टूट गयी बजट के लाल बक्से की परंपरा, कब और कैसे हुई बजट की शुरुआत

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हेल्लो दोस्तों साल 2020 का बजट शनिवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पारित कर दिया है यूं तो बजट शब्द दिमाग में आने पर ऐसा लगता है मानो वो इसमें ढेर सारी नोटों की गड्डियां लाए हों और देश के कामों के लिए आज वो सभी मंत्रियों में इसको बांट देंगे लेकिन ऐसा नहीं है। Story Behind Budget Suitcase

दूसरी चीज ध्यान आती है कि वित्त मंत्री द्वारा बजट पर दी जाने वाली एक लंबी सी स्पीच। दरअसल, उस बक्से में इस स्पीच से जुड़ी बातों का ब्यौरा होता है, जो वित्त मंत्री पढ़ कर सुनाते हैं। लेकिन इस लाल बक्से से जुड़ी और भी कई दिलचस्प बातें हैं।

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आज हम आपको बजट से जुड़ी तमाम जानकारी यानी बजट के इतिहास के बारे में बताने वाले हैं, लेकिन एक जिज्ञासा हमेशा बनी रही है कि आखिर जो लाल बक्सा लेकर वित्त मंत्री संसद में पेश होते हैं उसमें ऐसा क्या खास होता है? इस बक्से और बजट से जुड़ी तमाम जानकारी हम आपको देने वाले हैं यहां।

1860 से चला आ रहा है यह बक्सा :

हमारे देश के बजट और वित्त मंत्री के लाल बक्से का रिश्ता 1860 से चला आ रहा है। 158 साल हो चुके हैं। दरअसल, बजट फ्रांसीसी शब्‍द ‘बॉगेटी (bougette)’ से निकला है। मतलब होता है इसका लेदर बैग यानी थैला। और इसे धन (राजस्व) के आय और उसके व्यय की सूची भी कहते हैं।

1860 में ब्रिटेन के ‘चांसलर ऑफ दी एक्‍सचेकर चीफ’ विलियम एवर्ट ग्‍लैडस्‍टन वित्त दस्तावेजों के बंडल को लेदर बैग में लेकर आए थे। 158 से अधिक सालों से प्रचलन देखा जा रहा है कि बजट और सूटकेस का रिश्ता पुराना रहा है। तभी से यह परंपरा चल पड़ी… अभी तक वही परंपरा जारी है।

Story Behind Budget Suitcase
Story Behind Budget Suitcase

लंबे भाषण का इतिहास :

इन पेपर्स पर ब्रिटेन की क्‍वीन का सोने में मोनोग्राम था। खास बात यह है कि क्‍वीन ने बजट पेश करने के लिए लेदर का यह सूटकेस खुद ग्‍लैडस्‍टन को दिया था।

ग्‍लैडस्‍टन की बजट स्‍पीच काफी लंबी होती थी, जिसके लिए कई सारे फाइनेंशियल डाक्‍यूमेंट्स और पेपर्स की जरूरत होती थी। इसके बाद से बजट की लंबी स्पीच की परंपरा चल पड़ी।

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भारत का पहला बजट :

साल 1733 में ब्रिटिश वित्तमंत्री रॉबर्ट वॉलपोल चमड़े के थैले में देश की आर्थिक स्थिति का लेखा-जोखा पेश करने आए थे। आम बोल-चाल में जिस बजट का इस्तेमाल करते हैं, वो फ्रेंच शब्द बोजेट से बना है।

चमड़े की थैली को फ्रेंच भाषा में बोजेट या बुगेट कहते हैं। बाद में ये लेखा बजट बन गया। भारत के पहले बजट को पेश करने का काम जेम्स विल्सन ने किया था. इन्होंने 18 फरवरी 1860 को वाइसराय की परिषद में पहली बार बजट पेश किया.

