क्या आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है तो जानिये इसकी पूजा और उपाय

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एस्ट्रोलॉजी डेस्क : कालसर्प योग जिसे काल सर्पदोष के रूप में भी जाना जाता है, सबसे अधिक डरावने ज्योतिषीय संयोजनों में से एक है जो किसी के जीवन में अत्यंत दुख और दुर्भाग्य ला सकता है। Solution of Kaal Sarp Dosh

काल सर्प योग कुंडली में तब बनता है जब शनि, बृहस्पति, सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध और शुक्र सहित सभी सात प्रमुख ग्रह दो छाया ग्रहों राहु और केतु के बीच आते हैं।

वैदिक ज्योतिष में, राहु सर्प के सिर का प्रतिनिधित्व करता है और केतु सर्प की पूंछ को दर्शाता है। कुंडली में इस योग के होने से किसी व्यक्ति पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है। Effects And Remedies Of Kaalsarp

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कालसर्प योग या काल सर्प दोष किसी जातक की कुंडली में ऐसा योग है जो जातक के पूर्वजन्म के किसी जघन्य अपराध के कारण होता है |

इस दोष या योग की वजह से जातक के जीवन में कई समस्याएं आती है जो कि आर्थिक, शारीरिक, मानसिक, संतान सम्बन्धी, देरी से विवाह सम्बन्धी, वैवाहिक जीवन में खटपट सम्बन्धी हो सकती है| यह दोष अन्य ज्योतिष दोषों में सबसे बुरा समझा जाता है|

क्या होता है कालसर्प दोष : What is Kaal Sarp Dosh

कालसर्प दोष का नाम सुनते ही कुछ लोगों को तो डर ही लगने लगता है, अगर किसी की कुंडली में कालसर्प हो जिसके कारण उसका जीवन चारों ओर से परेशानियों से घिर रहा हो तो अब घबराने की जरूरत नहीं, सभी चिंताएं छोड़ दे और यहां जो सरल से उपाय बताये जा रहे उन्हे करने से कालसर्प दोष का प्रभाव एक सप्ताह में ही कम हो जाता है।

अगर किसी की कुंडली में कालसर्प दोष होता है तो उसके विवाह में बहुत बाधाएं आती हैं। ऐसे में इस दोष को दूर करने के लिए कुछ छोटे से उपाय करना आवश्यक हो जाता है।

ये उपाय ही कालसर्प दोष से मुक्ति दिला सकता है। यह दोष कुंडली में 9 में से 7 ग्रह के राहु-केतु के बीच में आने से बनता है।

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जिसके बाद व्यक्ति को विभिन्न तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। आइए आपको बताते हैं इस उपाय के बारे में…

जब किसी की कुंडली में राहु और केतु के मध्य सारे ग्रह स्थित हों तो उसे काल सर्प दोष कहते हैं । ज़्यादा स्पष्ट जानना है तो ये कुंडली देखें।

इसमें आप देख पा रहे होंगे की सारे के सारे ग्रह राहु और केतु के मध्य स्थित हैं। यानी सारे ग्रह 1 नम्बर से 7 के बीच हैं, 8 से 12 में कोई ग्रह नहीं है। ये होता है काल सर्प दोष। और डराने के लिए कुंडली में सर्प की तस्वीर भी है।

ये कुंडली उदाहरण के लिए है अन्य कुंडली में अलग तरह से भी ये हो सकता है । सार ये है की सभी ग्रह राहु केतु के मध्य में अवस्थित होने चाहिएँ ।

कालसर्प योग के प्रकार : Types of Kaal Sarp Yog

कालसर्प योग 12 प्रकार के होते है।

1 – अनन्त कालसर्प योग– जब जातक की कुंडली में राहु लग्न में हो तथा केतु सप्तम में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में हों तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।

2 – कुलिक कालसर्प योग – जब जातक की कुंडली में राहु दूसरे घर में तथा केतु अष्टम स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।

3 – वासुकी कालसर्प योग – जब जातक की कुंडली में राहु तीसरे घर में तथा केतु नवम स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।

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4 – शंखपाल कालसर्प योग – जब जातक की कुंडली में राहु चौथे घर में और केतु दशम स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।

5 – पद्म कालसर्प योग – जब जातक की कुंडली में राहु पंचम घर में और केतु एकादश स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।

6 – महापद्म कालसर्प योग – जब जातक की कुंडली में राहु छठे घर में और केतु बारहवे स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।

7 – तक्षक कालसर्प योग – जब जातक की कुंडली में राहु सप्तम घर में और केतु लग्न में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।

8 – कर्कोटक कालसर्प योग – जब जातक की कुंडली में राहु अष्टम घर में और केतु दूसरे स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।

