यहां होती है सबकी मन्नत पूरी, पहाड़ों में विराजीं हरसिद्धि माता

मध्यप्रदेश के सागर जिले की रहली तहसील में रानगिर हरसिद्धि माता का पवित्र स्थान है।रानगिर का यह मंदिर लगभग 1100 वर्ष पुराना है। रानगिर में विराजीं मां हरसिद्धी लोगों की आस्था का केंद्र हैं। एक किवदंति प्रचलित है कि यह मंदिर पहले रानगिर में नहीं था नदी के उस पार देवी जी रहती थीं। माता, कन्याओं के साथ खेलने के लिए आया करती थीं। एक दिन गांव के लोगों ने देखा कि यह कन्या सुबह खेलने आती है और शाम को कन्याओं को एक चांदी का सिक्का देकर बूढ़ी रानगिर को चली जाती हैं।

उसी दिन हरसिद्धि माता ने सपना दिया कि मैं हरसिद्धि माता हूं, बूढ़ी रानगिर में रहती हूं। यदि बूढ़ी रानगिर से रानगिर में ले जाया जाए तो रानगिर हमारा नया स्थान होगा। रानगिर में बेल वृक्ष के नीचे हरसिद्धि मां की प्रतिमा मिली। लोग बेल की सिंहासन पर बैठाकर उन्हें सायंकाल रानगिर लाए। दूसरे दिन लोगों ने उठाने का प्रयास किया कि आगे की ओर ले जाया जाए, लेकिन देवी जी की मूर्ति को हिला नहीं सके।

दिन में तीन रूप बदलती हैं मां

ऐसी मान्यता है कि माता के सुबह दर्शन करो तो कन्या रूप में दर्शन होते हैं। दोपहर में युवा अवस्था तथा शाम को वृद्धावस्था में दर्शन देती हैं।

जब माता को बूढ़ी रानगिर से नए स्थान पर लाया जा रहा था उसी समय माता का हार नदी में गिर गया तो नदी का नाम देहार पड़ा। ऐसी मान्यता है कि रानगिर में सती जी की जांध गिरी है इसलिए रानगिर नाम पड़ा जो लोग सच्चे मन से श्रद्धा से रानगिर जाते हैं उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

Rangir Harsiddhi Mata Mandir

पहाडों और घने जंगलों के बीच रानगिर में विख्यात हरसिद्धि माता का मंदिर है। यह मंदिर क्षेत्र में काफी प्रसिद्ध है। यहां पर दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए आते हैं। यहां पर मां के दरबार में चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि पर मेला लगता है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि नवरात्र में लोग मां को जल अर्पित करने के लिए दूर-दूर से आते हैं। मंदिर में सुबह से ही पूजन शुरू हो जाता है। रात में जागरण होता है।

रानगिर का रहस्य

सिध्द क्षेत्र रानगिर के नाम को लेकर भी कई किवदंतियां प्रचलित है। किवदंती के अनुसार भगवान शंकर जी ने एक वार सति के शव को हाथों में लेकर क्रोध तांडव नृत्य किया था। नृत्य के दौरान सती माता के अंग टूट -टूट कर पृथ्वी पर गिरे थे। सती माता के अंग जिन जिन स्थानों पर गिरे वह सभी शक्ति पीठों के रुप में प्रसिद्घ है ऐसी मान्यता है कि रानगिर मे सती माता के राने (जांघ) गिरी थी और इसी लिए इस क्षेत्र का नाम रानगिर पड़ा।

माता का इतिहास

माता हरसिद्धि के मंदिर का निर्माण कब ओर कैसे हुआ इसका कोई प्रमाण नही है; परन्तु यह मंदिर अतिप्राचीन और ऐतिहासिक है। चर्चाओं के मुताबिक कुछ लोग इसे महाराजा छत्रसाल के द्वारा बनवाये जाने की संभावना व्यक्त करते है क्योंकि सन 1726 ईस्वी मे सागर जिले में महाराजा छत्रसाल के द्वारा कई वार आक्रमणों का उल्लेख इतिहास मे वर्णित है।

Rangir Harsiddhi Mata Mandir

कैसे पहुंचे

रानगिर में प्रतिवर्ष चैत्र माह की नवरात्री में मेला लगता है। जिसमे बुंदेलखंड ही नहीं दूर दूर से लोग आते है। यहाँ पहुचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन सागर है, जो बीना कटनी रेलखंड पर है। सागर से नवरात्री के समय बस और जीप आसानी से मिल जाती है लेकिन अन्य दिनों लोग स्वयं के वाहन या निजी वाहन रिजर्व करके जाते हैं। सागर से राष्ट्रिय राजमार्ग क्र० 26 झाँसी लखनादोन पर नरसिंहपुर की तरफ लगभग 30 किमी पर बांये ओर 8 किमी जंगल में पक्की सड़क से जाया जा सकता है।

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