इंजेक्टेड तरबूज बन सकता है बीमारी की वजह, इस तरह करें पहचान

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हेल्लो दोस्तों गर्मियां होने लगी हैं और गर्मियों में तरबूज शरीर के लिए बहुत अच्छा होता है। यह सिर्फ एक फल ही नहीं, असल में गुणों की खान है। तरबूज हमारे शरीर में पानी की मात्रा को बैलेंस रखता है और शरीर से पानी की कमी दूर करता है। इसके साथ कई समस्याओं को पलभर में दूर कर सकता है। यह एक ऐसा फल है जो गर्मी में बॉडी हाइड्रेट करने का सबसे अच्छा स्त्रोत होता है। Side Effects Of Injected Watermelon

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तरबूज में पानी और ग्लूकोज होता है। यह हमारे शरीर को ठंडक प्रदान करता है। तरबूज में विटामिन A और विटामिन C होते हैं, जो आपके स्किन के लिए बहुत जरुरी है। तरबूज एक ऐसा फल है जिसका 90% हिस्सा पानी होता है और इसमें 6% शुगर होता है। फाइबर की मात्रा अच्छी होने के कारण तरबूज का सेवन गर्मियों में बहुत फायदेमंद माना जाता है।

तरबूज में विटामिन, मिनरल, फाइबर जैसे पोषक तत्व, लाइकोपीन, फेनोलिक, बीटा कैरोटीन एंटीऑक्सिडेंट और अमीनो एसिड स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। एक सर्वे में साबित हुआ है कि अगर गर्मियों के मौसम में रोज तरबूज खाया जाए तो कई बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। किन्तु तरबूज की सही पहचान होने के बाद ही ये फायदेमंद होगा. क्योंकि आजकल बाजार में इंजेक्टेड तरबूज भारी मात्रा में पाए जा रहे हैं जिससे अनेक बीमारियाँ हो रही हैं.

Side Effects Of Injected Watermelon
Side Effects Of Injected Watermelon

तरबूज से हो सकती है फ़ूड प्वॉइजनिंग :

आजकल ऐसे केस सामने आ रहे हैं, जिनमें तरबूज खाने के बाद पेट में दर्द हुआ और जब डॉक्टर को दिखाया गया तो पता चला कि यह फ़ूड प्वॉइजनिंग का मामला है। तरबूज से फ़ूड प्वॉइजनिंग के ये मामले इसलिए सामने आ रहे हैं क्योंकि आजकल तरबूज को इंजेक्शंस द्वारा ज्यादा लाल बनाया जा रहा है। इसमें इस्तेमाल होने वाला केमिकल सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।

दरअसल तरबूज या किसी भी फल में इंजेक्शन इसलिए लगाने की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि उन्हें समय से पहले तोड़ लिया जाता है। समय से पहले मार्केट में भेजना, उनकी बिक्री बढ़ाने के लिए उनके साइज, रंग, स्वाद को अच्छा करने के लिए कुछ खतरनाक केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है।

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तरबूज के लिए हर साल मई-जून का मौसम आदर्श माना जाता है। ज्यादा गर्मी वाला मौसम तरबूज और खरबूजा के लिए अच्छा माना जाता है, क्योंकि अधिक गर्मी से इनमें मीठापन ज्यादा आता है। यह जुलाई तक मार्केट में रहते हैं। बारिश पड़ने के बाद इनकी मिठास कम हो जाती है और फिर इनका पीक सीजन भी खत्म हो जाता है।

जब भी हम फल खाते हैं तो उसके फल की चिंता भी साथ में हो जाती है। फल यानी उसे खाने का शरीर पर कोई उलटा असर तो नहीं होगा? ऐसे ही सवालों और चिंताओं के बारे में हमने कई एक्सपर्ट से बात की। नतीजा आया कि अगर हम कुछ एहतियात बरतें तो फल खाने पर फल की चिंता करने की जरूरत नहीं रहेगी। इन्हीं एहतियातों के बारे में जानकारी दे रहे हैं.