9 – शंखचूड़ कालसर्प योग – जब जातक की कुंडली में राहु नवम घर में और केतु तीसरे स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।

10 – घातक कालसर्प योग – जब जातक की कुंडली में राहु दशम घर में और केतु चौथे स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।

11 – विषधार कालसर्प योग – जब जातक की कुंडली में राहु ग्यारवे घर में और केतु पांचवें स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच मंं ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।

12 – शेषनाग कालसर्प योग – जब जातक की कुंडली में राहु बारहवें घर में और केतु छठें स्थान में उपस्थित हो एवं बाकी सारे ग्रह इनके बीच में ही हो तो इस प्रकार का कालसर्प योग होता है।

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कालसर्प दोष के संकेत : Signs of Kaal Sarp Dosh

  • जिस व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष होता है, उसके बुरे सपने आने लगते हैं।
  • ऐसे व्यक्ति को अकारण मन में डर बना रहता है।
  • कालसर्प दोष से प्रभावित व्यक्ति को सपने में सांप दिखाई देते हैं।
  • अपने पास किसी के खड़े होने का एहसास होता है।
  • काम बनते-बनते रह जाता है, कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिल पाती।
  • घर-परिवार और कार्य स्थल पर अनचाहे वाद-विवाद होते रहते हैं।
  • गंभीर बीमारी लग जाती है और इलाज के बाद भी राहत नहीं मिलती।

कालसर्प दोष से होने वाले नुकसान : Kaal Sarp Dosh Ke Nuksan

Solution of Kaal Sarp Dosh
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1. संतान सुख में कमी –

अगर कुंडली में कालसर्प योग बनता है तो इसके अशुभ प्रभाव के कारण जातक को संतान की प्राप्ति में अनेक प्रकार की अडचने आती है

या कई बार जातक नि:संतान हो जाता है या फिर संतान होकर भी जीवित नहीं रहती इसलिए इस दोष के निवारण हेतु कालसर्प दोष की पूजा करनी चाहिए तभी जातक को संतान सुख मिलता है।

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2. धन का अभाव –

यह योग जातक को दरिद्रता में जीवन व्यतीत करने के लिए मजबूर कर देता है, जातक हमेशा कर्ज में डूबा रहता है।

पैसे की कमी निरंतर बनी रहती है, जब तक जातक कालसर्प दोष निवारण पूजा नहीं करता तब तक उसको धन से सम्बंधित समस्याओ से निजात नहीं मिलती इसलिए देर न करते हुए यह पूजा अवश्य करवानी चाहिए।

3. नौकरी/ व्यवसाय में दिक्कते –

जिस जातक की कुंडली में कालसर्प दोष बनता है उसको निरंतर कामकाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कालसर्प योग आपके व्यवसाय में भी बाधा डालता है।

चाहे कितनी भी कोशिश करे या परिश्रम करे परिणाम हमेशा खराब ही मिलते है, कामकाज-नौकरी को लेकर जातक मानसिक तनाव में रहता है,

अगर कहीं नौकरी मिल भी जाती है तो किसी न किसी बात को लेकर नौकरी में दिक्कते बनी रहती है,

जब तक इस दोष की पूजा नहीं की जाती तब तक आपको नौकरी-कामकाज में सफलता नहीं मिलती, इसलिए समय न गंवाते हुए कालसर्प योग की पूजा अवश्य करवानी चाहिए।

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4. शादी / विवाह में बाधा –

कुंडली में अगर कालसर्प योग है तो जातक के विवाह में अनेक प्रकार की दिक्कते आती है।

कई बार तो विवाह के योग ही नहीं बनते और अगर बनते भी है तो पति-पत्नी के संबंधो में खटास आती है, अलगावं की स्थिति उत्पन्न होती है,

संभव हो सके तो जल्दी ही इस योग की पूजा करवानी चाहिए तभी विवाह के योग अपने आप बनने लग जायेंगे, वैवाहिक सुख की प्राप्ति होगी।

5. स्वास्थ्य में कमी –

इस योग का अशुभ प्रभाव जातक के स्वास्थ्य पर पड़ता है। जातक कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक पीड़ा का सामना करता है।

मन में डर बना रहता है, उपचार करने के बावजूद भी स्वास्थ्य से सम्बंधित दिक्कते बनी रहती है, स्वभाव में चिडचिडा पण देखने को मिलता है, इसलिए स्वास्थ्य में सुधार के लिए कालसर्प निवारण पूजा अवश्य करवानी चाहिए।

