तो इस वजह से चढ़ाया जाता है शनि देव पर तेल

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बचपन से ही हम सब अपने घरों में एक प्रथा देखते आये हैं. हर शनिवार को शनिदेव को तेल अर्पित करने और उस तेल में अपने चेहरे को देखने की. जैसा कि हम देखते हैं की घर के बड़े धर्म से सम्बंधित जिन बातों का पालन करते हैं उनका उल्लेख शास्त्रों और पुराणों में अवश्य मिलता है. तो आइये जानते हैं पुराणों के अनुसार शनि देव को तेल अर्पित करने का क्या महत्त्व है? आखिर शनिदेव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है? और इस तेल में अपना चेहरा देखने का क्या महत्त्व है? Shani Dev Par Tel

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हिंदू धर्म में कई देवी-देवता है। सप्ताह में कुल सात दिन होते हैं और हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सप्ताह का हर दिन किसी ना किसी देवता को समर्पित है। रविवार को सूर्यदेव की पूजा की जाती है तो सोमवार को जगत के नाथ भोलेनाथ की पूजा की जाती है। मंगलवार को कष्टभंजक हनुमान जी की पूजा की जाती है तो बुधवार को श्रीगनेश की पूजा की जाती है, गुरुवार के दिन विष्णु भगवान की आराधना की जाती है तो वहीं शुक्रवार को धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

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अच्छे कर्म करने वालों को ज़रूरत नहीं है शनिदेव से डरने की:

शनिवार का दिन बहुत ही ख़ास होता है, क्योंकि इस दिन कर्मों के आधार पर फल देने वाले देवता शनि की पूजा की जाती है। ज़्यादातर लोग शनिदेव से डरते हैं, क्योंकि लोगों को ऐसा लगता है कि वह किसी को भी ऐसे ही प्रताड़ित करते हैं। जबकि लोगों का यह सोचना बिलकुल ग़लत है।

शनिदेव लोगों के अच्छे और यूर कर्मों के आधार पर फल देते हैं। जो लोग जीवन में हमेशा अच्छे कर्म करते हैं, उन्हें शनिदेव से डरने की ज़रूरत नहीं है। जो लोग जीवनभर बुरे कर्मों को अंजाम देते हैं, ऐसे लोगों के लिए शनिदेव किसी काल से कम नहीं है।

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तेल चढ़ाने से प्रसन्न होते हैं शनिदेव:

कहा जाह है कि शनिदेव को तेल दान करने से शनि के बुरे प्रभावों से मुक्ति मिलती है। जो लोग नियमित ऐसा करते हैं, उन्हें शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति मिल जाती है। शनिदेव को तेल तो कई लोग चढ़ाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि क्यों तेल चढ़ाने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं? अगर नहीं तो हम आपको बताते हैं।

मान्यता है कि रामायण काल में एक बार शनिदेव बहुत जलखि हो गए थे। उस समय हनुमान जी ने शनिदेव के शरीर पर तेल लगाया था। जिससे शनिदेव को दर्द से आराम मिला। उसी समय से शनिदेव को तेल चढ़ाने की परम्परा शुरू हो गयी। इसके बारे में दो कथाएँ भी प्रचलित हैं।

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तेल चढ़ाने वाले को मिलती है परेशानियों से मुक्ति:

पहली कथा के अनुसार एक बार रावण ने सभी नौ ग्रहों को अपना बंदी बना लिया। उस समय रावण ने बंदीगृह में शनिदेव को उल्टा लटका दिया था। उसी समय हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका गए और पूरी लंका को जला दिया। लंका जलने से सभी ग्रह आज़ाद हो गए। लेकिन उल्टा लटके होने की वजह से शनिदेव आज़ाद नहीं हो पाए और दर्द से तड़प रहे थे।

तब हनुमान जी ने उन्हें नीचे उतारा और रस्सी से बने उनके घावों पर तेल लगाया। इससे शनिदेव को दर्द से राहत मिली। उसी समय शनिदेव ने कहा था कि जो भी व्यक्ति श्रद्धा भाव से उनके ऊपर तेल चढ़ाएगा उसे जीवन की सभी समस्याओं से मुक्ति मिल जाएगी।

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बुरी तरह हार गए शनिदेव हनुमान जी से:

दूसरी कथा के अनुसार एक बार शनिदेव को अपनी शक्ति पर घमंड हो गया था। इस वजह से उन्होंने महबली हनुमान जी से युद्ध करने की ठान ली। जब शनिदेव हनुमान जी के पास पहुँचे तो वह पूजा कर रहे थे। शनिदेव ने उन्हें बिना कुछ सोचे-समझे युद्ध के लिए ललकारा।

हनुमान जी ने शनिदेव की युद्ध की ललकार को सुनकर उनके पास समझने के लिए पहुँचे। लेकिन शनिदेव कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद हनुमान जी और शनिदेव के बीच भयंकर युद्ध हुआ। युद्ध में शनिदेव हनुमान जी से बुरी तरह हार गए। युद्ध के दौरान उन्हें बहुत चोटें भी लगी थी, जिसकी वजह से वह दर्द से कराह रहे थे।

इसके बाद हनुमान जी ने उनके शरीर पर तेल लगाया और उनका दर्द दूर हो गया। उसके बाद शनिदेव ने कहा कि जो भी व्यक्ति उनके ऊपर तेल चढ़ाएगा, वह उसकी सभी पीड़ा को दूर कर देंगे।

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शनिदेव के लंगडाकर चलने का कारण :

शनिदेव दक्षप्रजापति की पुत्री संज्ञादेवी और सूर्यदेव के पुत्र है। यह नवग्रहों में सबसे अधिक भयभीत करने वाला ग्रह है। इसका प्रभाव एक राशि पर ढाई वर्ष साढे साती के रूप मे लंबी अवधि तक भोगना पडता है। शनिदेव की गति अन्य सभी ग्रहों से मंद होने का कारण इनका लंगडाकर चलना है। वे लंगडाकर क्यों चलते है

इसके संबंध में सूर्यतंत्र में एक कथा है-एक बार सूर्यदेव का तेज सहन न कर पाने की वजह से संज्ञादेवी ने अपने शरीर से अपने जैसी ही एक प्रतिमूर्ति तैयार की और उसका नाग सवर्णा रखा इसलिए उनका दिया शाप व्यर्थ तो नहीं होगा, परन्तु यह इतना कठोर नहीं होगा कि टांग पूरी तरह से अलग हो गए। हां तुम आजीवन एक पांव से लंगडाकर चलते रहोगे। तभी से शनिदेव लंगडे है।

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