क्या है सरोगेसी, किसे है अनुमति और कैसे हो रहा इसका दुरुपयोग

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आज कल हमारे भारत देश में खास करके मुंबई शहर में सरोगेसी का चलन काफी बढ़ गया है। हालांकि पहले यह तकनीक केवल टीवी सीरियल्स में ही दिखाई जाती थी, लेकिन अब बहुत से लोकप्रिय कलाकार इस तकनीक का इस्तेमाल अपनी असल जिंदगी में भी करने लगे है। Surrogacy And Its Process

साल 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले तिजारती नामक महिला को सरोगेसी की परमिशन दी थी। मगर क्या आप जानते है कि आखिर सरोगेसी क्या होती है और क्यों बच्चा पैदा करने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

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बता दे कि जब से शिल्पा शेट्टी सरोगेसी के द्वारा दूसरी बार माँ बनी है, तब से हर व्यक्ति इस तकनीक के बारे में जानना चाहता है। इसलिए आज हम आपको इसकी पूरी जानकारी देंगे। यहाँ गौर करने वाली बात ये है कि सिर्फ बॉलीवुड कलाकार ही नहीं बल्कि टीवी कलाकार जैसे कि कृष्णा अभिषेक और कश्मीरा शाह भी इसी तकनीक के द्वारा दो जुड़वां बच्चों के माता पिता बने है।

क्या होती है “सरोगेसी”

(Surrogacy meaning in hindi)

सरोगेसी या किराए की कोख होना। सरोगेसी एक ऐसा साधन, तकनीक, जरिया या ऐसा एंग्रीमेंट होता है जो एक निसंतान दंपति और एक स्वस्थ महिला के बीच होता है। जिसके माध्यम से निसंतान दंपतियों को संतान सुख मिल पाता है। आज के दौर में ये तकनीक निसंतान दंपतियों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। इसके इलावा जिस औरत की कोख को किराये पर लिया जाता है और जिसके द्वारा बच्चा पैदा होता है उसे सरोगेट मदर कहा जाता है।

आमतौर पर सरोगेसी तकनीक का उपयोग उन दंपतियों के लिए किया जाता है। जो लोग खुद की संतान चाहते है, बार-बार गर्भपात होने की स्थिति या आईवीएफ के फेल होने की वजह से संतान सुख से वंचित हैं। वो सरोगेसी के जरिए पुरूष के स्पर्म को एक स्वस्थ महिला के गर्भ में 9 महीनों तक रखा जाता है। जिसके बाद संतान के जन्म के बाद महिला संतान को निसंतान दंपति को सौंप देती है।

Surrogacy And Its Process
Surrogacy And Its Process

सरोगेट मदर और कपल के बीच होता है यह एग्रीमेंट :

इस दौरान सरोगेट मदर और कपल के बीच एक एग्रीमेंट तय किया जाता है। इस एग्रीमेंट के तहत बच्चा पैदा होने के बाद क़ानूनी रूप से उस कपल का ही होता है जिसने सरोगेट मदर की कोख किराये पर ली होती है। वही दूसरी तरफ जो महिला सरोगेट मदर बनती है उसे उसकी जरूरत के अनुसार पैसे भी दिए जाते है।

बच्चा पैदा होने तक उस सरोगेट मदर को कपल द्वारा सभी सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जाती है। यानि दवाईयों से लेकर डिलीवरी तक का सारा खर्च उस कपल द्वारा ही दिया जाता है, जो सरोगेसी के द्वारा बच्चा पैदा करवाते है। अब अगर हम सरोगेसी की प्रक्रिया की बात करे तो ये दो तरह की होती है। एक तो ट्रेडिशनल और दूसरी जेस्टेशनल होती है।

ट्रेडिशनल सरोगेसी..

सबसे पहले हम ट्रेडिशनल सरोगेसी की बात करते है। इस प्रक्रिया में पिता का स्पर्म उस महिला के एग्स से मैच करवाया जाता है जो सरोगेट मदर बन कर बच्चे को पैदा करने वाली होती है। अगर हम साफ शब्दों में कहे तो इस प्रक्रिया में बच्चे का जैनिटक संबंध केवल पिता से ही होता है, माता से नहीं। जब कि दूसरी प्रक्रिया में ऐसा नहीं होता।

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जेस्टेशनल सरोगेसी..