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6. डर के साये में जीवन –

काल सर्प दोष से प्रभावित जातक अपना जीवन डर के साये में व्यतीत करता है उसको बार-बार सपने में सांप और पानी दिखाई देता है और साथ ही साथ स्‍वयं को हवा में उड़ता हुआ देखता है, नींद भी नहीं आती और अचानक मन में डर उत्पन्न होता है,

साथ ही जातक के विचारों में बार-बार बदलाव आते हैं और कोई भी काम करने से पहले मन में नकारात्‍मक विचार आते हैं।

पढ़ाई में मन नहीं लगता एवं जातक नशा करने लगता है कालसर्प दोष की शांति के लिए पूजा अवश्य करवानी चाहिए तभी इस दोष से छुटकारा मिल सकता है।

Solution of Kaal Sarp Dosh
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कालसर्प दोष शांति पूजा –

कालसर्प दोष के निवारण हेतु पूजन की अनेक विधि हैं। सबसे उत्तम विधि वैदिक मंत्रों द्वारा किया जाने वाला विधान है और यह भगवान शिव की आराधना द्वारा संभव है। भगवान शिव सर्पों को अपने गले में धारण करते हैं, इसलिए शिव जी की पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्‍न होते हैं और संपूर्ण पाप नष्‍ट होते हैं।

पूजा का महत्‍व –

यह पूजा करवाने से आपके महत्‍वपूर्ण कार्य संपन्‍न होते हैं। इस पूजा के प्रभाव से आपके जितने भी रुके हुए काम हैं वो पूरे हो जाते हैं। शारीरिक और मानसिक चिंताएं दूर होती हैं। नौकरी, करियर और जीवन में आ रही सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती है। नशे की लत से छुटकारा मिलता है, भय दूर होता है।

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कालसर्प योग/दोष से मुक्ति के उपाय :

यदि फिर भी किसी व्यक्ति को लगता है कि कालसर्प योग होता ही है और उसी के कारण उसे बाधा आ रही है तब आवश्यक नहीं कि उसके निवारण के लिए वह हजारों रुपया खर्च कर दे या ज्योतिषियों द्वारा बताए स्थानों पर जाकर इसकी पूजा कराकर आए।

जैसा कि बताया गया है कि राहु साँप का मुख तो केतु पूँछ है और यह साँप भगवान शंकर के गले की शोभा बढ़ाता है, उनके गले का हार है इसलिए कालसर्प दोष का सर्वोत्तम उपाय शिव की पूजा-उपासना से बढ़कर कोई दूसरा नहीं हैं।

Solution of Kaal Sarp Dosh
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1- घी का दीपक भी जलाएं, जिस समय पूजा करें उस समय साधक का मुख पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए। इस प्रकार नित्य 40 दिन तक पूजन करने से कालसर्प दोष दूर होता है।

2- कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए एक छोटा सा चांदी का सर्प बनावाकर तुलसी में इसे रखकर इसकी पूजा करें। धातु से बनी हुई नाग और नागिन की जोड़ी नदी या एक मंदिर में चढ़ाना भी अच्छा परिणाम दिखाता है।

3- सोमवार के दिन भगवान शिवजी की शिवलिंग गंगाजल मिले जल से महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार लगातार 7 दिनों तक अभिषेक करने के बाद चंदन युक्त धूप, तेल, सुगंध अथवा इत्र अर्पित करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है ।

4- लगातार 7 दिनों तक दिन के समय जब राहु काल हो तब मां सिंहिका का ध्यान करते हुए एक माला ‘नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें।

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5- जिस दिन चर्तुदशी हो उस दिन स्नान कर तुलसी के पौधे के नीचे, इसे रखकर इस पर दूध, अक्षत, रोली, आदि लगाकर इसकी पूजा करें।

6- अगर कोई व्यक्ति भगवान कृष्ण की पूजा करता है और पंचमी या शनिवार को नदी में ग्यारह नारियल प्रदान करता है तो यह भी फायदेमंद हो सकता है।

7- एक नारियल का सुखा गोले में छेद करके चीनी, बूरा तथा कुछ सूखे मेवे पीस कर भर दें। अब इस गोले को सांप की बांबी या फिर किसी पीपल अथवा बड़ की जड़ में इस प्रकार से सुरक्षित दबा दें जिससे कि इसमें चीटी लग जाएं। इस उपाय से शीघ्र ही कालसर्प से मुक्ति मिलती है

8- आद्रा, स्वाती अथवा शतभिषा नक्षत्र में जटा वाला नारियल अपने ऊपर से 7 बार उतारकर बहते हुये जल में बहा दें । मन में यह भावना करें की कालसर्प दोष का प्रभाव हो रहा है ।

