यदि आप भी प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोल कर करना चाहते हैं कमाई, तो करें यह काम

यदि आपको भी लोगों की मदद के साथ-साथ खुद का बिजनेस भी करना है तो यह आपके लिए एक अच्‍छा मौका है। भारत की एक बड़ी जन आबादी गरीबी से ग्रस्त है और कुछ बुनियादी सुविधायें जैसे कि स्वास्थ्य की देखभाल के लिए साधन नहीं जुटा सकती। स्वास्थ्य की देखभाल में गैर-इंफ्रास्‍ट्राक्‍चर साधन भी शामिल हैं, जैसे -दवाइयां। Opening Process Of Jan Aushadhi Kendra

भारत में सबसे बड़ी समस्या यह है कि ब्रांडेड (जेनेरिक) दवाइयों का दाम ब्रांड रहित जेनेरिक दवाइयों से काफी अधिक होता है जबकि दोनों दवाइयों की चिकित्सात्मक गुणवत्ता एक जैसी होती है। इसलिए फार्मा एडवाइजरी फोरम ने संयुक्त रूप से भारत के हर जिले में आम जनता को वाजिब दाम पर , गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध करवाने के लिए औषधि कैंपेन लॉन्च किया है। यह दवाएं पूरे देश भर के विभिन्न जिलों में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषाधी केंद्र में बिकती हैं। इन दवाइयों को बेचने वाले स्टोर व्यक्तियों और संस्थाओं द्वारा बोली लगाने पर उपलब्ध हैं। आइए हम जन- औषाधी योजना के काम को समझें।

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जन औषधि केंद्र के लिए आवेदन करने की पात्रता अगर आप एक नागरिक हैं तो आप प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र को खोलने के लिए आवेदन कर सकते हैं यदि:

  • आप एक चिकित्सक हैं।
  • आप पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी हैं।
  • आपके पास बी फार्मा / डी फार्मा डिग्री है।

यहां तक कि अगर आप व्यक्तिगत रूप से उपरोक्त योग्यता मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं, तो भी आप एक जन औषधि केंद्र खोलने के लिए आवेदन कर सकते हैं । परन्तु ,उसके लिए आप बी फार्मा और डी फार्मा डिग्रीधारी व्यक्ति को कार्यरत करने के लिए सक्षम होने चाहिए । लोगों के लिए सरकारी अस्पताल परिसर में एक मेडिकल स्टोर खोलने के अवसर भी हैं। हालांकि, आवेदन चयन प्रक्रिया में, प्रतिष्ठित एनजीओ / चैरिटेबल संगठनों को प्राथमिकता दी जाएगी।

Opening Process Of Jan Aushadhi Kendra

आवश्‍यक चीजें :

जन औषधि केंद्र खोलने के लिए आवेदक के पास कम से कम 120 वर्ग फीट क्षेत्रफल का स्वयं या किराए का स्थान होना चाहिए, जिस के लिए उसके पास या तो स्थान आवंटन पत्र हो या फिर लीज़ अग्रीमेंट।

जगह की व्यवस्था करने में बीपीपीआई की कोई भूमिका नहीं होगी। नाम के साथ फार्मासिस्ट होने का प्रमाण, राज्य परिषद आदि के साथ पंजीकरण आवश्यक होता है। (या इसे जेएएस के अंतिम अनुमोदन के समय जमा किया जा सकता है)

संबंधित प्राधिकारियों के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अलग-अलग प्रमाण पत्र का प्रमाण अगर लागू हो।

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कैसे करें आवेदन? :

अगर आप भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस लाभकारी योजना का लाभ लेना चाहते हैं। आपको इसके लिए सबसे पहले एक आवेदन फॉर्म लेना होगा और ये फॉर्म और इस योजना की वेबसाइट पर जाकर मिलेगा। वहीं इस योजना के तहत बेहद आसानी से लोग फॉर्म भरकर इसके तहत अपना जन औषधि केन्द्र खोल सकते हैं और प्रधानमंत्री की इस कल्याणकारी योजना का फायदा उठा सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको रजिस्ट्रेशन करवाने की जरूरत होगी।

रजिस्ट्रेशन करने के बाद, आपको अपने आधार कार्ड नंबर की जानकारी देनी होगी। वहीं इसके लिए आपका आधार कार्ड नंबर मोबाइल नंबर से लिंक होना बेहद जरूरी है।इसके बाद आपको अपने आधार नंबर को वेरीफाई करना होगा। इसके लिए आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी यानि कि वन टाइम पासवर्ड आएगा। जिससे आपको अपने मोबाइल नंबर को वेरीफाई करना होगा।

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जब आपका कार्ड वेरीफाई हो जाएगा इसके बाद आपको अपने प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में सारी डिटेल चैक कर उसे सबमिट करना होगा। इस तरह से आप जन औषधि केन्द्र के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं इस योजना के तहत जन औषधि केन्द्र खोलने के लिए किसी तरह की कोई फीस नहीं देनी होगी, इसका लाभ आप मुफ्त में ले सकेंगे। वहीं अगर कोई भी व्यक्ति आपसे बीपीपीआई से जुड़ी किसी भी सेवा के लिए पैसे मांगता है तो इसकी सूचना आपको तुरंत बीपीपीआई डिपार्टमेंट से कर सकते हैं। जिसके बाद बीपीपीआई द्धारा उस व्यक्ति के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