इस प्रक्रिया में माता पिता के स्पर्म और एग्स का मैच टेस्ट ट्यूब के द्वारा करवाने के बाद इसे सरोगेट मदर बनने वाली महिला के यूट्रस में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। यानि इस प्रक्रिया में बच्चे का संबंध सिर्फ पिता से ही नहीं बल्कि माता से भी होता है। इस पद्धति में सरोगेट मदर को दवाईयां खिलाकर अंडाणु विहीन चक्र में रखना पड़ता है, जिससे बच्चा होने तक उसके अपने अंडाणु कभी भी न बन सके।

सरोगेसी की प्रक्रिया (Surrogacy Process) :

सरोगेसी की प्रक्रिया में सबसे पहले निसंतान दंपति, जो बार-बार गर्भपात या आईवीएफ(IVF)के फेल होने पर ही इस तकनीक या साधन का उपयोग कर सकते हैं। इसके बाद एक अस्पताल और डॉक्टर की परमिशन से ही इस तकनीक का प्रयोग किया जा सकता है। अस्पताल और डॉक्टर की मदद से ही सरोगेसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाता है।

सरोगेसी में अपनी संतान की चाहत रखने वाले दंपति एक अन्य मानसिक और शारीरिक स्वस्थ महिला को इस प्रक्रिया के लिए चुना जाता है। जिसमें उसे पुरूष के स्पर्म को अपने गर्भ (कोख) में 9 महीनों तक रखना होता है। 9 महीने बाद बच्चे के जन्म के बाद जहां निसंतान दंपति को संतान मिलती है, तो वहीं सरोगेसी करने वाली महिला को पहले से तय की गई एक निश्चत राशि दी जाती है। Surrogacy And Its Process

Surrogacy And Its Process
Surrogacy And Its Process

सरोगेसी को अपनाने के कारण :

  • अगर आप संतान सुख पाना चाहते हैं लेकिन किसी कारणवश उसे प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो आप सरोगेसी का चयन कर सकते हैं। आप निम्नलिखित स्थितियों में इसे करा सकते हैं-
  • अगर आप ऐसे दंपत्ति हैं, जिनकी महिला साथी की बच्चेदानी में कोई दिक्कत है, उसका बार-बार गर्भपात हुआ है या फिर आईवीएफ बार-बार असफल हो चुका है।
  • अगर आप अविवाहित पुरूष हैं और अपनी संतान चाहते हैं।
  • अगर आप समलैंगिक दंपत्ति हैं।

सरोगेट मदर क्या होती है? (Surrogate Mother in Hindi)

सरोगेसी प्रक्रिया पूर्ण रूप से उस महिला पर निर्भर करती है, जो अपनी कोख में नि:संतान दंपत्ति की संतान को पालती है और उसे जन्म देने के बाद उन्हें सौंप देती है। उस महिला को “सरोगेट मदर” कहा जाता है।

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सरोगेट मदर की विशेषताएं –

उसकी उम्र 21 से 38 के बीच की होनी चाहिए
वह महिला पूर्ण रूप से सेहतमंद होनी चाहिए, ताकि इस दौरान होने वाले तमाम परिवर्तनों का सामना कर सके।
उसके खुद के बच्चे हो, ताकि वह इस कार्य को बेहतर तरीके से कर सके।
आईसीएमआर के दिशा-निर्देश के अनुसार वह अपने जीवन में तीन से अधिक बार सरोगेट मदर न बनी हो क्योंकि इससे उसे भी कुछ परेशानी हो सकती है।
वह भावनात्मक और मानसिक रूप से मौजूद हो क्योंकि उसे बच्चे को जन्म देने के बाद दूसरे लोगों को सौंपना होता है।

सरोगेट फादर क्या होता है? (Surrogate Father in Hindi)

सरोगेट फादर का अर्थ उस व्यक्ति से है, जो बॉयोलाजिकल, गोद या सौतला पिता नहीं होता है लेकिन जो सरोगेसी प्रक्रिया में पिता की भूमिका निभाता है। यह महिला का रिश्तेदार, अंकल, प्रेमी, परिवार का दोस्त या ऐसा कोई पुरूष हो सकता है, जो अजन्मे बच्चे को पिता का प्यार देता है, उसका मार्गदर्शन करता है और उसे वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

