बेटी होने पर यह डॉक्टर नहीं लेता फीस, बांटता है पूरे अस्पताल में मिठाई

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भारत में जहां भ्रूण हत्या की घटनाएं देखने को मिलती है, वहीं इस देश में एक डॉक्टर ऐसा भी है जो बेटी के जन्म लेने पर डिलिवरी की फीस नहीं लेता। यही नहीं, वह पूरे अस्पताल में मिठाई भी बांटता है। Pune Doctors Not Charge Fee on Girl Birth Child

इस डॉक्टर का नाम है डॉ. गणेश राख। पुणे में प्रैक्टिस करने वाले डॉ. राख मेडीकेयर जनरल व मैटरनिटी हॉस्पीटल नामक एक अस्पताल का संचालन करते हैं।

Pune Doctors Not Charge Fee on Girl Birth Child
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इस अस्पताल की शुरूआत वर्ष 2007 में इस उद्देश्य के साथ की गई थी कि गरीब माता-पिता को लाभ पहुंचाया जा सके। इन्होंने 2007 में अपना क्लीनिक शुरू किया था. उनका कहना है कि प्रेग्नेंट लेडी को लाने वाले परिवार हमेशा लड़के की चाह में ही रहते हैं. और जब लड़की पैदा होती है, तो मां रोने लगती है. उसके साथ आए लोग उसे कोसने लगते हैं.

इस अस्पताल की खासियत यह है कि किसी भी मां के कोख से अगर कन्या जन्म लेती है तो उसका खर्चा और डॉक्टर की फीस अस्पताल देता है। यही नहीं कन्या के जन्म लेने के बाद अस्पताल में मिठाइयां बांटी जाती है, ताकि बेटी की अहम‍ियत बयां की जा सके।

डॉ. राख का मानना है कि उनके इस छोटे से कदम से परिवार वाले घर में कन्या के आगमन पर खुश होते हैं। वह बताते हैं कि देश में कन्या भ्रूण-हत्या अब भी निर्बाध रूप से जारी है। आम तौर पर हमारे समाज में कन्या के जन्म लेने पर माताएं बेहद दबाव में होती हैं।

कन्या भ्रूण हत्या पर लगाम लगाने के लिए नारों-बयानों का प्रयोग किया जाता हो, पर डॉ. राख ने सही मायने में इस तरह की पहल कर समाज को आईना दिखाने का काम किया है।

Pune Doctors Not Charge Fee on Girl Birth Child
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2011 की जनगणना में लड़कियों की घट चुकी आबादी देखकर गणेश बेचैन हो उठे. उस वक्त के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लड़कियों की कमी को ‘नेशनल शेम’ बताया था. और ‘सेव गर्ल चाइल्ड’ कैंपेन की सख्त जरूरत बताई थी. इसके बाद डॉक्टर गणेश ने अपनी तरफ से ही कैंपेन शुरू कर दिया. 3 जनवरी, 2012 को गणेश ने अभियान शुरू किया, ‘मुलगी वाचवा अभियान.’ मराठी में लड़की को मुलगी बोलते हैं. गणेश ने उस वक्त ऐलान किया था कि अब से वो बेटी पैदा होने पर फीस नहीं लेंगे. लड़का पैदा होने पर घरवाले सेलिब्रेट करते हैं और लड़की होने पर पूरा हॉस्पिटल सेलिब्रेट करेगा.

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