आखिर क्यों भगवान गणेश को कहा जाता है ‘मोरया’

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भगवान श्री गणेश को मनोकामना पूर्ण करने वाला कहा गया है। ये सभी देवों में प्रथम पूज्य हैं, यही नहीं भगवान श्री गणेश का पूजन मंगलकारी होता है। ये भक्तों को बुद्धि और विद्या प्रदान करने वाले हैं। गणेश उत्सव के आखिरी दिन जब गणेश जी की प्रतिमा विसर्जित की जाती है तो हर किसी की आंखों में आंसू और होठों पर एक ही जयकारा ‘गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ती मोरया’ का उद्घोष होता रहता है. Unknown Facts About Ganesha

कहते हैं कि सच्ची श्रद्धा से पूजा करने पर भगवान गणेश अपने भक्तों के सारे कष्टों को हर लेते है और उनके जीवन में खुशियां भर देते है। क्या आपको पता है कि ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे क्यों लगाए जाते हैं. इस जयकारे की शुरुआत कब से हुई? तो चलिए हम आपको बताते हैं इस जयकारे के पीछे की कहानी। हैं.

इससे पहले आज हम आपको भगवान गणेश जी के कुछ ऐसे रहस्यों के बारे में बताएंगे जिसके बारे में शायद ही आप जानते हों। इसमें सबसे पहले हम आपको बताना चाहेंगे कि किस रंग के गणेश भगवान् की मूर्ती के दर्शन या ध्यान करने से क्या लाभ देती है

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गणेश जी के हल्दी रंग का महत्व –

जब कोई व्यक्ति आपको नुकसान पहुंचाना चाहता हो, तो ऐसे में आप ओम हरिद्रा गणपतये नमः मंत्र का उच्चारण (108 बार) करें और साथ ही गणेश जी के हल्दी रंग वाले रूप का ध्यान करें।

ऐसा करके आप अपने ऊपर आने वाली मुसीबत से मुक्त हो सकते हैं और जो व्यक्ति आपको नुकसान पहुंचाना चाहता है उसे ऐसे करने से रोक सकते हैं। गणेश जी के इस मंत्र की ऊर्जा का प्रवाह आपको नुकसान नहीं होने देगा।

लोहित रंग के गणपति जी का महत्व –

जब आप लोगों को अकर्षित करना चाहते हैं या आप किसी व्यक्ति के भले के लिए बिना उसका कोई लाभ उठाए प्रयास करते हैं तो आपको लोहित रंग के गणपति का ध्यान करना चाहिए। इसके साथ ही ओम विजय गणपतये नमः मंत्र का जाप करना चाहिए।

ऐसा करने से यह दैदिप्यमान ऊर्जा उस व्यक्ति तक पहुंचेगी। लेकिन इस शक्ति का दुरुपयोग न करें। दुरुपयोग किए जाने पर यह शक्ति प्रयोग करने वाले व्यक्ति को नुकसान पहुंचाएगी।

गहरे रंग के गणेश जी का महत्व –

नकारात्मकता, घृणा, राक्षसी अहंकार, आंतरिक या बाहरी शत्रुओं के शमन के लिए आपको गहरे रंग के गणेश का ध्यान करना चाहिए। इसके साथ ओम उच्छिष्ट गणपतये नमः मंत्र का जाप करें।

भूरे रंग के गणपति का महत्व –

घर से भूत-प्रेत, नकारात्मक शक्ति को निकालने के लिए या फिर किसी व्यक्ति के शरीर से प्रेतात्मा के निष्कासन के लिए भूरे रंग के गणपति का ध्यान करें। इसके साथ ओम शक्ति गणपतये नमः मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से आपको राहत मिलेगी साथ ही गणपति जी का आर्शीवाद भी प्राप्त होगा।

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बुधवार को गणेश पूजा है लाभकारी :

हिन्दू धर्म में भगवान गणेश को सर्वश्रेष्ठ स्थान दिया गया है। प्रत्येक शुभ कार्य में सबसे पहले भगवान गणेश की ही पूजा की जाती है। देवता भी कार्य करने से पहले गणेश जी की पूजा करते हैं। बुध को ग्रहों का राजकुमार माना जाता है और उनके अधिपति देवता भगवान गणेश जी हैं।

बुध को बुद्धि, वाकपटुता, कला, निपुणता, विचार, चरित्र, विद्या का कारक माना गया है। इन सभी चीजों पर अधिपत्य गणपति जी का है, इसलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए बुधवार के दिन उनकी विशेष रूप से पूजा की जाती है ।

गणेश जी को विघ्नहर्ता कहते हैं और इनका शुभ दिन बुधवार माना गया हैं। बुधवार के दिन गणेशजी की उपासना से व्यक्ति का सुख-सौभाग्य बढ़ता है और सभी तरह की रुकावटे दूर होती हैं।