सरोगेसी के लाभ और नुकसान :

इन दिनों सरोगेसी काफी लोकप्रिय प्रक्रिया बन गई है और इसके माध्यम से बहुत सारे लोगों की जिदगी में किलकरियां गूंजी हैं। यह एक मात्र ऐसी प्रक्रिया है, जिसका उपयोग आम नागरिक से लेकर नामचीन हस्तियों ने भी किया है। इसके अपने कायदे-कानून हैं, जिसका पालन हर उस व्यक्ति को करना होता है, जो इसे अपनाता है।

जिस तरह से हर सिक्के के दो पहलू होते हैं उसी तरह से इस प्रक्रिया के भी दो पहलू- लाभ और हानि है, जिसके बारे में जानना उतना ही जरूरी है,जितने इस पूरी प्रक्रिया के बारे में जानना। तो आइए, इस बात को समझते हैं कि सरोगेसी के कौन-कौन से लाभ और हानि होते हैं-

Surrogacy And Its Process
Surrogacy And Its Process

सरोगेसी के लाभ –

  • यह नि:संतान दंपत्ति के लिए सबसे बड़ा वरदान है।
  • जब कोई महिला इस प्रक्रिया से जुड़कर सरोगेट मदर बनती है, तो उसे इस बात पर गर्व होता है कि उसने किसी दूसरे की जिदगी को खुशियों से भरा है।
  • सरोगेट मदर इस प्रक्रिया के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार सकती है।
  • गर्भावधि सरोगेसी प्रक्रिया में दंपत्ति खुद के बच्चे को पा सकते हैं क्योंकि इसमें उनके एग और स्पर्म को मिलाकर उन्हें सरोगेट मदर के गर्भाशय में डाला जाता है।

सरोगेसी की मुख्य नुकसान –

  • सरोगेट मदर बनना काफी मुश्किल होता है, यह शारीरिक और भावनात्मक समस्या को उत्पन्न करता है। उदाहरण के लिए हॉर्मोन इंजेक्शन नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।
  • कुछ महिलाओं पर अत्याचार किए जाते हैं और उन्हें सरोगेट मदर बनने के लिए मजबूर किया जाता है।
  • कई बार सरोगेट मदर बच्चे को जन्म देने के बाद उसे दंपत्तियों को देने से मना कर देती है, ऐसे में उन दंपत्तियों और सरोगेट मदर को कानूनी कार्यवाही से गुजरना पड़ता है।
  • सरोगेसी काफी महंगी प्रक्रिया होती है, जिसमें काफी सारे टेस्ट, दवाईयां, मेडिकल बिल, सरोगेट मदर के खर्चे इत्यादि खर्चे शामिल होते हैं और इन सभी का खर्चा दंपत्ति को उठाना पड़ता है। अत: उन्हें इसके लिए काफी पैसों की जरूरत होती है।

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भारत में सरोगेसी (Surrogacy in India) :

सरोगेसी पहले भारत के लिए एक अनजान तकनीक थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से सरोगेसी में काफी उछाल देखा गया है। सरोगेसी की शुरूआत सबसे पहले गुजरात से हुई थी। जहां एक 65-70 साल की महिला ने अपनी बेटी के बच्चे को 9 महीने कोख में रखने के बाद जन्म दिया था। सरोगेसी तकनीक या प्रक्रिया का भारत में धीरे-धीरे दुरूपयोग और व्यवासायिककरण बढ़ गया। सरोगेसी तकनीक के जरिए आम लोगों के साथ ही आमिर खान, शाहरूख खान, करन जौहर, तुषार कपूर आदि बॉलीवुड के कई सेलेब्स भी संतान सुख ले चुके हैं।

सरोगेसी के लिए क़ानूनी नियम :

