हाथ में मौली (कलावा) बाँधने के ये हैं वैज्ञानिक लाभ

हिंदू धर्म में लगभग प्रत्येक धार्मिक और मांगलिक कार्य के अवसर पर हाथ में मौली (कलावा) बांधा जाता है। हमारे ऋषि-मुनि कलावा बाँधने से होने वाले अनगिनत लाभों से परिचित थे, उनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

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Scientific Benefits of Tying Mauli (Kalawa) in Hand

हाथ की कलाई की नस में मानव शरीर की संरचना का नियंत्रण करने वाला एक प्रमुख केंद्र छिपा हुआ है। इसीलिए डॉक्टर हृदय गति एवं रक्तचाप मापने के लिए कलाई का उपयोग करते हैं। कलाई पर कलावा बाँधने से त्रिदोष अर्थात् वात, पित्त और कफ में सामंजस्य उत्पन्न होता है और व्यक्ति को नए रोग उत्पन्न होने का खतरा कम होता है।

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Scientific Benefits of Tying Mauli (Kalawa) in Hand (Picture: wikihow)

एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति में हृदय रोग, रक्तचाप, मधुमेह और लकवा जैसे गंभीर रोगों के ईलाज के लिए हाथ की कलाई के बिंदुओं पर दबाव डाला जाता है। इन्हीं बिंदुओं पर कलावा बाँधा जाता है, जिससे व्यक्ति स्वस्थ रहता है।

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Scientific Benefits of Tying Mauli (Kalawa) in Hand

शास्त्रों के अनुसार हाथ पर कलावा बंधे होने से त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) तथा तीनों देवियों (सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती) की कृपा क्रमशः कीर्ति, रक्षा, दुर्गुण विनाश, संपत्ति, शक्ति एवं बुद्धि के रूप में प्राप्त होती है और मनुष्य कुदृष्टि से सुरक्षित रहता है।

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Scientific Benefits of Tying Mauli (Kalawa) in Hand

धर्मग्रंथों के अनुसार पुरुषों एवं अविवाहित कन्याओं को दाएं हाथ में तथा विवाहित स्त्रियों को बाएं हाथ में मौली (कलावा) बांधना चाहिए और इसे बंधवाते समय उस हाथ की मुठ्ठी बंधी होनी चाहिए, जिसमें कलावा बंधवा रहे हों, एवं दूसरा हाथ सिर पर हो. इस पुण्य कार्य के लिए व्रतशील बनकर उत्तरदायित्व स्वीकार करने का भाव रखा जाए. पूजा करते समय नवीन वस्त्रों के न धारण किए होने पर मोली हाथ में धारण अवश्य करना चाहिए. धर्म के प्रति आस्था रखें. मंगलवार या शनिवार को पुरानी मौली उतारकर नई मोली धारण करें.

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Scientific Benefits of Tying Mauli (Kalawa) in Hand

मौली (कलावा) बांधने की परंपरा तब से चली आ रही है, जब वामन भगवान ने दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए उनकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा था। शास्त्रों में भी इसका प्रमाण इस श्लोक के माध्यम से प्राप्त होता है – येन बद्धो बलीराजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे माचल माचल। संकटों के समय भी रक्षासूत्र हमारी रक्षा करते हैं.

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