इस व्यक्ति ने 5 टन सोना देकर की थी भारत सरकार की मदद

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भारत में सर्वकालिक धनवान व्यक्तियों में भले ही आपके जेहन में टाटा, बिड़ला या अंबानी का नाम आए लेकिन यह सहीं नहीं है। भारत के सर्वकालिक धनवान हैदराबाद के अंतिम निजाम उस्मान अली खान हैं। बिट्रिश न्यूजपेपर द इंडिपेन्डैंट और मुद्रास्फीति समायोजन की नई सूची के अनुसार दुनिया के सर्वकालिक धनवानों की सूची में हैदराबाद के अंतिम निजाम छठे स्थान पर हैं। हैदराबाद के निजाम की कुल संपति 236 अरब डॉलर आंकी गई थी। इसकी तुलना में आज मुकेश अंबानी की संपति 30 अरब डॉलर ही है।

 

भारत सरकार को दिया 5 टन सोना

निजाम उस्मान-अली-खान के पास एक समय भारत सरकार से भी ज्यादा दौलत थी। 1962 के भारत-चीन और 1965 में भारत-पाक युद्ध के कारण देश की आर्थिक स्थिति काफी नाजुक हो गयी थी। ऐसे में लाल बहादुर शास्त्री ने आर्थिक मदद के लिए देश के धनी लोगों से अपील की, लेकिन कोई भी व्यक्ति सामने नहीं आया। तब प्रधानमंत्री के कहने पर निजाम-उस्मान-अली ने भारत सरकार को 5 टन सोना राष्ट्रीय रक्षा कोष के तहत दिया। आज के सोने के मुल्य में देखा जाए तो यह रकम 1600 सौ करोड रूपये के मूल्य के बराबर बैठती है।

हैदराबाद निजामशाही के बारे में

1723 में मुगल शासन के अधीन हैदराबाद में निजामशाही की शुरूआत हुई थी। निजामशाहीं की नींव मीर कुमारूदीन ने डाली थी, जिसे निजामुलमुल्क के नाम से जाना जाता था। 1947 में भारत का विभाजन होने पर निजाम ने भारत में शामिल होने की अपेक्षा स्वतंत्र रहना चाहा। भारत ने जोर दिया की हैदराबाद भारत में शामिल हो जाए। 13 सितंबर 1948 को भारतीय सेना ने हैदराबाद पर आक्रमण कर दिया और 4 दिन के अंदर इस राज्य ने स्वतंत्र भारत में सम्मिलित होना स्वीकार कर लिया। कुछ समय के लिए सैनिक सरकार के बाद राज्य में 1952 में विधानसभा का गठन किया गया। उस्मान-अली-खान (1886-1967) निजामशाही के आखिरी निजाम थे। उनका 80 वर्ष की उम्र में 1967 मे निधन हुआ था।

निजाम के किस्सें-कहानियां

आज भी हैदराबाद में निजाम के बारें में कई किस्से-कहानियां सुनने को मिलते है। निजाम मोतियों और घोडों के शौक के लिए प्रसिद्ध थे। उनके पास अरबी नस्ल के सैकडों घोडे थे। कहा जाता है कि निजाम 1340 करोड मूल्य के डायमंड का प्रयोग पेपरवेट के रूप में किया करते थे। यह भी कहा जाता है कि हैदराबाद का निजाम जितना अमिर था, उतना ही सादगी पसंद भी था। निजाम ने 35 साल तक केवल एक ही टोपी पहनी। निजाम ने कभी अपने कपडे प्रेस नहीं करवाये। दिन में सिर्फ एक प्लेट चावल खाता था। जीवन में कभी शराब और सिगार के हाथ नहीं लगाया। निजाम की दर्जनों बीवियां और बच्चें थे। कहा जाता है कि निजाम की जब मृत्यु हुई तब उसके कुल 83 बच्चें थे।

निजाम के वारिस

निजाम के वारिस अब गुमनाम जिंदगी जी रहे है। निजाम ने अपने 83 बच्चों में से किसी को भी अपना वारिस नहीं चुना। जीवन के आखिरी पलों में अपने पोते मुकर्रमजहां को अपना वारिस नियुक्त किया। मुकर्रम की माँ तुर्की की थी। इस समय मुक्करम इंस्ताबुल के एक छोटे से फ्लेट में रहते है। एक समय ऐसा आया जब मुक्करम जहां के पास इतना पैसा भी नहीं था कि अपनी पैरवी के लिए वकील की फीस भर सकें।

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