भारत में सरोगेसी करवाना दुनिया के अन्य देशों की तुलना में बेहद सस्ता और आसान है। इस वजह से अब भारत प्रजनन पर्यटन के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (Indian medical research council) ने साल 2002 में सरोगेसी को जरूरी दिशा-निर्देशों के साथ कानूनी वैधता दे दी थी। जबकि 2008 में सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले तिजारती नामक महिला को सरोगेसी की परमिशन दी थी। भारत में लगभग 3000 से अधिक सरोगेसी क्लीनिकों काम कर रहे हैं। जिनके मुताबिक सरोगेसी व्यवसाय की कीमत 400 मिलियन अमरीकी डॉलर से भी अधिक है।

Surrogacy And Its Process

इस तकनीक के दुरूपयोग को नजर में रखते हुए भारत देश में इस तकनीक के प्रति कुछ नियम भी लागू किए गए है। बता दे कि जो महिलाएं आर्थिक तंगी से जूझ रही होती है, ज्यादातर वही महिलाएं पैसों के लिए अपनी कोख किराये पर देती है। मगर सरकार की तरफ से इस किस्म की कॉमर्शियल सरोगेसी पर रोक लगा दी गई है।

सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2019 के तहत कई क़ानूनी नियम बनाये गए थे। इन नियमों के तहत सरोगेसी का इस्तेमाल केवल तभी किया जाएगा, जब किसी विवाहित कपल को माता पिता बनने के लिए इस तकनीक की ज्यादा जरूरत हो। वही दूसरी तरफ विदेशियों, सिंगल पैरेंट, तलाकशुदा दम्पति आदि सब के लिए सरोगेसी के रास्ते बंद कर दिए गए है।

सरोगेसी रेगुलेशन बिल की खासियत :

  1. व्यवासायिक सरोगेसी पर प्रतिबंध।
  2. सिंगल, अविवाहित पुरुष या महिला, समलैंगिक, लिव इन में रहने वाला जोड़ा सरोगेसी के लिए आवेदन नही कर सकता ।
  3. केवल 25 से 35 साल की महिला ही सरोगेट बन सकती है। करीबी रिश्तेदार होना जरूरी।
  4. सरोगेट माँ बनने के लिए महिला का विवाहित और एक बच्चे की मां होना जरूरी।
  5. अंडाणु या स्पर्म देने पर प्रतिबंध।
  6. सरोगेसी के बदले धन देने या मौद्रिक लाभ नहीं दिया जा सकेगा। इसे केवल परोपकार माना जाएगा।
  7. सरोगेसी के लिए बनाए गए प्रावधानों का उल्लंघन करने पर बिल में 10 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

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सरोगेसी का खर्च (Surrogacy Cost) :

भारत में सरोगेसी की अनुमानित लागत लगभग $ 20,000 और $ 30,000 के बीच होती है। जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखा जाए, तो अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया ($120,000 से), कनाडा, रूस और यूक्रेन जैसे देशों की तुलना में बेहद सस्ता है। हालांकि सरोगेसी में शामिल लोगों को कुल खर्च का केवल ($ 5,900-9,400) डॉलर ही मिल पाता है। यहां ये बात ध्यान देने वाली है, कि देश में कुल जनसंख्या का तीसरा हिस्सा गरीबी रेखा के नीचे रहता है। Surrogacy And Its Process

सरोगेसी की मदद से माता पिता बन चुके है ये बॉलीवुड कलाकार :

इसके साथ ही जो महिला सरोगेट मदर बनने वाली है वह पूरी तरह से स्वस्थ होनी चाहिए, तभी वह सरोगेट मदर बन सकती है। बता दे कि जो कपल सरोगेसी के द्वारा माता पिता बनने वाले होते है, उनके पास भी इस बात का सबूत होना चाहिए कि वो इनफर्टाइल है। अब यूँ तो शिल्पा शेट्टी के इलावा शाहरुख़ खान, आमिर खान, तुषार कपूर, करण जौहर, एकता कपूर और सोहेल खान आदि सब प्रसिद्ध कलाकार सरोगेसी का सहारा लेकर ही पेरेंट्स बने है।

मगर इसमें कोई शक नहीं कि इस तकनीक के जरिए उन आम लोगों का सपना भी पूरा होता है जो माता पिता बनने की इच्छा रखते है और बच्चा पैदा करने में असमर्थ होते है। अब तो आप समझ गए होंगे कि सरोगेसी क्या होती है और इस तकनीक का इस्तेमाल क्यों किया जाता है।

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