लक्ष्मण झूला: 96 साल पहले ऋषिकेश में गंगा पर बना पुल अब हो गया बंद

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उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन और तीर्थ स्थलों में शुमार ऋषिकेश में गंगा नदी पर बने 96 साल पुराने लक्ष्मण झूला पुल को आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया है। खबरों की मानें तो लक्ष्मण झूला पुल का टावर झुका हुआ नजर आ रहा है और सुरक्षा को ध्यान में देखते हुए आम लोगों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी गई है। इसमें सुधार कर जल्द ही खोला जा सकता है। लक्ष्मण झूला का निर्माण वर्ष 1923 में किया गया था। यह पुल गंगा नदी को दो हिस्सों को जोड़ता है। Rishikesh Laxman Jhula Bridge Closed for Public

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लोक निर्माण विभाग ने बताया जीर्ण शीर्ण :

उत्तराखंड के लोक निर्माण विभाग ने पुल के संबंध में एक आदेश जारी किया है जिसमें कहा गया है, ‘वर्ष 1923 में निर्मित लक्ष्मण झूला सेतु में वर्तमान में यातायात की लगातार बढ़ोत्तरी के बाद यह सेतु काफी जीर्ण शीर्ण हो चुका है और इसके टावर जर्जर हो चुके हैं और एक तरफ को झुके हुए प्रतीत हो रहे हैं। यातायात के बढ़ते घनत्व के कारण भविष्य में सेतु के क्षतिग्रस्त होने की संभावना है। ऐसे में जानहानि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए किसी भी प्रकार की जानहानि व दुर्घटना को ध्यान में रखते हुए लक्ष्मण झूला 12 जुलाई से बंद किया जाता है।’

Rishikesh Laxman Jhula Bridge Closed for Public
Rishikesh Laxman Jhula Bridge Closed for Public

विशेषज्ञों ने भी दी थी बंद करने की राय :

दरअसल लक्ष्मण झूला सेतु महज एक सेतु नहीं है बल्कि विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भी है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी जो यात्री ऋषिकेश आते हैं वह लक्ष्मण झूला पर जरूर जाते हैं और तस्वीरें क्लिक करते हैं। लगातार बढ़ रहे दवाब के बाद यह सेतु एक तरफ झुका हुआ नजर आ रहा था। विशेषज्ञों ने सलाह दी थी कि इसका इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है। इसके बाद इसका सर्वे किया गया और फिर लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इसे बंद करने का निर्णय लिया।

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दो जिलों को जोड़ता है यह पुल :

गंगा नदीं के ऊपर बना यह पुल टिहरी जिले में तपोवन गांव को नदी के पश्चिमी किनारे पर स्थित पौड़ी गढ़वाल जिले के जोंक से जोड़ता है। पश्चिमी किनारे पर भगवान लक्ष्मण का मंदिर है जबकि इसके दूसरी ओर श्रीराम का मंदिर है। इस सेतु पर कई प्रसिद्ध फिल्मों की शूटिंग भी हो चुकी हैं।

Rishikesh Laxman Jhula Bridge Closed for Public
Rishikesh Laxman Jhula Bridge Closed for Public

पौराणिक महत्व :

कहा जाता है कि भगवान राम खुद इस स्थान पर पधारे थे और उन्होंने अपने छोटे भाई लक्ष्मण ने इसी जगह पर जूट की रस्सियों के सहारे नदी को पार किया था। पहले यह जूट की रस्सियों के सहारे बना था और बाद में इस पुल को लोहे के मजबूत चारों से बनाया गया। पुल के बाई तरफ पैदल रास्ता बदरीनाथ तथा दायीं तरफ का रास्ता स्वर्गाश्रम की तरफ जाता है। कहा जाता है कि जब 1950 से पहले चारों तरफ की यात्रा पैदल की जाती थी तो इसी सेतु से होकर यात्री अपनी यात्रा करते थे।

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