विल्सन को पहली बार वित्त विशेषज्ञ के रूप में वाइसराय की परिषद का वित्त सदस्य नियुक्त किया गया था. यही वजह है कि जेम्स विल्सन को भारतीय बजट का संस्थापक भी कहा जाता है. 

story behind budget suitcase3
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1860 में ब्रिटेन के चांसलर ग्लैडस्टोन ने लकड़ी के बक्से पर लाल रंग का चमड़ा मढ़वा दिया। इस बक्से पर उन्होंने महारानी विक्टोरिया का मोनोग्राम भी लगवा दिया। बाद के दिनों में इस बैग में कई तरह के बदलाव आते गए। लेकिन लाल रंग सभी का पसंदीदा रंग बना रहा। 

ब्रिटिश सरकार ने सौंपी प्रकिया :

भारत को बजट की प्रक्रिया ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गई है। 26 नवंबर 1947 को स्‍वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री शणमुखम शेट्टी ने बजट पेश किया था। उनके पास रेड सूटकेस ही था।

हालांकि, बजट डाक्‍यूमेंट्स लाने के लिए वित्त मंत्री नए सूटकेस का इस्तेमाल करते हैं। भारत में सूटकेस के शेड्स में अंतर दिखाई देता है। लेकिन उसका रंग लाल ही रहता है।

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2010 तक चला ग्लैडस्टन बैग :

बता दें कि ब्रिटेन में रेड ग्‍लैडस्‍टन बजट बॉक्‍स 2010 तक प्रचलन में था। 2010 में इसे म्‍यूजियम में रख दिया गया और उसकी जगह एक फ्रेश रेड लेदर बजट बॉक्‍स का यूज शुरू किया गया।

ब्रिटेन के अलावा यूगांडा, जिम्‍बाब्‍वे और मलेशिया में भी ऐसे ब्रिफकेस का इस्तेमाल किया जाता है। लाल बक्से से आए वित्त मंत्री के लिए बजट पेश करने का दिन बड़े गर्व का दिन होता है।

वित्त मंत्री ने तोड़ी परंपरा :

बैग का लाल रंग भारतीय परंपराओं के हिसाब से शगुन का प्रतीक है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब बजट की कॉपी लेकर निकलीं तो उनके हाथ में लाल सूटकेस की जगह लाल रंग के कपड़े में बजट की कॉपी लिपटी नजर आई.

इस तरह अब यह परंपरा तोड़ दी है. साल 1860 से सूटकेस का ही इस्तेमाल किया जा रहा था हालांकि कई बार इसका रंग जरूर बदला गया है लेकिन सूटकेस की जगह कपड़े का इस्तेमाल आज पहली बार ही किया जा रहा है.

वित्त मंत्री के हाथ में लाल रंग का अशोक स्तंभ चिह्न वाला एक कपड़ा था. निर्मला को बजट दस्तावेजों को लाल रंग के कपड़े में सांसद ले जाते देख ऐसा भी कहा जा रहा है कि इस बार बजट नहीं बल्कि बहीखाता पेश किया जायेगा.

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बजट का समय बदला :

1924 से लेकर 1999 तक बजट फरबरी के अंतिम कार्यकारी दिन शाम पांच बजे पेश किया जाता था यह प्रथा सर बेसिल ब्लैकैट ने 1924 में शुरु की थी इसके पीछे का कारण रात भर जागकर वित्तिय लेखा जोखा जोखा तैयार करने वाले अधिकारियोँ को अराम देना था 2000 में पहली बार यशवंत सिन्हा ने बजट सुबह 11 बजे पेश किया।

हलवा खाने की रस्म :

बजट छपने के लिए भेजे जाने से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा खाने की रस्म निभाई जाती है। इस रस्म के बाद बजट पेश होने तक वित्त मंत्रालय के संबधित अधिकारी किसी के संपर्क में नहीं रहते परिवार से दूर उन्हेँ वित्त मंत्रालय में ही रुकना पड़ता है। एक तरह से यह रस्म बजट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए की जाती थी.

Story Behind Budget Suitcase
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बजट की छपाई:

बजट पेपर पहले राष्ट्रपति भवन में ही छापे जाते थे. लेकिन साल 1950 में Budget पेपर लीक हो जाने के बाद से इन्हें दिल्ली के मिंटो रोड स्थित सिक्योरिटी प्रेस में छापा जाने लगा.

