बच्चों के बिस्तर गीला करने के कारण, लक्षण और उपाय

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छोटे बच्चों का बिस्तर पर पेशाब कर देना आम बात होता है, लेकिन बड़े बच्चों का ऐसा करना अटपटा होता है. अगर माता-पिता में से किसी को भी बचपन में यह समस्या थी तो बच्चों में इस समस्या के होने की आशंका 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है Treatment of Bed wetting

वहीं जिन बच्चों के माता-पिता बचपन में बिस्तर गीला नहीं करते थे, उनमें इस समस्या के होने की आशंका मात्र 15 प्रतिशत होती है. अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं तो हम आपको कुछ ऐसे घरेलू नुस्खों के बारे में बताएंगे, जिन्हें अपनाने से बच्चे की ये आदत छूट सकती है.

आमतौर पर कई बच्चों को बिस्तर पर पेशाब करने की आदत होती हैं । बच्चा छोटा हो तो इसे हम अक्सर ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते हैं। लेकिन कई बार ये समस्या बढ़ती उम्र के बच्चों में भी देखी जाती हैं, जिससे कारण दूसरी जगह हमें शर्मिंदा होना पड़ता हैं ।

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माता-पिता बच्चे को इसके लिए डांटते भी हैं, लेकिन बच्चा उनके व्यवहार को समझ नहीं पाता। यह एक आम बात हैं और बच्चा चाहकर भी कुछ नहीं कर पाता हैं। अगर बच्चा बिस्‍तर पर पेशाब कर देता है तो उसे कभी ना डाटें। कोई बच्चा जानबूझ कर बिस्तर पर पेशाब नहीं करता। 

नॉकटर्नल एनुरेसिस :

रात में बिस्तर गीला करने की समस्या को चिकित्सीय भाषा में नॉकटर्नल एनुरेसिस कहते हैं. यह समस्या पांच साल तक के बच्चों में अक्सर देखी जाती है, लेकिन कईं बच्चों में पांच साल के बाद भी यह समस्या बनी रहती है.

कुछ बच्चों का तो किशोर उम्र तक ब्लैडर पर नियंत्रण विकसित नहीं हो पाता. हालांकि अधिकतर मामलों में नॉकटर्नल एनुरेसिस की समस्या अपने आप ठीक हो जाती है और उपचार की आवश्यकता नहीं होती,

लेकिन कुछ मामलों में उपचार जरूरी हो जाता है. वैसे यह गंभीर समस्या नहीं है, लेकिन बच्चे और माता-पिता दोनों के लिए यह एक तनावपूर्ण स्थिति होती है.

Treatment of Bed wetting
Treatment of Bed wetting

नॉकटर्नल एनुरेसिस की समस्या के प्रकार :

प्राइमरी एनुरेसिस –

इसमें बच्चे का ब्लैडर पर नियंत्रण नहीं होता और वो हमेशा बिस्तर गीला कर देता है.

सेकंडरी एनुरेसिस –

जब बच्चों का कभी ब्लैडर पर नियंत्रण रहता है, कभी नहीं रहता तो इसे सेकंडरी एनुरेसिस कहते हैं. अगर किशोरावस्था में आपके बच्चे को यह समस्या है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं.

इस उम्र में इसका कारण युरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, न्युरोलॉजिकल समस्या (मस्तिष्क से संबंधित), तनाव या कोई और स्वास्थ्य समस्या हो सकती है.

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क्या है कारण :

बिस्तर पर पेशाब करने वाले बच्चों में आर्जीनीन वैसोप्रेसिन हार्मोन का स्तर नींद में नीचे चला जाता है, जो किडनी के द्वारा मूत्र निर्माण की प्रक्रिया को धीमा करता है. चूंकि नींद में इस हार्मोन का स्तर नीचे चला जाता है, इसलिए मूत्र निर्माण की प्रक्रिया तेज हो जाती है और मूत्राशय तेजी से भर जाता है. अगर बच्चा 6 वर्ष की आयु के बाद भी बिस्तर गीला करता हैं तो इसका कारण जानना आवश्यक हैं.

  • बच्चों के पेट में कीड़े होना
  • नींद में पेशाब करने के सपने देखने के कारण
  • पारिवारिक इतिहास (family history)
  • हार्मोन्स की गड़बड़ी से
  • डायबीटीज़ (टाइप 1) के कारण
  • ब्लैडर(urinary-bladder) की मसल्स कमजोर होने के कारण
  • कब्ज के कारण
  • डर या तनाव के कारण
  • नींद में पेशाब करने के सपने देखने के कारण
  • किसी बीमारी के कारण
  • किसी दवा के साइड इफ़ेक्ट के कारण
  • गहरी नींद के कारण
  • मौसम की वजह से – जैसे की सर्दी और बरसात के शुरुआत में

बच्चों के बिस्तर पर पेशाब करने के लक्षण :

अगर आपका बच्चा एकदम से बिस्तर गीला करना शुरू कर दे और यह सिलसिला लंबे समय तक जारी रहे तो यह खतरे की घंटी हो सकती है.

