तरी गोलार्ध में 21 जून का दिन सबसे लंबा व रात सबसे छोटी होती है।क्‍‍‍‍‍‍‍योकि  21 जून को सूर्य इस रेखा के एकदम ऊपर होता है !
  • भारत में कर्क रेखा  (Cancer Line) 8 राज्यों (गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा तथा मिज़ोरम) से होकर गुज़रती है। इन्हें याद रखने के लिए GK Trick (मित्र पर गमछा झार – मिज़ोरम, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड) है

कर्क रेखा पर खड़े होने पर गायब रहती है परछाई :

कर्क रेखा पर आपकी परछाई गायब हो जाती है कर्क रेखा स्थल के पास सूर्य ठीक आपके सिर के ऊपर होगा. कर्क रेखा पृथ्वी के 23.5 डिग्री अक्षांश पर स्थित है। पृथ्वी का घूर्णन अक्ष पृथ्वी के सूर्य के परिचालन पथ के प्लेन से 23.5 डिग्री झुका हुआ है.

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उपर्युक्त वजह से कर्क रेखा जो 23.5 डिग्री उत्तर के अक्षांश पर स्थित है, उसके पास 21 जून को प्रत्येक वर्ष सूर्य की किरणें बिलकुल सीधी पड़ती हैं। इस घटना को ग्रीष्म संक्रांति अथवा समर सोलिस्टिक भी कहते हैं.

यदि कर्क रेखा पर एक खंभा खड़ा किया जाए तो उसकी छाया कर्क रेखा पर बनी रहेगी लेकिन दोपहर 2 बजे यह छाया गायब हो जाएगी. क्योंकि सूर्य उस समय बिलकुल सीधा होगा.

पर्यटकों कि लगती है भीड़ :

मध्य प्रदेश के स्टेट हाईवे नंबर 18 से गुजरने वाले पर्यटक कर्क रेखा स्थल पर कुछ पल ठहर कर इसके महत्व के बारे में जानकारी भी हासिल करते हैं.। गर्मी के सीजन में इस स्थान पर तापमान 41 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है. विदिशा-भोपाल रोड पर जिस स्थान पर कर्क रेखा स्थल है वहां पर न तो कोई हरियाली है और न ही कोई बस्ती अथवा गांव. आसपास सन्नाटा ही पसरा रहता है.

Tropic of Cancer
Mystery Behind Tropic of Cancer

मप्र पर्यटन विकास निगम ने जब से कर्क रेखा स्थल पर रोड के दोनों ओर स्मारक बनाकर सौंदर्यीकरण कार्य करवा दिया है तब से यहां से गुजरने वाले लोग अपने वाहन यहां रोककर उत्सुकतावश इस स्थान को जरूर देखते हैं और फोटो खिंचवाकर इस स्थान को यादगार बनाने की कोशिश करते हैं.

कई प्रकार की हैं कमियां :

प्रशासन ने इस विशेष स्थान पर पत्थर पर “कर्क रेखा” तो लिखवा दिया है, पर इसके महत्त्व के बारे में कोई जानकारी उपलब्ध हो उसके लिए कोई प्रयास नहीं किया है। साथ ही यहां पर रुकने वाले लोगों के बैठने के लिए किसी स्थान का निर्माण नहीं कराया गया। इस स्थान से जो लोग गुजरते हैं उनको यहां के बारे में कोई विशेष जानकारी उपलब्ध न हो पाने के कारण वे सीधे ही निकल जाते हैं।

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2000 साल पहले कर्क रेखा नाम पड़ा :

ग्लोब पर पश्चिम से पूर्व की ओर खींची गई कल्पनिक रेखा हैं जिसकी लंबाई 36788 किमी है. जो सूर्य की किरणें के सीधी होने पर गर्मी अधिक होती है. परंतु कर्क रेखा पर स्थित सभी स्थानों पर यह बात लागू नहीं होती है. जहां हरियाली ज्यादा होती है, वहां के तापमान में कमी रहती है.

हवाई मार्ग से पृथ्वी के चक्कर लगाने के लिए जो मानक तय हैं, उसके अनुसार कम से कम कर्क रेखा की लंबाई के बराबर दूरी तय करना आवश्यक है. इसके अलावा उड़ान का प्रथम बिंदु और अंतिम बिंदु एक ही होना चाहिए. कर्क रेखा नाम 2000 साल पूर्व पड़ा था. उस समय पृथ्वी से देखने पर सूर्य का पथ कर्क राशि की ओर था.

Tropic of Cancer
Mystery Behind Tropic of Cancer

भारत में कर्क रेखा उज्जैन शहर से निकलती है. इस कारण ही जयपुर के महाराजा जयसिंह द्वितीय ने यहां वेधशाला बनवाई इसे जंतर मंतर कहते हैं. यह खगोल-शास्त्र के अध्ययन के लिए है. इस कारण ही यह स्थान काल-गणना के लिए एकदम सटीक माना जाता है. यहां से अधिकतर हिन्दू पंचांग निकलते हैं.

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