Side Effects Of Injected Watermelon
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किन केमिकल से बनाया जाता है तरबूज को लाल? :

तरबूज को समय से पहले पकाने, इसकी लाली और स्वाद बढ़ाने के लिए कई तरह के केमिकल का उपयोग किया जाता है। ये केमिकल्स हैं -:

एरीथ्रोसिन – तरबूज को अंदर से लाल करने के लिए उसमें एरीथ्रोसिन मिलाते हैं, जो एक प्रकार का रंग होता है.

वैक्स– अक्सर तरबूज के इंजेक्शन वाले हिस्से को छिपाने और ऊपर से फ्रेश दिखाने के लिए हरे रंग का वैक्स लगाते हैं.

ऑक्सिटोसिन हार्मोन– हार्मोन का इंजेक्शन ऑक्सिटोसिन भी तरबूज में लगाया जाता है। यह हार्मोन इंजेक्शन महिलाओं या पशुओं को प्रसव के दौरान लगाते हैं। इसका इस्तेमाल फलों का साइज बढ़ाने के लिए किया जाता है। इस पर आई रिपोर्ट्स में पहले भी बताया गया है कि फलों या सब्जियों के साइज को बढ़ाने के लिए लगाया जाने वाला ऑक्सिटोसिन हार्मोन सेहत के लिए काफी खतरनाक होता है।

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इन केमिकल्स से सेहत पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। फ़ूड प्वॉइजनिंग का खतरा तो होता ही है, साथ ही अगर इन केमिकल्स की अधिक मात्रा शरीर में पहुंच जाए तो किडनी फेल होने का खतरा भी होता है। यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है।

तरबूज के भी हैं कई रूप :

मार्केट में आपको कई प्रकार के तरबूज मिल जाएंगे। ये आपको बाहर से हरे और अंदर से लाल नजर आएंगे। वहीं अब ऐसे भी तरबूज आ रहे हैं जो अंदर से पीले निकलते हैं। तरबूज की मुख्य किस्में इस प्रकार हैं:

माधुरी तरबूज : यह तरबूज आकार में लंबा होता है। इसमें बाहर की ओर हरे रंग की धारियां होती हैं। यह तरबूज खाने में काफी मीठा होता है। इसकी अधिकतर खेती नदी के किनारे रेतीले स्थान पर होती है। यह तरबूज अब मार्केट में कम ही दिखाई देता है। इस वैरायटी का एक तरबूज 6 से 15 किलो का होता है। इसकी कीमत करीब 20 रुपये प्रति किलो है।

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शुगर बेबी तरबूज : यह भी गोलाकार और बाहर से गहरे हरे रंग का होता है। इसका आकार दूसरे तरबूजों की अपेक्षा छोटा और खाने में काफी मीठा होता है। इसी कारण इसे शुगर बेबी कहते हैं। आजकल मार्केट में ये तरबूज ही अधिक हैं। एक तरबूज का वजन 1.5 किलो से 4 किलो तक का होता है। यह थोक मार्केट में 4 से 7 रुपये प्रति किलो और रिटेल में 10 से 50 रुपये किलो तक मिल जाता है।

अनमोल तरबूज : यह तरबूज बाहर से हरा, लेकिन अंदर से हल्के पीले रंग का होता है। इसका स्वाद शहद जैसा मीठा होता है। यह मार्केट में 15 से 20 रुपये प्रति किलो की दर से मिल जाता है। हालांकि दिल्ली-एनसीआर में यह कम बेचा जाता है।

कैसे पहचाने कि तरबूज इंजेक्टेड है या नहीं? :

इंजेक्टेड तरबूज पहचानने के कई तरीके हैं, जिनसे आप जान सकते हैं कि तरबूज प्राकृतिक रूप से पका हुआ है या उसे इंजेक्शन लगा कर पकाया गया है।

देखें तरबूज का बाहरी हिस्सा :

तरबूज बेल पर उगता है, अपने भार की वजह से यह जमीन पर टिका होता है। जमीन पर होने की वजह से इसके नीचले हिस्से का रंग उड़ा हुआ या फीका दिखता है। जबकि ऊपर का रंग नॉर्मल हरा होता है तो अगर तरबूज इंजेक्टेड होगा तो एक तरफ से तरबूज का रंग हल्का नहीं होगा, बल्कि हर तरफ से इसका रंग समान होगा।