Unknown Facts About Ganesha
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इस वजह से गणेशजी को बोलते हैं मोरया :

ये कहानी है एक भक्‍त और भगवान की, जहां भक्‍त की भक्ति और आस्था के कारण भक्त के साथ हमेशा के लिए जुड़ गया भगवान गणेश का नाम| गणपति के इस जयकारे की जड़ें चिंचवाड़ गांव से जुड़ी हैं| चौदहवीं सदी में एक संत हुए, जिनका नाम मोरया गोसावी था|

कहते हैं भगवान गणेश के आशीर्वाद से ही मोरया गोसावी का जन्म हुआ था और मोरया गोसावी भी अपने माता-पिता की तरह भगवान गणेश परम भक्त थे|

हर साल गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर मोरया चिंचवाड़ से मोरगांव गणेश जी की पूजा करने के लिए पैदल जाया करते थे| लेकिन कुछ सालों बाद बढ़ती उम्र की वजह से उन्हें मोरगांव जाने में दिक्कत होने लगी और फिर एक दिन गणेश जी ने इनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मोरया को सपने में दर्शन दिए और कहा कि तुम्हें मेरी मूर्ति एक नदी में मिलेगी जिसे तुम उठा लेना|

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ये सुनकर मोरया गोसावी बहुत प्रसन्न हुए और सुबह उठते ही नदी में स्नान के लिए चले गए और इसी दौरान उन्हें गणेश जी की मूर्ति नदी में मिली| इसके बाद मोरया ने उस मूर्ति को स्थापित कर वहां मंदिर बनवाया|

भगवान गणेश के सपने में आने वाली खबर जैसे ही लोगों को पता चली तो लोग दूर-दूर से मोरया गोसावी के दर्शन के लिए आने लगे। मोरया गोसावी के भक्तों को मंगलमूर्ति के नाम से बुलाया जाता था। यही कारण है कि गणपति बप्पा मोरया और मंगलमूर्ति मोरया का ये जयकारा लगाया जाता है।

मोरया काफी समय तक गणपति की भक्ति में लीन रहे और फिर एक दिन इन्होंने वहां पर ज़िंदा समाधि ले ली| तभी से गणपति के साथ मोरया का नाम जुड़ गया और सब लोग गणपति बप्पा मोरया का जयकारा लगाने लगे|

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भगवान गणेश जी के कुछ अनसुने रहस्य :

  • भगवान गणेश की ‘रिद्धि और सिद्धि‘ नाम की दो पत्नियां है, साथ ही दो पुत्र भी हैं जिनका नाम ‘शुभ और लाभ‘ है।
  • धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि गणेश की एक बहन भी थीं जिसका नाम अशोक सुन्दरी था।
  • भगवान गणेश को लाल रंग के फूल बहुत पसंद हैं।
  • गणेश जी को दूब या ‘दुर्वा‘ घास बहुत पसंद हैं। गणेश पूजन में दूब का इस्तमाल किया जाता है।
  • गणेश पूजन में जब तक उन्हें मोदक का प्रसाद नहीं चढ़ता तब तक उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है, क्योंकि यह इनका प्रिय भोग है।
  • गणपति जी के बड़े बड़े कानों का रहस्य है कि वह सबकी सुनते हैं पर निर्णय अपनी बुद्धि से लेते हैं। बड़े कान इस ओर भी इशारा करते हैं कि बुरी बातों को त्याग कर अच्छी बातों को अपने कानों में डालना चाहिए।
  • गणपति जी की लम्बी सूंड दूर से ही आने वाली परेशानियों को पहचान लेती है, जिससे उन्हें आने वाले संकट का पहले से ही पता चल जाता है।
  • टूटा दाँत उनकी बुद्धिमत्ता का प्रतीक माना जाता है। इसी दांत से उन्होंने महाभारत लिखी थी।

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गणपति पूजा में तुलसी क्यों वर्जित है :

गणेश जी विवाह से बचने के लिए तपस्या कर रहे थे। तभी तुलसी वहां आईं और गणेश जी की तपस्या भंग करने लगीं। जैसे ही गणेश जी की तपस्या भंग हुई तो उन्होंने क्रोध में आकर तुलसी को श्राप दिया कि अगले जन्म में तुम एक पौधा बनोगी और एक असुर से तुम्हारा विवाह होगा।

इसे सुनकर तुलसी को भी गुस्सा आ गया और उसने भी गणेश जी को श्राप दिया कि जिस फल को प्राप्त करने के लिए तुम ये तपस्या कर रहे हो, वह पूरा ना हो और तुम्हारी जल्द ही दो शादियां हों। इसलिए गणपति जी की पूजा में तुलसी नहीं चढ़ाई जाती।

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