तो इस वजह से चेतन भगत की किताबों के नाम में जड़े होते हैं नंबर

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चेतन भगत का जन्‍म दिल्‍ली में एक पंजाबी परिवार में हुआ. इनके पिता आर्मी में ऑफीसर और मां कृषि विभाग में सरकारी पद पर थीं. चेतन की शादी तमिल ब्राह्मण अनूषा सूर्यानारायणन से हुई. इन सबके बीच चेतन एक लेखक. एक ऐसे लेखक जिनकी हर कहानी में समाज के लिए एक नया संदेश निहित होता है. अब तक की उनकी चार कहानियों को बॉलीवुड ने चुना दर्शकों के लिए. इन पर बनी फ‍िल्‍मों को दर्शकों ने काफी पसंद भी किया. Story Behind Chetan Bhagat Book Titles

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e-साहित्य आजतक में भारत के मशहूर लेखक चेतन भगत ने शिरकत की. इस मंच पर चेतन भगत ने न्यूज़ एंकर से बातचीत की. उन्होंने अपनी किताबों से लेकर बॉलीवुड की फिल्मों और हिंदी और अंग्रेजी साहित्य जगत के बारे में बात की. ऐसे में उनसे पूछा गया कि आखिर उनकी हर किताब में कोई ना कोई नंबर क्यों होता है?

क्यों किताबों में होता है नंबर? :

एंकर ने चेतन से पूछा कि उनकी लगभग हर किताब में कोई ना कोई नंबर है. चाहे वो 3 मिस्टेक्स ऑफ माय लाइफ हो, रेवोलुशन 2020, वन नाईट एट द कॉल सेंटर संग तमान किताबों में नंबर डालने की क्या वजह है?

Story Behind Chetan Bhagat Book Titles
Story Behind Chetan Bhagat Book Titles

इस पर चेतन ने कहा- देखिए मैं पहले इंजिनियर था. अभी भी हूं. मैंने 15-20 साल नंबर्स में बिताए हैं उन्हीं में जिया हूं. नम्बरों की दुनिया से ही मैंने आया हूं. ये मेरा ट्रेडमार्क बन गया है. मेरी लिगेसी है ये. विरासत है मेरी.

क्या फिल्मी अंदाज में किताबों को लिखते हैं चेतन? :

चेतन भगत से e-साहित्य आजतक एक दौरान पूछा गया कि उनकी किताबों की कहानी और किरदार बॉलीवुड की फिल्मों जैसे होते हैं . तो क्या वो फिल्मों को ध्यान में रखकर अपनी किताबों को लिखते हैं?

इस पर चेतन ने कहा- मेरा हीरो और हीरोइन मध्यम वर्गी भारत से होते हैं. मैं जो लिखता हूं लोग उससे रिलेट कर पाते हैं. अब तो फिल्में भी छोटे शहरों के बारे में बनती हैं. लोग उनसे भी जुड़ पाते हैं. गौरतलब है फिल्म 2 States, 3 इडियट्स, काय पो छे, हेल्लो जैसी कई फ़िल्में इन्ही के उपन्यास पर आधारित हैं

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मेरा कम्पटीशन लेखकों से नहीं :

चेतन ने बातों बातों में कहा कि मैं गालिब नहीं हूं. इस पर उनसे सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मैं नहीं हूं गालिब लेकिन ये सच है कि दुनिया को गालिब की जरूरत है. उसके लिए गालिब जरूरी है, सलमान रुश्दी भी जरूरी है, चेतन भगत भी जरूरी है और अरुंधती रॉय भी जरूरी है. मेरा कम्पटीशन दूसरे लेखकों से नहीं है. व्हाट्सएप से है, इंस्टाग्राम से है टिक टॉक से है. हम चाहते हैं कि भारत का यूथ किताब उठाएं.

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