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अंदर से दिखेगा फर्क :

तरबूज को अगर इंजेक्शन द्वारा पकाया गया है तो तरबूज हर एक जगह से समान न दिख कर, कहीं से सुर्ख लाल तो कहीं फीके रंग का होगा। जहां केमिकल का असर ज्यादा होगा तरबूज वहां से ज्यादा लाल होगा। इसके अलावा तरबूज के टुकड़े को काट कर एक पानी के बर्तन में डालिए और थोड़ी देर के लिए छोड़ दीजिए। इससे अगर पानी का रंग हल्का गुलाबी या लाल हो तो समझिए तरबूज इंजेक्टेड है।

तरबूज की डंडी से करें पहचान :

तरबूज जिस डंठल के जरिए बेल से जुड़ा होता है, वो तरबूज के नैचुरल तरीके से पकने के बाद तोड़े जाने पर काली या सूखी पड़ जाती है। जबकि इंजेक्टेड तरबूज में डंठल हरी ही रहती है।

सिरके की मदद से पहचाने :

इंजेक्टेड तरबूज में अगर ऊपर से हरे रंग का वैक्स लगाया गया है, तो आप सिरके (विनेगर) का उपयोग करके इसे पहचान सकते हैं। सिरके से वैक्स निकलने लगेगा, जिससे पता चल जाएगा। अगर रंग पहले जैसा ही रहा तो समझ लीजिए तरबूज प्राकृतिक है।

Side Effects Of Injected Watermelon
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मिठास में दिखेगा फर्क :

प्राकृतिक रूप से पके पूरे तरबूज की मिठास एक जैसी होती है, जबकि इंजेक्टेड तरबूज में कहीं ज्यादा मिठास होती है तो कहीं कम।

इन सावधानियों को बरत कर आप अपने आपको बड़ी बीमारियों के खतरे से बचा सकते हैं। ऐसा नहीं है कि डर के कारण फल खाना ही छोड़ दिया जाए। बस कुछ सावधानियां बरत कर अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखा जा सकता है।

कब और कितना खाएं :

तरबूज रोजाना 300 से 400 ग्राम और खरबूजा 150 से 200 ग्राम खाना काफी रहता है। इन्हें खाने का कोई निश्चित समय नहीं है। खाना खाने से पहले या खाना खाने के बाद। अगर तरबूज-खरबूजा को मिक्स करके भी खाएं तो भी कोई परेशानी नहीं है।

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आम धारणा है कि तरबूज में नमक (काला या सफेद) मिलाकर खाना चाहिए। दरअसल, चुटकी भर नमक मिलाने से इन फलों में कुछ एक्स्ट्रा मिनरल जुड़ जाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए अच्छे रहते हैं। हालांकि तरबूज में नमक मिलाकर उन्हीं लोगों को खाना चाहिए जिनका अधिक पसीना निकलता है।

कैसे और कहां रखें तरबूज :

सबसे पहले तो तरबूज उतने ही खरीदें, जितने आप एक बार में खा सकें। अगर किसी कारण से तरबूज बच जाए तो उन्हें कटा हुआ या टुकड़ों में काटकर न छोड़ें। अगर मजबूरी में कटा हुआ छोड़ना पड़े तो उन्हें एयरटाइट ढक्कन वाले कंटेनर या पॉलीथीन से ढककर फ्रिज में रख दें।

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यहां ध्यान रहे कि कटे हुए तरबूज को दो घंटे से ज्यादा समय तक फ्रीज में न रखें। काटकर ठंडा करने के लिए फ्रिज में रखने से बेहतर है कि जब खाना हो, साबुत ही दो घंटे पहले फ्रिज में रख दें।

अगर तरबूज कटे हुए नहीं हैं तो उन्हें फ्रिज में रखने के बजाय सामान्य तापमान पर ही घर में छांव में रखें। तरबूज को बिना काटे गर्मी के मौसम में घर पर छांव में 5 से 7 दिन तक रखा जा सकता है।

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