लाभ मार्जिन और प्रोत्साहन राशि :

यदि आप एक जन औषधि केंद्र के लिए एजेंसी प्राप्त करते हैं, तो उस का संचालन करने के लिए आपको प्रत्येक दवा एमआरपी पर टैक्स के अलावा 20% का मार्जिन दिया जाएगा। यदि आपका केंद्र बीपीपीआई के सॉफ्टवेयर के माध्यम से उसके साथ इंटरनेट द्वारा जुड़े हुए हैं, तो आप 2.5 लाख तक के प्रोत्साहन के योग्य हैं। यह मासिक बिक्री के 15 प्रतिशत की दर से मिलता है जो कि न्यूनतम 10 हजार तक देय होता हैं। पूर्वोत्तर राज्यों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, आदिवासी क्षेत्रों के लिए, यह सीमा 15,000 रुपये तक होगी।

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कौन कर सकता है आवेदन :

जो भी व्यक्ति प्रधानमंत्री की इस लाभकारी योजना के तहत जन औषधि केन्द्र खोलकर लाभ उठाना चाहता है तो, इसके लिए कुछ नियम और शर्तें हैं जिसके तहत लोग जन औषधि केन्द्र के लिए आवेदन कर सकते हैं । जो कि नीचे लिखे गए हैं –

अगर किसी व्यक्ति ने बी फार्मा और डी फार्मा की पढ़ाई की है, तो वह जन औषधि केन्द्र के लिए आवेदन कर सकता है। इसके अलावा कोई भी चैरिटिबल ट्रस्ट या फिर NGO भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं लेकिन इसके लिए यह जरूरी है कि उन्हें इस केन्द्र की जिम्मेदारी किसी भी बी फार्मा या फिर डी फार्मा की डिग्री प्राप्त करने वाले व्यक्ति को सौंपनी होगी।

जन औषधि केन्द्र के लिए कोई भी फार्मासिस्ट, डॉक्टर और मेडिकल प्रैक्टिसनर भी आवेदन कर सकते हैं और इस केन्द्र के माध्यम से लोगों को सस्ते दामों पर जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध करवा सकते हैं। इसके साथ ही अच्छी खासी कमाई भी कर सकते हैं।

जन औषधि केन्द्र के लिए आवेदन करने वाले SC, ST और दिव्यांग आवेदकों को खास छूट दी गई हैं। ऐसे आवेदनों को औषधि केन्द्र खोलने के लिए 50 हजार रुपए तक की दवाइयां पहले से ही उपलब्ध करवाई जाएंगी।

आपको बता दें कि जन औषधि केन्द्र सिर्फ वही लोग खोल सकते हैं जिनके पास मेडिकल स्टोर खोलने की पर्याप्त जगह हो। आपको बता दें कि जन औषधि केन्द्र के लिए आवेदक के पास कम से कम 120 स्क्वायर फीट की जगह होनी चाहिए। वहीं इसका फैसला जन औषधि केन्द्र के लिए बनाई गई एजेंसी बीपीपीआई खुद विजिट करके लेती है। वहीं जरूरी नहीं कि ये आवेदक की खुद की जगह हो, ये जगह किराए की भी हो सकती है।

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अगर कोई आवेदक प्रधानमंत्री मोदी की इस योजना के तहत जन औषधि केन्द्र खोलना चाहता है तो उसके पास फार्मिस्ट का सर्टिफिकेट होना भी जरूरी है।

जन औषधि केन्द्र खोलने के लिए आवेदक के पास रिटेल ड्रग लाइसेंस एवं टिन नंबर भी होना चाहिए।

जो भी आवेदक इस योजना के तहत जन औषधि केन्द्र खोलना चाहता है तो इसके लिए जरूरी है कि आवेदक की हालत अच्छी हो। इसके साथ ही उसके पास टैक्स फाइल होना चाहिए और पिछले 3 साल का सभी फाइनेंशियल रिकॉर्ड भी सही होने चाहिए। आपको बता दें कि इन सब की जांच बीपीपीआई द्दारा की जाती है।

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फार्मा PSU ब्यूरो की भूमिका :

ब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसयू ऑफ इंडिया (BPPI) प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र के लिए कार्यान्वयन एजेंसी है। इसका कार्य कुछ इस प्रकार है- 1-सस्ती कीमत पर सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयां उपलब्ध करवाना। 2-प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्रों द्वारा जेनेरिक दवाइयों की मार्केटिंग करवाना। 3-सेंट्रल फार्मा पीएसयू और निजी क्षेत्रों की कंपनियों से दवाइयों की खरीददारी करना। 4-औषधि केन्द्रों के काम की उचित निगरानी करना।

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