  • बच्चे का खर्राटा लेना,
  • अधिक खाना-पीना,
  • पेशाब में जलन,
  • पैरों और एड़ी में सूजन,
  • सात साल या उससे अधिक होने पर भी बिस्तर का गीला करना आदि तमाम ऐसे लक्षण हैं, जिसमें बिना देरी किए डॉक्टरी सलाह लेना बेहद जरूरी है.

बेडवेटिंग के उपाए :

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रात में ना पिलाएं ज्यादा पानी –

सोने जाने से पहले बच्चे के तरल पदार्थ पर किया गया नियंत्रण आपके लिए खासा कारगर हो सकता है. ऐसा करने के लिए आप बच्चे के शरीर की पानी की जरूरत को समय के हिसाब से बांट दें ताकि पानी की कमी न होने पाए.

पानी की जरूरत का लगभग 40 फीसदी तरल पदार्थ सुबह और 40 फीसदी दोपहर में दें. शाम के लिए 20 फीसदी ही रखें. साथ ही सोने जाने के दो घंटे पहले से ही तरल पदार्थ का सेवन बंद करवा दें. रात का खाना भी जल्दी खिला दें.

अलार्म का ले सहारा –

बच्चा रात में बिस्तर गीला करता है तो इससे बचने के लिए अलार्म का सहारा ले सकते है. इसके लिए आपको उसके दिन में पेशाब करने का औसत निकालना होगा. वह जितने घंटे के अंतराल में पेशाब करता है,

Treatment of Bed wetting
Treatment of Bed wetting

उसके हिसाब से अलार्म लगाएं और रात में उतने अंतराल पर बच्चे को पेशाब करवाएं. ऐसा करने से उसका बिस्तर भी गीला नहीं होगा, साथ ही उसकी आदत में भी सुधार होगा. आपको कुछ समय तक लगातार यह तरीका अपनाना होगा.

इन चीजों का करें परहेज –

रात के समय अपने बच्चे को कुछ चीजों से परहेज कराने से भी इस बीमारी से राहत मिल सकती है. अपने बच्चे को कैफीन यानी चॉकलेट वाले दूध का सेवन नहीं कराएं. वहीं आर्टिफिशियल फ्लेवर, रंग खासतौर पर लाल रंग, खट्टे फलों के जूस व मिठाई आदि से भी इस दौरान बच्चे को दूर रखें.

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बेडवेटिंग के घरेलू उपाय :

  • सोने से दो घंटे पहले बच्चे को एक कप गुनगुने दूध में एक चौथाई चम्मच जायफल घिसकर पिलाना चाहिए.
  • प्रतिदिन सुबह में खाली पेट ठंडे दूध में एक चम्मच शहद मिलाकर बच्चे को पिलाने से बिस्तर पर पेशाब नहीं करते.
  • अगर आपका बच्चा रोज रात में बिस्तर गीला कर देता है तो दिन में दो से तीन केले खिलाएं, इससे समस्या दूर होगी.
  • बच्चे को रोजाना सोने से पहले तीन से चार अखरोट खिलाने से भी रात में सोते समय बिस्तर पर पेशाब करने की आदत से छुटकारा मिलेगा.
  • बच्चे को रात में सोने से पहले एक कप गुनगुने पानी में एक चम्मच पिसी अजवाइन घोलकर पिलाएं.
  • ठंड के मौसम में बच्चों के बिस्तर गीला करने की आदत छुड़वाने के लिए बच्चे को दिन में दो बार एक चम्मच पिसी दालचीनी में एक चम्मच शहद मिलाकर दें.
  • सुबह में अपने बच्चे को गुड़ का एक टुकड़ा (20 ग्राम) दे दो। एक घंटे के बाद उसे 1/2 चम्मच अजवाइन में नमक (सेंधा नमक) के साथ चम्मच मिलाकर दो। इसे सप्ताह में एक बार 4 सप्ताह के लिए दोहराएं. यह आपके बच्चे को दूध पिलाने में मदद करता है और यदि वह कृमि के शिकार के कारण पलंगों में पड़ जाता है, तो यह समस्या को दूर करना चाहिए।
Treatment of Bed wetting
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बेडवेटिंग के लिए घरेलू उपचार :

कुछ घरेलू नुस्खों की मदद से आप इस समस्या से उबरने में अपने बच्चे की मदद कर सकते हैं। आप नीचे बताए गए कुछ घरेलू उपचार अपना सकते हैं :

ब्लैडर एक्सरसाइज –

मूत्राशय का कमजोर होना बिस्तर गीला करने की बीमारी एक बहुत बड़ा कारण है। ये मूत्राशय का पूरी तरह विकास न होने या आकार छोटे होने की वजह से हो सकता है। ऐसे में ब्लैडर एक्सरसाइज आपके बच्चे की मदद कर सकती है। यह एक्सरसाइज कुछ इस प्रकार हो सकती है :

