आखिर क्यों भारतीय सेना सिर्फ जिप्सी इस्तेमाल करती है ?

क्या आपने कभी ये सोचा है क्या कि, इस तकनीक के दौर में भी जहाँ तरह-तरह के फीचर की लेटेस्ट गाड़ियाँ मौजूद है। फिर भी हमारी भारतीय सेना इस पुरानी मारुती जिप्सी को क्यों चलाती है? क्या कारण है कि, आज भी यह गाड़ी भारतीय सेना की पहली पसंद बनी हुई है? और हमारे देश के वीर इसे शौक से चलाते है। क्या आपने कभी इस बात को जानने की कोशिश की है? Why Indian Army Still Uses Maruti Gypsy

आज से करीब 15-20 साल पहले भारत में गाड़ियाँ बनाने वाली इतनी कंपनियां नहीं थी, जितनी की आज है। उस समय सिर्फ दो या तीन ही कंपनियां ही हुआ करती थी। लेकिन आज के इस तकनीक और आधुनिक दौर में भारत में भी और पूरी दुनियाँ में भी बहुत कम्पनियां है। और ये सभी बड़ी बड़ी कंपनियां भारत के लोगों को लुभाने के लिए नये-नये फीचर्स की गाड़ियाँ बनाती है। और भारत के लोग इन्हें खरीदते भी है। लेकिन भारतीय सेना में 80-90 के दशक से लेकर आज तक भारतीय सेना जिप्सी का ही इस्तेमाल ज्यादा करती है।

सन् 1985 में लॉंच हुई मारुती जिप्सी भारतीय सेना में बहुत ज्यादा इस्तेमाल होती है. सेना के लिए किसी भी वाहन का मजबूत होना, स्वाभाविक तौर पर एक जरूरी चीज़ होती है लेकिन जिप्सी के बाद काफी SUVS आ चुकी हैं, फिर भी भारतीय सेना जिप्सी को ही क्यों चुनती है – यह प्रश्न अनेक आर्मी फैन्स और कार एंथुसिऍस्ट्स (ENTHUSIAST) पूंछतें रहते हैं. यही सवाल QUORA पर भी पूछा गया था और वहा दिया गया यह एक उत्तर हर भारतीय को गौरवान्वित महसूस कराएगा.

आइये हम आज आपको बताते है कि, भारतीय सेना द्वारा मारुती जिप्सी इतनी ज्यादा क्यों पसंद की जाती है?

1) ऑफ रोड परफॉर्मन्स –

ऑफ रोड परफॉर्मन्स (सुचारू रास्ता न होने वाले क्षेत्रों में चलने की क्षमता) मुख्यतः यही वजह है कि जिप्सी को भारतीय सेना में खासा लोकप्रिय बनाती है. ऑटोकार इंडिया की रीपोर्ट के अनुसार दुर्गम रास्तो पर जिस तरह से जिप्सी चल पाती है – सिवाय अर्जुन टैंक के और कोई वाहन नही चल सकता! लोडेड जिप्सी तो उससे भी ज्यादा आरामदेय होती है.

2) वजन में हलकी –

वजन में हलकी होने के कारण जिप्सी कही भी सहजता से पहुंचाई जा सकती है – चाहे वो जहाज से भेजना हो, हेलिकॉप्टर से लटकाकर नीचे छोड़ना या फिर IL-76 तथा C-17 GLOBEMASTER सरीखे युद्धविमानों का उपयोग कर दुश्मन के अधिक्षेत्र में उतारना. इसीलिए जहां चाहे वहा जल्द से जल्द पहुचने के लिए जिप्सी एक उपयुक्त वाहन है.

3) शक्तिशाली इंजिन –

मारुती जिप्सी को युद्ध क्षेत्र के हिसाब से हलकी और दमदार बनाई गई है। यह गाड़ी पहाड़ी क्षेत्रों में भी अच्छी दौड़ती है। और रेतीलें रेगिस्तानों में भी कहीं नहीं रूकती है। इस गाड़ी में 4 सिलेंडर का इंजन लगा है, जिसका हॉर्सपावर 80 बीएचपी का है। जिप्सी का इंजिन 1298 सीसी का है, जो 80 बीएचपी की पावर जनरेट करता है – महिंद्रा बोलेरो (जो एक जाना माना नाम है ) का इंजिन 75 बीएचपी पर इतना ही पॉवर देता है.

4) कम वजन और भरपूर पावर –

इसकी वजह से जिप्सी 130+ तक की स्पीड पकड़ सकती है. और आखिर में,-भारतीय सेना को मिशन पूरा करने के लिए आवश्यकता होती है – एक मजबूत, फूर्तिला, टिकाऊ, भारी वजन (सैनिक + शस्त्र!) ले जाने वाला वाहन.
मारुती जिप्सी इन सब में खरी उतरती है.

शुरू से ही भारतीय सेना जिप्सी गाड़ी का इस्तेमाल रेगिस्तानों, सड़कों और पहाड़ी रास्तों के लिए करती आ रही है। और इस गाड़ी को हर उद्देश्य के लिए काम में लिया जाता है। इस गाड़ी में मिलिट्री सामान ले जाने की पूरी ताकत है। भारत सरकार इस गाड़ी के स्थान पर दूसरी गाड़ियाँ देने की बात तो रखती है। लेकिन इस गाड़ी की जगह अभी तक किसी ने नहीं ली है। हो सकता है, भारत सरकार दूसरी गाड़ियाँ भारतीय सेना को दे, लेकिन फिर भी यह गाड़ी अपनी जगह बनाये हुये है।

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