हिंदू धर्म में किसी के मरने और जन्म लेने के बाद क्यों मनाया जाता है सूतक

हर इंसान के जीवन में खुशी और गम आता जाता रहता है। इस दुनिया में किसी कोने में कोई खुश होता है तो वही दूसरें कोने में गमगीन। अगर हमें कोई खुशी मिलती है तो हमें लगता है कि यह पल कभी न जाए और गम हो तो सोचते है कि यह पल जल्दी से निकल जाए। गम में तो एक-एक दिन भी काटना बहुत कठिन हो जाता है। हमारे जीवन में ऐसे कई पड़ाव आते है। कोई छोटा पड़ाव होता है तो कोई गम का तो कोई खुशी का।

जिंदगी के इन्ही पड़ावों में दो पड़ाव आते है वो है जन्म और मृत्यु। हमारा जीवन जन्म के साथ शुरु होता और मृत्यु से खत्म हो जाता है। बस फर्क इतना होता है कि जन्म में खुशी वहीं मृत्यु में गम होता है।

हिंदू धर्म में जन्म और मृत्यु बहुत अधिक महत्व रखते है। हिंदू धर्म एक ऐसा धर्म है जहां पर हजारों रीति-रिवाज और परंपराएं है। जिसके कारण इस धर्म की अपनी एक पहचान है। इस परंपरा में एक है सूतक की परंपरा यानी कि किसी बच्चें के जन्म लेने और किसी व्यक्ति के मरने के बाद के वो दिन जब कोई भी शुभ काम नहीं होता है।

हमारे समाज में इससे जुड़े कई परंपराए है जैसे कि कोई शुभ काम न करना यानी कि अगर आपको कोई व्यापार करना है तो उसे इस समय में नहीं कर सकते है। इसे आप अंधविश्वास भी कह सकते है। लेकिन आप जानते है कि इसके पीछें वैज्ञानिक कारण भी है। जानिए आखिर क्यों यह सूतक मनाया जाता है।

जन्म के बाद :

हमारे समाज में जब किसी के घर में किसी का जन्म होता है तो उसके घर में 10 दिन तक सूतक और जन्म देने वाली मां के लिए एक महीने के लिए सूतक होता है। इस समय में वह महिला उसी कमरे में रहेगी जहां पर वह विश्राम करती है और वह घर के कोई काम नहीं कर सकती है साथ ही किचन में भी नहीं जा सकती है। साथ ही इस समय में घर का कोई भी सदस्य किसी भी धार्मिक कामों में भाग नहीं ले सकता है।

वह किसी मंदिर में भी नहीं जा सकता है। इसे आप अंधविश्वास का नाम भी दे सकते है, लेकिन आप जानते है कि इस पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी है। इसके अनुसार पहले के जमाने में जो परिवार होते थे। वह सयुंक्त रुप में रहते थे। जिसके कारण एक महिला के लिए अधिक काम हो जाता था। और डिलीवरी के बाद वह महिला बहुत ही कमजोर हो जाती थी। जिसके कारण उसे आराम करने की आवश्यकता होती थी। जिसे सूतक का नाम दिया गया। जिसके की वह अपने कमजोर शरीर को फिर से ठीक कर सके।

इसके साथ ही दूसरा कारण था कि बच्चें को संक्रमण से बचाना। क्योंकि जन्म से लेकर एक महीने तक एक बच्चें में प्रतिरोधक क्षमता शून्य के बराबर होती है। जिसके कराण उनको कोई भी बीमारी हो सकती है। जिसके कारण उसे बाहरी लोगों से दूर रखा जाता था। जिससे कि उसे किसी भी प्रकार का संक्रमण न हो।

आज इस सूतक को एक अंधविश्वास मान लिया गया है, लेकिन इसके पीछे जो कारण है वो है मां और बच्चें दोनों को आराम और दोनों के सेहत में अच्छा प्रभाव पड़े।

मृत्यु के बाद :

हम अपने समाज में देखते है कि आज के समय में भी जिस तरह जन्म के समय सूतक मनाया जाता है। उसी तरह किसी व्यक्ति के मरने में भी सूतक मनाया जाता है। इसमें भी उस परिवार का कोई भी सदस्य किसी भी धार्मिक कामों के साथ-साथ किसी मंदिर में जाना वर्जित हो जाता है। इस बारें में हिंदू धर्म के एक ग्रंथ गरुड़ पुराण में कहा गया है कि जब भी परिवार के किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो परिवार पर सूतक लग जाता है। परिवार के सदस्यों को पुजारी को बुलाकर गरुण पुराण का पाठ करवाकर पातक के नियमों को समझना चाहिए।

किसी व्यक्ति के मरने के 13वें दिन क्रिया कराई जाती है। जिसके बाद अपने क्षमतानुसार ब्राह्मणों को बुलाकर उनको भोजन कराने के साथ-साथ उन्हे दक्षिणा दी जाती है। इसके बाद घर को अच्छी तरह से शुद्ध किया जाता है। और उस मृत व्यक्ति से जुड़ी चीजें जैसे कि कपड़े और उसका समान किसी जरुरतमंद को दे दिया जाता है।

आपने देखा होगा कि

किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार करने के बाद वही तट पर सभी लोग स्नान भी करते है। माना जाता है कि इससे मृत व्यक्ति की आत्मा आपके साथ नहीं जाएगी। उसका आपसे लगाव हट जाएगा, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है।

इसके अनुसार माना जाता है कि जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो वह किस तरह मरा यह सबसे बड़ी बात होती है। जिसके कारण उससे आपको संक्रमण हो सकता है। इस संक्रमण से बचने के लिए हम स्नान करते है। जिससे कि हमारे साथ वहां पर मौजूद कोई भी किटाणु आप के साथ आपके घर न जाएं। जिससे कि आपके बीच कोई संक्रमण फैले।

13वें दिन आपने देखा होगा कि घर में पूजा-पाठ और हवन का आयोजन किया जाता है। इसे पीछे मान्यता है कि इससे मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति मिलती है। वही इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। इसके अनुसार घर में पूजा-पाठ और हवन से हामरे घर का वातावरण ठीक हो जाता है साथ ही शुद्ध हो जाता है। जिससे हमारे घर में मौजूद सभी बैक्टेरिया भी मर जाते है। इसके साथ ही सूतक की समाप्ति हो जाती है।

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