जब भी बच्चा पेशाब करना चाहे तो उसे लगभग 10-15 मिनट के लिए पेशाब पर नियंत्रण रखना सिखाएं। ऐसा करने से धीरे-धीरे उनके मूत्राशय की क्षमता बढ़ने लगेगी।

इस एक्सरसाइज से शुरू में समस्या बढ़ सकती है। हो सकता है कि इस दौरान वो बार-बार अपना पायजामा गीला करे, लेकिन इस वजह से उन्हें डांटे नहीं, बल्कि संयम के साथ उसे समझाएं।

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कीगल एक्सरसाइज –

कीगल एक्सरसाइज से भी इस समस्या में कुछ सुधार हो सकता है। इसे करने के लिए बच्चे का मूत्राशय पूरी तरह खाली करवा कर उसे योग मेट पर लेटाएं। फिर उसे अपनी पेल्विक मसल्स को अंदर खीचने के लिए कहें, जैसे मूत्र और मल प्रवाह रोकने के लिए किया जाता है।

इस स्थिति में तीन से पांच सेकंड तक रहें। फिर मसल्स को ढीला छोड़ने के लिए कहें और 5 सेकंड बाद दोहराएं। इसे 10-10 बार दिन में तीन बार दोहरा सकते हैं।

दालचीनी :

बेड वेटिंग के सेकंडरी प्रकार में हमने बताया कि इसके पीछे एक कारण मधुमेह भी हो सकता है। ऐसे में आप दालचीनी का उपयोग कर सकते हैं। यह शरीर में इंसुलिन के प्रभाव को बेहतर करती है और ब्लड ग्लूकोज के स्तर को कम करके मधुमेह से आराम दिलाने में मदद कर सकती है। आप बच्चे के दूध, आइसक्रीम, सरेलेक या चोकोस के ऊपर दालचीनी पाउडर डाल कर उसे खिला सकते हैं।

क्रैनबेरी जूस :

यूरिनरी ट्रैक्ट संक्रमण मूत्राशय पर नियंत्रण न होने का कारण हो सकता है और इस बारे में आपने बेड वेटिंग के कारणों में जाना। यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन का इलाज करने के लिए आप बच्चे को क्रैनबेरी जूस का सेवन करवा सकते हैं।

इसमें एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया को खत्म करते हैं और आपको समस्या से राहत पाने में मदद कर सकते हैं। इसके खट्टे-मीठे स्वाद की वजह से बच्चा इसे पीना जरूर पसंद करेगा। इसे आप बच्चे को नाश्ते के साथ या शाम को स्नैक्स के साथ दे सकते हैं।

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सेब का सिरका :

अगर बच्चे को नींद में पेशाब करने की बीमारी यूरिनरी ट्रैक्ट संक्रमण की वजह से है, तो सेब का सेवन करने से भी इस समस्या से आराम पाया जा सकता है। शोध में पाया गया है कि इसमें कई प्रकार के एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, जो संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया से लड़ते हैं और उन्हें पनपने से रोकते हैं।

इसका उपयोग करने के लिए आप एक गिलास पानी में सेब का सिरका मिलाकर बच्चे को पिला सकते हैं। आप चाहें तो स्वाद बढ़ाने के लिए उसमें एक चम्मच शहद भी मिला सकते हैं। इस प्रयोग को शाम को या नाश्ते के बाद किया जा सकता है।

Treatment of Bed wetting

आंवला :

मधुमेह और कब्ज की वजह से हो रही सेकंडरी बेड वेटिंग के लिए आंवला का उपयोग करना लाभकारी साबित हो सकता है। इसमें एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं, जो मधुमेह को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। इसके उपचार के लिए आप बच्चों को साबुत आंवला खिला सकते हैं या नाश्ते के बाद उन्हें एक चम्मच आंवला का जूस पिला सकते हैं।

शहद :

बच्चों में कब्ज की समस्या को दूर करने के लिए शहद का भी उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए आप एक गिलास पानी में एक चम्मच शहद मिला कर बच्चे को सुबह खाली पेट पिला सकते हैं। इसके अलावा, आप बच्चे को रात को सोने से पहले भी लगभग 5 ml शहद चटा सकते हैं।

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सरसों के बीज :

मूत्राशय पर नियंत्रण न रहना, कई बार बच्चों में किसी संक्रमण की तरफ इशारा हो सकता है। ऐसे में, बच्चों को सरसों का सेवन करवाने से फायदे मिल सकते हैं। सरसों में एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं, जो संक्रमण फैलाने वाले जीवाणु को नष्ट कर सकते हैं और बच्चे को संक्रमण व बेड वेटिंग से आराम दिलवा सकते हैं।

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