जानिए स्कन्द षष्ठी की पूजा विधि एवं व्रत से होने वाले लाभ

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हिन्दू धर्म के अनुसार हर माह शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी का व्रत रखा जाता है। 28 मई को स्कंद षष्ठी पड़ रही है. ये दिन मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है। इस दिन विशेष रूप से भगवान् कार्तिकेय की पूजा अर्चना की जाती है। आज के दिन व्रत रखने का भी ख़ासा विधान है। ये त्यौहार मुख्य रूप से दक्षिण भारत में खासतौर से मनाया जाता है। Skanda Sashti Vrat 2020

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धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से दीर्घायु और प्रतापी संतान की प्राप्ति होती है। साथ ही व्रती के जीवन से दुःख-दरिद्रता दूर हो जाता है। इन्हें स्कंद देव, महासेन, पार्वतीनन्दन, षडानन, मुरुगन, सुब्रह्मन्य आदि नामों से जाना जाता है। आज हम आपको स्कंद षष्ठी का महत्व, पूजा विधि और इस त्यौहार से जुड़े पौराणिक कथा के बारे में बताने जा रहे हैं। आइये जानते हैं इस त्यौहार की विशेष ख़ासियत और महत्व के बारे में विस्तार से।

स्कन्द षष्ठी का महत्व :

इस त्यौहार को दक्षिण भारत में मुख्य रूप से बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन भगवान् कार्तिकेय जिन्हें मुरुगन के नाम से भी जानते हैं उन्होनें इसी दिन तारकासुर नाम के राक्षस का वध किया था और देवताओं को उसके चंगुल से बचाया था। इसलिए इस दिन को स्कंद षष्ठी के रूप में मनाया जाने लगा।

Skanda Sashti Vrat 2020
Skanda Sashti Vrat 2020

इस त्यौहार का नाम स्कंद षष्ठी इसलिए भी पड़ा क्योंकि पार्वती माता के दुर्गा स्वरुप स्कंदमाता को कार्तिकेय की माता माना जाता है। बता दें कि नवरात्रि के दौरान पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। कई जगहों पर इस त्यौहार को चंपा षष्ठी के नाम से भी मनाते हैं और इस दिन मुरुगन के सुब्रमण्यम रूप की पूजा की जाती है। 

स्कंद षष्ठी पौराणिक कथा 

इस त्यौहार को मनाये जाने के पीछे मख्य रूप से एक प्राचीन कथा काफी प्रचलित है। माना जाता है की एक बार शिव जी और माता पार्वती कैलाश पर्वत से मलिक्कार्जुन चले गए थे और उसी दौरान तारकासुर नाम के राक्षस ने मौके का फायदा उठाते हुए देवलोक में अपने आतंक से सभी देवताओं को बंदी बना लिया। तारकासुर के आतंक से परेशान होकर देवताओं ने उस समय मुरुगन यानि की भगवान् कार्तिकेय का आहवान किया और उन्हें अपनी रक्षा के लिए बुलाया।

मान्यता है कि देवताओं की रक्षा के लिए कार्तिकेय देवलोक पहुँचें और जिस दिन उन्होंने तारकासुर का वध किया उस दिन षष्ठी तिथि थी। इसलिए आज के दिन भगवान् मुरुगन की पूजा आराधना की जाने लगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज व्रत रखने और मुरुगन की पूजा करने से आपके मान मर्यादा, धन-सम्मान और यश में वृद्धि हो सकती है। 

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स्कन्द षष्ठी शुभ मुहूर्त :

इस दिन शुभ मुहूर्त मध्य रात्रि 12 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर दिन के 11 बजकर 27 मिनट तक है। इस दौरान व्रती कार्तिकेय देव की पूजा उपासना कर सकते हैं।

स्कन्द षष्ठी पूजा विधि :

ऐसी मान्यता है कि आज के दिन विधि विधान के साथ भगवान् कार्तिकेय की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है और जीवन सुखमय बीतता है। इसलिए आज के  दिन निम्न विधि से पूजा करना फलदायी साबित हो सकता है। 

  • आज के दिन सबसे पहले सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करके नए वस्त्र धारण करें। 
  • अब सबसे पहले मुरुगन की मूर्ति या फोटो स्थापित करें और दक्षिण दिशा की तरफ अपना मुख करके पूजा के लिए बैठे। 
  • इसके बाद देवों के देव महादेव, माता पार्वती और कार्तिकेय की पूजा जल, मौसमी फल, फूल, मेवा, कलावा, दीपक, अक्षत, हल्दी, चंदन, दूध, गाय का घी, इत्र आदि से करें।
  • पूजन की अन्य समाग्रियों के साथ ही दही और दूध को शामिल करना ना भूलें। 
  • यदि आज के दिन अपने व्रत रखा है तो किसी भी हाल में इस दौरान लहसुन, प्याज, शराब और मांस-मछली इत्यादि का सेवन ना करें।
  • आज के दिन व्रतियों को विशेष रूप से ब्राह्मी का रस और घी का सेवन करना चाहिए। 
  • इसके साथ ही साथ रात के समय अगर हो सकें तो ज़मीन पर सोएं। 
  • अगले दिन सुबह स्नान आदि के बाद भगवान कार्तिकेय की पूजा अर्चना करें और अपना व्रत खोलें।

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