पारद शिवलिंग पूजन का विशेष महत्व क्यों?

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पारद शम्भुबीज है यानी पारद की उत्पति महादेव शंकर के वीर्य से हुई मानी जाती है। इसलिए शास्त्रकारों ने इसे साक्षात शिव माना है और पारदलिंग का सबसे ज्यादा महत्व बताकर उसे दिव्य बताया है। शुद्ध पारद संस्कार द्वारा बंधन करके जिस देवी-देवता की प्रतिमा बनाई जाती है, वह स्वयं सिद्ध हो सकती है। पारद शब्द में प विष्णु, अ अकार, र शिव और द ब्रह्मा का प्रतीक है।
Parad Shivling Poojan ka Vishesh Mahatva
Parad Shivling Poojan ka Vishesh Mahatva
वागभट्‌ट के मतानुसार जो पारद शिवलिंग का भक्ति सहित पूजा करता है उसे तीनों लोकों में स्थित शिवलिंग का पूजन फल मिलता है। पारदलिंग का दर्शन महापुण्य देने वाला है। इसके दर्शन से सैकड़ों अश्वमेघ यज्ञों का फल प्राप्त होता है। यह सभी तरह के लौकिक और परालौकिक सुख देने वाला है। इस शिवलिंग का जहां नियमित पूजन होता है वहां धन की कभी कमी नहीं होती है। साक्षात भगवान शंकर का वास भी होता है। इसके अलावा वहां का वास्तुदोष भी समाप्त हो जाता है। हर सोमवार को पारद शिवलिंग का अभिषेक करने पर तांत्रिक प्रयोग का असर खत्म हो जाता है।
शिवमहापुराण में शिवजी का कथन है
लिंगकोटिसहस्त्रय यत्फलं सम्यगर्चनात्।
तत्फलं कोटिगुणितं रसलिंगार्चनाद्भवेत्।।
ब्रहमाहत्या सहस्त्राणि गौहत्याया: शतानि च।
तत्क्षणद्विलयं यांति रसलिंगस्य दर्शनात्।।
स्पर्शनात्प्राप्यत मुक्तिरिति सत्यं शिवोदितम्।।
यानी करोड़ों शिवलिंगों के पूजन से जो फल मिलता है, उससे भी करोड़ गुना फल पारद शिवलिंग की पूजा और दर्शन से मिलता है। हजारों ब्रह्मा हत्याएं ओर सैकड़ों गौ- हत्याओं का पाप पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से दूर हो जाता है। पारद शिवलिंग को छूने से भी मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।

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