Solution of Kaal Sarp Dosh
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9- चंदन की माला से राहु के इस बीज मंत्र- ‘ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः’ का जप शिव मंदिर में जाकर करने से कालसर्प दोष की परेशानियों से तुरंत लाभ मिलता है ।

10- 7 दिनों तक अपनी सामर्थ्य के अनुसार बुधवार, शुक्रवार या फिर शनिवार के दिन राहु से संबंधित वस्तुएं जैसे सीसा, सरसों का तेल, तिल, कंबल, मछली, धारदार हथियार, स्वर्ण, नीलवर्ण वस्त्र, गोमेद, सूप, काले रंग के पुष्प, अभ्रक, दक्षिणा आदि का दान किसी सुपात्र वेद पाठी ब्राह्मन को दान करें।

11- गाय माता को हर बुधवार और शनिवार मीठी रोटियां खिलाएं। गौ माता में सभी देवी-देवताओं का वास माना जाता हैं। उन्हें चारा खिलाने से राहु दोष जल्द ही नकारात्मक प्रभाव देना बन्द कर देता हैं। साथ ही काल सर्पदोष में भी राहत मिलती है।

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12- लगातार 7 शनिवार शाम को पीपल के वृक्ष की जड़ में कच्ची लस्सी, फूल और चावल चढ़ाएं। गायत्री मंत्र और राहु बीज मंत्र पढ़ते हुए पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करें। इस उपाय से राहु दोष के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति मिलती हैं।

13- अपने वजन के बराबर अनाज, गुड़ आदि किसी कुष्ट आश्रम या अस्पताल में दें। ऐसा करने से जल्द ही राहु दोष खत्म होता है। इस उपाय को करने से राहु दोष और काल सर्प दोष दोनों से निजात पाई जा सकती हैं।

इन मंदिरों में मिलेगी दोष से मुक्ति :

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  • काल हस्ती शिव मंदिर : दक्षिण भारत के विश्व प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर के पास, लगभग पचास किलोमीटर पर, काल हस्ती शिव मंदिर है। यहां भगवान शिव के एकादश रुद्रावतारों में प्रथम व द्वितीय स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। यहां कालसर्प योग की शांति का उपाय विधि-विधान से किया जाता है। वहां लगभग एक घंटे की पूजा-अर्चना के साथ मंदिर प्रांगण में ही पुरोहित वैदिक रीति से शांति कराते हैं। मंदिर प्रवेश के साथ ही इस पूजा के फल, कुछ दक्षिणा देने से प्राप्त हो जाते हैं। तदुपरांत पूजा-अर्चना कराई जाती है।
  • त्र्यम्बकेश्वर : नासिक के पास त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिग पर भी कालसर्प की शांति का विधान है। त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिग पर भी अभिषेक और पूजा-अर्चना करा कर, नाग-नागिन के जोड़े छोडऩे से कालसर्प पितृदोष की शांति हो जाती है।

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  • त्रियुगीनारायण मंदिर : उत्तरांचल राज्य में द्वादश ज्योतिर्लिग श्री केदारनाथ से 15 कि.मी. पहले त्रियुगीनारायण मंदिर के प्रांगण में चांदी+ तांबा एवं स्वर्ण+चांदी अथवा तांबे का नाग-नागिन (बच्चों सहित 2-3 छोटे नाग) अर्पित करने एवं प्राचीन काल से जल रही धूनी (अग्नि) में चंदन लकड़ी, गूलर और पीपल की लकड़ी अर्पित करने से भी कालसर्प दोष शांत होकर शुभ फल देता है।
  • बद्रीनाथ धाम : चारों धामों में एक बद्रीनाथ में भी पितृदोष कालसर्प की शांति बहुत ही विधि-विधान से कराई जाती है। यहीं पर ब्रह्म कपाल नामक स्थान पर शिव जी द्वारा ब्रह्मा के जिस मुंड को काटा गया था उसे मुक्ति प्रदान कर गले में लटके ब्रह्म मुंड से मुक्ति पाई थी।
  • प्रयाग संगम : इलाहाबाद में संगम पर भी कालसर्प, पितृदोष की शांति के लिए नाग-नागिन की विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कराकर, पूजन करके दूध के साथ संगम में प्रवाहित करना चाहिए। तीर्थराज प्रयाग में कालसर्प दोष की शांति के लिए संगम में तर्पण, श्राद्ध भी कर लेना चाहिए।
  • त्रिनागेश्वरम् वासुकि नाग : दक्षिण भारत के तंजौर जिले के अंतर्गत त्रिनागेश्वरम नाग (राहू) मंदिर में राहू काल में राहू का अभिषेक कराने का भी विधान है। यहां प्रतिदिन राहू काल में अभिषेक किया जाता है।

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