साल 1980 से बजट पेपर नॉर्थ ब्लॉक से प्रिंट होने लगे. शुरुआत में बजट (Budget)अंग्रेजी में बनाया जाता था. लेकिन साल 1955-56 से बजट (Budget) दस्तावेज हिन्दी में भी तैयार किए जाने लगे. साल 1955-56 में बजट (Budget) में पहली बार कालाधन उजागर करने की योजना शुरू की गई

प्रणब मुखर्जी का खास सूटकेस :

यूपीए सरकार के वित्त मंत्री रहे प्रणब मुखर्जी का सूटकेस सबसे खास माना जाता है। दरअसल, यूपीए सरकार के वित्त मंत्री के रूप में उन्‍होंने पूरी तरह ग्‍लैडस्‍टन जैसे रेड सूटकेस का इस्तेमाल किया। इसका शेड भी वैसा था, जैसे कभी ग्लैडस्टन इस्तेमाल करते थे।

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इन नेताओं ने किया बजट पारित :

  • 1947-49 आर के शनमुखम चेट्टी
  • 1949-50 जॉन मथाई
  • 1950-57 सी डी देशमुख
  • 1958-63 मोरारजी देसाई
  • 1963-65 टीटी कृष्णमचारी
  • 1965-67 सचिंद्र चौधरी
  • 1967-69 मोरारजी देसाई
  • 1970-71 इंदिरा गांधी
  • 1971-75 यशवंतराव चवन
  • 1975-77 चिदंबरम सुब्रहमयम
  • 1977-79 हरिभाई एम पटेल
  • 1980-82 आर वेंकटरमण
  • 1982-84 प्रणब मुखर्जी
  • 1984-87 वी पी सिंह
  • 1987-88 एन डी तिवारी
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  • 1987 राजीव गांधी
  • 1988-89 शंकरराव चव्हाण
  • 1989-90 मधु दंडवते
  • 1990-91 यशवंत सिंह
  • 1991-96 मनमोहन सिंह
  • 1997-98 पी चिदंबरम
  • 1999-2001 यशवंत सिंह
  • 2003-04 जसवंत सिंह
  • 2005-08 पी चिदंबरम
  • 2009-12 प्रणब मुखर्जी
  • 2012-14 पी चिदंबरम
  • 2014-18 अरुण जेटली
  • 2019 पीयूष गोयल
  • 2020-21 निर्मला सीतारमण

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बजट पेश करने का रिकॉर्ड:

देश के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने अब तक सबसे अधिक 10 बार बजट पेश किया. वे 6 बार वित्त मंत्री और 4 बार उप प्रधानमंत्री रहे. इनमें 2 अंतरिम बजट (Interim Budget) भी शामिल हैं. अपने जन्मदिन पर 2 बार बजट (Budget) पेश करने वाले भी वे देश के एकमात्र वित्त मंत्री रहे. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी वित्त मंत्री के रूप में 7 बार बजट पेश कर चुके हैं.

इन देशों में भी होता है लाल बक्सा :

ब्रिटेन और भारत के अलावा ये लाल सूटकेस युगांडा, जिम्‍बाब्‍वे और मलेशिया में भी इस्तेमाल किया जाता है। वहां भी स्‍पीच के लिए इसी सूटकेस का इस्तेमाल होता है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज दूसरी बार आम बजट पेश करने जा रही हैं। सीतारमण लोकसभा में 2020-21 का आम बजट पेश करेंगी। बजट ऐसे समय में पेश किया जा रहा है, जब अर्थव्यवस्था सुस्ती के दौर में है।

लेकिन आम बजट पेश करने वाली वह पहली महिला वित्त मंत्री नहीं हैं, उनसे पहले देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1970-71 का बजट पेश किया था। उन्होंने मोरारजी देसाई के इस पद से हटने के बाद वित्त मंत्री का कार्यभार भी संभाला था।

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