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तो इसलिए बिहार के लोगों के सबसे ज्यादा आते हैं UPSC में नंबर

भारत में संघ लोक सेवा आयोग के जरिए आयोजित की जाने वाली सिविल सर्विस परीक्षा को सबसे अध‍िक मुश्क‍िल माना जाता है. इस परीक्षा में आईएएस बनने के लिए छात्र टॉप रैंकर्स कैसे बनते हैं, इसका फिक्स फॉर्मूला तो अब तक किसी को नहीं मिला, लेकिन माना जाता है कि कुछ राज्य ऐसे हैं जिन्होंने इस फॉर्मूले को क्रैक कर लिया है. अगर इस परीक्षा के पिछले आकंड़ों पर गौर किया जाए तो मालूम होगा कि इस परीक्षा में पास होने वाले सबसे ज्यादा लोग बिहार से आते हैं. आईएएस परीक्षा में टॉपर्स को पैदा करने में बिहार पहले नंबर पर दिखाई देता है. दूसरे शब्दों में कहा जाए तो बिहार पिछड़ेपन और अभावग्रस्त राज्य होने के साथ आईएएस की फैक्ट्री कहा जाता है. लेकिन क्या इस राज के बारे में आप जानते हैं कि देश की सबसे कठिन परीक्षा में बिहार कैसे आगे है…? आइए जानते हैं…

इतिहास :

कहने को बिहार पिछड़े राज्यों में आता है लेकिन इसकी मेधा का लोहा पूरी दुनिया ने माना है. शून्य का आविष्कार करने वाले आर्यभट्ट हों या अर्थशास्त्र के प्रणेता चाणक्य. दुनिया को शांति का पाठ पढ़ाने वाले महात्मा बुद्ध हों या शिक्षा का संदेश देने वाला नालंदा विश्वविद्यालय. इन सब पर बिहारियों को नाज है. इन सब के तार बिहार से ही जुड़े हैं. ऐसे में इतिहास को देखते हुए इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिहार के लोगों में शिक्षा को लेकर पुराने समय से ही जागरूकता रही है. वहीं यहां शिक्षा ग्रहण करने के साथ ही चीजों को अच्छे से समझने का गुण भी विकसित किया जाता है.

गरीबी :

बिहार में आज भी शिक्षा का प्रतिशत मात्र 50 फीसदी के आस पास है और मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. वहीं राज्य के करीब 25 लाख युवा बेरोजगार हैं. ऐसे में यहां के लोग गरीबी को काफी नजदीक से देख चुके होते हैं. इस गरीबी से पार पाने के लिए बिहार के लोगों में अंदर से कुछ कर गुजरने का जुनून सवार रहता है. इसके लिए बिहार के लोग सिविल परीक्षाओं पर ज्यादा फोकस देते हैं और पूरे भारत में परचम लहराचे हैं.

राजनीति की समझ :

बिहार के राजनीतिक परिदृश्य की बात करें तो यहां से काफी संख्या में राजनीति के चमकते चेहरे केंद्र और राज्य सरकार का हिस्सा हैं. बिहार की राजनीति देश का मिजाज तय करती रही है. वहीं ऐसा माना जाता है कि बिहार के लोगों के खून में राजनीति बसी होती है. ऐसे में भारतीय प्रशानिक सेवा के लिए होने वाली परीक्षा को भी बिहार के लोग राजनीतिक समझ होने के कारण आसानी से पार कर देते हैं. इसलिए तो बिहारी भारतीय प्रशासिक सेवा की रीढ़ की हड्डी कहे जाते हैं.

आइएएस का सपना :

अगर हम दूसरे राज्यों की तुलना करें तो बिहार में एक अभिभावक अपने पैसे इधर-उधर खर्च करने में कतराता है. बिहार का एक किसान भी चाहता है कि उसका बेटा या बेटी पढ़ लिखकर आइएएस या आइपीएस बने. बिहार में मां-बाप अपना पेट काटकर भी बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहते हैं. वहीं बिहार का हर रिक्शावाला भी अपने बेटे या बेटी को आइएएस बनाने का सपना देखता है.

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